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                <title>यूरोप - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>यूरोप RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>लेबनान में हड्डियों तक को गला देने वाले केमिकल के इस्तेमाल का दावा, इस्राइल पर लगा गंभीर आरोप।</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </strong></p>
<p>मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने इस्राइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के एक गांव पर व्हाइट फॉस्फोरस वाले गोले दागे, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विवादित और खतरनाक हथियार माने जाते हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने सात तस्वीरों को जियोलोकेट और सत्यापित कर यह निष्कर्ष निकाला कि इस्राइल ने दक्षिणी लेबनान के योहमोर गांव के रिहायशी इलाकों में तोपखाने के जरिए व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया। यह हमला उस समय हुआ जब इस्राइली सेना ने कुछ घंटे पहले ही गांव के निवासियों और दक्षिणी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173204/the-claim-of-using-chemicals-that-melt-bones-in-lebanon"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/lebnana.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </strong></p>
<p>मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने इस्राइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के एक गांव पर व्हाइट फॉस्फोरस वाले गोले दागे, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विवादित और खतरनाक हथियार माने जाते हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने सात तस्वीरों को जियोलोकेट और सत्यापित कर यह निष्कर्ष निकाला कि इस्राइल ने दक्षिणी लेबनान के योहमोर गांव के रिहायशी इलाकों में तोपखाने के जरिए व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया। यह हमला उस समय हुआ जब इस्राइली सेना ने कुछ घंटे पहले ही गांव के निवासियों और दक्षिणी लेबनान के कई अन्य गांवों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी थी। ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि वह स्वतंत्र रूप से यह पुष्टि नहीं कर पाया कि उस समय गांव में कोई नागरिक मौजूद था या इस हमले में किसी को नुकसान पहुंचा।</p>
<p>मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन माना जाता है। यह रासायनिक पदार्थ अत्यधिक गर्म होकर जलता है, जिससे इमारतों में आग लग सकती है और यह मानव शरीर को हड्डियों तक जला सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मामूली जलन के बाद भी पीड़ितों को संक्रमण, अंगों के फेल होने या सांस संबंधी गंभीर समस्याओं का खतरा बना रहता है।</p>
<p>ह्यूमन राइट्स वॉच के लेबनान शोधकर्ता रामजी काइस ने कहा कि रिहायशी इलाकों के ऊपर इस्राइली सेना द्वारा व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है और इससे नागरिकों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p>इस मामले पर इस्राइली सेना की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। हालांकि, इससे पहले सेना यह कहती रही है कि वह व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल स्मोक स्क्रीन बनाने के लिए करती है, न कि नागरिकों को निशाना बनाने के लिए।</p>
<p>मानवाधिकार संगठनों ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच पिछले युद्ध के दौरान भी दक्षिणी लेबनान में कई बार व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया गया था, जबकि उस समय भी वहां नागरिक मौजूद थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 21:51:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-इस्राइल का साथ दिया तो माना जाएगा युद्ध की कार्रवाई, ईरान ने यूरोप को दी कड़ी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने यूरोपीय देशों को सीधी चेतावनी दी है। तेहरान ने साफ कहा है कि अगर यूरोप ने अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियान में किसी भी रूप में भाग लिया, तो इसे ईरान के खिलाफ युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में हमले और जवाबी कार्रवाई लगातार बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बकाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘डिफेंसिव एक्शन’ के नाम पर भी अगर कोई देश अमेरिका-इस्राइल अभियान में शामिल होता है, तो उसे आक्रामकता माना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172564/if-america-supports-israel-it-will-be-considered-an-act"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/download1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने यूरोपीय देशों को सीधी चेतावनी दी है। तेहरान ने साफ कहा है कि अगर यूरोप ने अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियान में किसी भी रूप में भाग लिया, तो इसे ईरान के खिलाफ युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में हमले और जवाबी कार्रवाई लगातार बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बकाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘डिफेंसिव एक्शन’ के नाम पर भी अगर कोई देश अमेरिका-इस्राइल अभियान में शामिल होता है, तो उसे आक्रामकता माना जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह प्रतिक्रिया जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को खत्म करने के लिए आवश्यक कदम उठा सकते हैं। ईरान ने इसे सीधे तौर पर युद्ध में शामिल होने की तैयारी बताया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि वे सीधे युद्ध में शामिल नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है। यूरोपीय संघ ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्रिटेन ने अमेरिकी बलों को अपने बेस इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है। वहीं फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा है कि यदि सहयोगी देश मदद मांगते हैं, तो फ्रांस उनकी रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि फ्रांस अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">फ्रांस ने बताया कि प्रभावित देशों में लगभग चार लाख फ्रांसीसी नागरिक मौजूद हैं। हालात बिगड़ने पर उन्हें वाणिज्यिक और सैन्य उड़ानों के जरिए निकाला जा सकता है। इसी बीच क्षेत्र में हमलों का सिलसिला जारी है और रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले से तनाव और बढ़ गया है। ईरान का कहना है कि वह किसी भी बाहरी दखल को स्वीकार नहीं करेगा। यूरोप की संभावित भूमिका को लेकर आने वाले दिनों में हालात और स्पष्ट हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 22:28:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद ईरान का 27 अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा, कतर- यूएई में धमाके</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद ईरान की सेना की प्रमुख इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने मिडिल ईस्ट में मौजूद 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल के कई अहम सैन्य परिसरों पर हमले किए हैं। यह जानकारी अल जजीरा की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है, जिसमें ईरानी सरकारी मीडिया का भी उल्लेख किया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, IRGC ने कहा है कि वह अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की गई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172129/after-confirmation-of-khameneis-death-iran-claims-to-attack-27"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/खामेनेई-की-मौत-की-पुष्टि-के-बाद-ईरान-का-27-अमेरिकी-ठिकानों-पर-हमले-का-दावा,-कतर--यूएई-में-धमाके.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद ईरान की सेना की प्रमुख इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने मिडिल ईस्ट में मौजूद 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल के कई अहम सैन्य परिसरों पर हमले किए हैं। यह जानकारी अल जजीरा की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है, जिसमें ईरानी सरकारी मीडिया का भी उल्लेख किया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, IRGC ने कहा है कि वह अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की गई बमबारी के जवाब में “छठी लहर” के तहत कार्रवाई कर रहा है। बयान में कहा गया है कि “विस्तृत मिसाइल और ड्रोन हमले” इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर किए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">IRGC ने दावा किया कि 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों के अलावा इजरायल का तेल नोफ एयरबेस, तेल अवीव स्थित सेना का कमांड मुख्यालय हाकिर्या, और उसी शहर में स्थित एक बड़े रक्षा औद्योगिक परिसर को निशाना बनाया गया।IRGC ने यह भी चेतावनी दी कि ईरानी बल “लगातार और कठोर बदले की कार्रवाई” करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस बीच कतर की राजधानी दोहा से कई धमाकों की आवाजें सुने जाने की खबर है। स्थानीय निवासियों के हवाले से बताया गया कि शहर के ऊपर आसमान में कम से कम 11 विस्फोटों की आवाज सुनी गई।बाद में कतर के गृह मंत्रालय ने पुष्टि की कि ईरानी हमलों के बाद कुल 16 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, अतिरिक्त आठ घायलों की पुष्टि के बाद कुल संख्या 16 हो गई। साथ ही विभिन्न इलाकों में “सीमित भौतिक नुकसान” की भी जानकारी दी गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इजरायल में सायरन बचने की खबरें है। वहीं, इजरायल के चैनल 12 ने रिपोर्ट किया कि ईरान की ओर से मिसाइल लॉन्च किए जाने के कारण देशभर में एयर अटैक सायरन बजने की आशंका है। इससे इजरायल में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं।अमेरिकी समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में भी ईरानी हमलों का असर देखा गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे टकराव ने अब खाड़ी क्षेत्र को भी सीधे तौर पर प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कतर और यूएई जैसे देशों में धमाकों और आगजनी की घटनाओं ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 21:42:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच भीषण जंग, जानें भारत ने इस पर क्या कहा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong></p>
<p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका की बढ़ती सैन्य टकराव की स्थिति ने पूरे क्षेत्र को युद्ध जैसे हालात में ला दिया है। दोनों पक्षों की ओर से जारी हमलों और पलटवार ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। इस बीच भारत ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भारत ने जताई चिंता, संयम बरतने की अपील</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारत के विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम चिंताजनक हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171980/fierce-war-between-iran-and-israel-america-know-what-india-said"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/amerika-uddh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong></p>
<p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका की बढ़ती सैन्य टकराव की स्थिति ने पूरे क्षेत्र को युद्ध जैसे हालात में ला दिया है। दोनों पक्षों की ओर से जारी हमलों और पलटवार ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। इस बीच भारत ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भारत ने जताई चिंता, संयम बरतने की अपील</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारत के विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम चिंताजनक हैं। मंत्रालय ने सभी पक्षों से तनाव बढ़ाने से बचने और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने यह भी कहा कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। साथ ही सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किए जाने पर जोर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश मंत्रालय के अनुसार, क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है। भारतीय दूतावासों और मिशनों के माध्यम से नागरिकों से संपर्क बनाए रखा गया है और उन्हें सतर्क रहने, स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने तथा आपात स्थिति में मिशन से संपर्क करने की सलाह दी गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>लगातार हमलों से बिगड़े हालात</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में हालात तब और बिगड़ गए जब इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े ठिकानों पर हमले किए गए। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए इजराइल के साथ-साथ क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का सीधा प्रभाव भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, जो ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>नेतन्याहू का कड़ा बयान</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर किए गए हमलों का बचाव करते हुए कहा कि इन कार्रवाइयों से ईरान के लोगों को अपना भविष्य तय करने का अवसर मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर आरोप लगाते हुए कहा कि वहां की सरकार लंबे समय से इजराइल और अमेरिका के खिलाफ शत्रुता रखती रही है। नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर रहा है, जिनका उद्देश्य इजराइल को नुकसान पहुंचाना है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार ने मिडिल ईस्ट में मौजूद भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>अनावश्यक यात्रा से बचें</p>
</li>
<li>
<p>स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें</p>
</li>
<li>
<p>भारतीय दूतावास से संपर्क में रहें</p>
</li>
<li>
<p>आपात स्थिति में तुरंत सहायता लें</p>
</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>वैश्विक चिंता बढ़ी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है। कई देशों ने संयम बरतने और संघर्ष को फैलने से रोकने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिससे पूरी दुनिया प्रभावित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/171980/fierce-war-between-iran-and-israel-america-know-what-india-said</link>
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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 21:47:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य तैनाती, F-35 और B-2 विमानों की मौजूदगी से ईरान पर बढ़ा दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन/तेहरान।</strong> अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती बढ़ा दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">मार्को रुबियो</span></span> ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ समझौते की संभावनाएं कमजोर हुई हैं और अमेरिका सभी विकल्पों के लिए तैयार है।</p>
<p>खबरों के अनुसार, अमेरिका ने कतर के अल उदैद एयरबेस और जॉर्डन के मुफाक साल्टी एयरबेस पर अपने F-15, F-35A और A-10C लड़ाकू विमानों की तैनाती की है। बताया जा रहा है कि इन ठिकानों पर करीब 24 विमान सक्रिय हैं, जिनमें 12 F-35A और 12 अन्य लड़ाकू विमान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170056/america-increased-military-deployment-pressure-on-iran-increased-due-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/अमेरिका-ने-बढ़ाई-सैन्य-तैनाती,-f-35-और-b-2-विमानों-की-मौजूदगी-से-ईरान-पर-बढ़ा-दबाव.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वॉशिंगटन/तेहरान।</strong> अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती बढ़ा दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">मार्को रुबियो</span></span> ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ समझौते की संभावनाएं कमजोर हुई हैं और अमेरिका सभी विकल्पों के लिए तैयार है।</p>
<p>खबरों के अनुसार, अमेरिका ने कतर के अल उदैद एयरबेस और जॉर्डन के मुफाक साल्टी एयरबेस पर अपने F-15, F-35A और A-10C लड़ाकू विमानों की तैनाती की है। बताया जा रहा है कि इन ठिकानों पर करीब 24 विमान सक्रिय हैं, जिनमें 12 F-35A और 12 अन्य लड़ाकू विमान शामिल हैं।</p>
<h4>F-35: अमेरिका का अत्याधुनिक स्टेल्थ फाइटर</h4>
<p>F-35 दुनिया के सबसे आधुनिक स्टेल्थ लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है। इसकी प्रमुख खूबियां—</p>
<ul>
<li>
<p>रडार से बचने की क्षमता (स्टेल्थ टेक्नोलॉजी)</p>
</li>
<li>
<p>लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता</p>
</li>
<li>
<p>सेंसर फ्यूजन टेक्नोलॉजी से लैस</p>
</li>
<li>
<p>एक साथ कई सैन्य यूनिट्स के साथ डेटा शेयर करने में सक्षम</p>
</li>
<li>
<p>एडवांस मिसाइल सिस्टम से लैस</p>
</li>
</ul>
<p>अमेरिका के पास ऐसे 300 से ज्यादा विमान हैं, जिनमें से कुछ को हाल ही में मिडिल ईस्ट में भेजा गया है।</p>
<h4>B-2 बॉम्बर की तैनाती का भी संकेत</h4>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">डोनाल्ड ट्रंप</span></span> ने भी ईरान को लेकर कड़ा रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका B-2 जैसे रणनीतिक बॉम्बर विमानों का इस्तेमाल कर सकता है। B-2 बॉम्बर लंबी दूरी तक भारी बम ले जाने और अत्यधिक सुरक्षित ठिकानों पर हमला करने में सक्षम होता है।</p>
<h4>ईरान ने भी दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी</h4>
<p>तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">अली खामेनेई</span></span> ने संकेत दिया है कि अगर देश की सुरक्षा को खतरा हुआ तो ईरान भी जवाब देने के लिए तैयार है। ईरान ने अपने सैन्य बलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।</p>
<h4>क्षेत्रीय और वैश्विक चिंता बढ़ी</h4>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ती सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय हैं। हालांकि अभी तक किसी बड़े सैन्य टकराव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के कड़े बयानों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 18:01:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UNSC मेंबरशिप, ट्रेड डील और चुनाव… वैश्विक मुद्दों पर भारत का आधिकारिक रुख क्या है?</title>
                                    <description><![CDATA[<h4 style="text-align:justify;"><strong>International Desk</strong></h4>
<h4 style="text-align:justify;">नई दिल्ली:<strong>    </strong><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">भारत से जुड़े अहम वैश्विक मुद्दों पर विदेश मंत्रालय ने विस्तृत प्रेस ब्रीफिंग की। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इंडिया-यूएस ट्रेड डील, भारत-रूस संबंध, चीन के साथ बातचीत, बांग्लादेश चुनाव, एनएसए अजीत डोभाल के कनाडा दौरे, अमेरिका के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ प्रस्ताव और ब्राजील के राष्ट्रपति के भारत दौरे सहित कई विषयों पर जानकारी दी।</span></h4>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>इंडिया-यूएस ट्रेड डील पर क्या कहा?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत और अमेरिका ने <strong>रेसिप्रोकल और म्यूचुअली बेनिफिशियल ट्रेड</strong> पर एक इंटरिम एग्रीमेंट के फ्रेमवर्क को लेकर संयुक्त बयान (जॉइंट स्टेटमेंट) पर सहमति जताई थी, जिसे 7 फरवरी 2026</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169331/unsc-membership-trade-deal-and-elections%E2%80%A6what-is-indias-official-stance"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/unsc-मेंबरशिप,-ट्रेड-डील-और-चुनाव…-वैश्विक-मुद्दों-पर-भारत-का-आधिकारिक-रुख-क्या-है.png" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;"><strong>International Desk</strong></h4>
<h4 style="text-align:justify;">नई दिल्ली:<strong>  </strong><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">भारत से जुड़े अहम वैश्विक मुद्दों पर विदेश मंत्रालय ने विस्तृत प्रेस ब्रीफिंग की। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इंडिया-यूएस ट्रेड डील, भारत-रूस संबंध, चीन के साथ बातचीत, बांग्लादेश चुनाव, एनएसए अजीत डोभाल के कनाडा दौरे, अमेरिका के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ प्रस्ताव और ब्राजील के राष्ट्रपति के भारत दौरे सहित कई विषयों पर जानकारी दी।</span></h4>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>इंडिया-यूएस ट्रेड डील पर क्या कहा?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत और अमेरिका ने <strong>रेसिप्रोकल और म्यूचुअली बेनिफिशियल ट्रेड</strong> पर एक इंटरिम एग्रीमेंट के फ्रेमवर्क को लेकर संयुक्त बयान (जॉइंट स्टेटमेंट) पर सहमति जताई थी, जिसे 7 फरवरी 2026 को जारी किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह जॉइंट स्टेटमेंट दोनों देशों के बीच आपसी समझ का आधार है। अब दोनों पक्ष इस फ्रेमवर्क को लागू करने और इंटरिम एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी फैक्टशीट में किए गए बदलाव उसी साझा समझ को दर्शाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>रूस के साथ संबंधों पर भारत का रुख</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारत-रूस संबंधों पर प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में लगातार सहयोग जारी है। इसमें व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रक्षा सहयोग जैसे अहम क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि द्विपक्षीय संबंधों के ये सभी आयाम आगे भी मजबूत होते रहेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>चीन के साथ बातचीत और UNSC पर समर्थन</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">जायसवाल ने बताया कि चीन के एग्जीक्यूटिव वाइस मिनिस्टर ऑफ फॉरेन अफेयर्स की हालिया भारत यात्रा BRICS शेरपा बैठक (8 से 10 फरवरी, दिल्ली) के संदर्भ में हुई थी। इस दौरान उन्होंने विदेश सचिव के साथ रणनीतिक वार्ता की।</p>
<p style="text-align:justify;">बातचीत में सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति पर चर्चा हुई। उन्होंने यह भी बताया कि चीनी प्रतिनिधि ने कहा है कि चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदों को समझता है और उनका सम्मान करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ प्रस्ताव पर भारत का जवाब</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत को शामिल होने का निमंत्रण मिला है। इस पर जायसवाल ने कहा कि भारत इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भारत हमेशा पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद को बढ़ावा देने के प्रयासों का समर्थन करता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पहल का स्वागत किया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>एनएसए अजीत डोभाल का कनाडा दौरा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">एनएसए अजीत डोभाल के ओटावा दौरे पर प्रवक्ता ने बताया कि उन्होंने अपने कनाडाई समकक्ष से मुलाकात की। यह बैठक सुरक्षा मामलों पर जारी सहयोग का हिस्सा थी।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों देशों ने बेहतर समन्वय और सूचना के सुगम आदान-प्रदान के लिए <strong>लायजन ऑफिसर नियुक्त करने</strong> पर सहमति जताई है। इसकी औपचारिक प्रक्रिया पर आगे जानकारी साझा की जाएगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>बांग्लादेश चुनाव पर भारत का रुख</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">बांग्लादेश में चुनाव को लेकर भारत ने संयमित रुख अपनाया है। जायसवाल ने कहा कि पहले चुनाव परिणाम आने का इंतजार किया जाना चाहिए, ताकि स्पष्ट हो सके कि जनता का जनादेश किस दिशा में है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने दोहराया कि भारत बांग्लादेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष, समावेशी और विश्वसनीय चुनाव का समर्थन करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>ब्राजील के राष्ट्रपति लूला का भारत दौरा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा 18 से 22 फरवरी 2026 तक भारत दौरे पर रहेंगे। वे 19-20 फरवरी को दिल्ली में आयोजित दूसरे AI समिट में हिस्सा लेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">21 फरवरी को भारत-ब्राजील के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। राष्ट्रपति लूला के साथ कई मंत्री और एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आएगा। इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों और व्यावसायिक बैठकों का आयोजन किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 18:01:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हमसे तेल खरीदना बंद नहीं करेगा भारत…ट्रंप के दावे पर रूस का जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा, यह दावा सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं. लावरोव ने कहा कि रूस और भारत के बीच हुए तेल समझौतों पर कोई खतरा नहीं है.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत भी इस मुद्दे पर बयान दे चुका</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">लावरोव का यह बयान उस समय आया जब भारत की ओर से भी इस मुद्दे पर सफाई दी गई. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत अपनी जरूरत के मुताबिक, अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदेगा. उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन को स्थिर रखने के लिए भारत स्रोतों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169281/india-will-not-stop-buying-oil-from-us%E2%80%A6-russias-response"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/trump.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा, यह दावा सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं. लावरोव ने कहा कि रूस और भारत के बीच हुए तेल समझौतों पर कोई खतरा नहीं है.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत भी इस मुद्दे पर बयान दे चुका</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">लावरोव का यह बयान उस समय आया जब भारत की ओर से भी इस मुद्दे पर सफाई दी गई. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत अपनी जरूरत के मुताबिक, अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदेगा. उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन को स्थिर रखने के लिए भारत स्रोतों में विविधता लाता रहेगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने यह भी कहा कि रूस के साथ भारत के सभी समझौते पहले की तरह जारी हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया था, क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा था. बाद में यह टैरिफ वापस ले लिया गया. हालांकि अमेरिका ने चेतावनी दी कि अगर भारत ने सीधे या परोक्ष रूप से रूसी तेल की खरीद दोबारा शुरू की, तो 25% टैरिफ फिर से लगाया जा सकता है.</p>
<p style="text-align:justify;">रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत से रूसी तेल खरीद को लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा, यह दावा सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं. ट्रंप के अलावा किसी और ने ऐसा नहीं कहा है. लावरोव के मुताबिक, रूस और भारत के बीच हुए तेल और अन्य समझौते पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन पर कोई खतरा नहीं है.</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले हफ्ते ट्रंप ने भारत के साथ एक फ्रेमवर्क व्यापार समझौते की घोषणा की थी. उसी दौरान उन्होंने दावा किया कि भारत ने रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदने पर सहमति जताई है. अमेरिका का आरोप है कि रूस तेल बेचकर जो पैसा कमाता है, उसका इस्तेमाल वह यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में करता है.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>लावरोव ने अमेरिका पर आरोप लगाए</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">लावरोव ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह भारत और ब्रिक्स देशों के साथ रूस के व्यापार, निवेश और सैन्य सहयोग को रोकने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका टैरिफ, प्रतिबंध और दबाव वाले कदमों के जरिए दुनियाभर में दबदबा बनाए रखना चाहता है, लावरोव ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के आने के बाद यह नीति और खुलकर दिख रही है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 23:01:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप प्रशासन ने ग्रीन कार्ड लॉटरी कार्यक्रम किया स्थगित, ब्राउन यूनिवर्सिटी गोलीबारी से जुड़ा मामला बना वजह</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk</strong></p>
<p><strong>वॉशिंगटन: </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को विविधता आप्रवासी वीजा यानी ग्रीन कार्ड लॉटरी कार्यक्रम को स्थगित करने का आदेश दिया। यह फैसला ब्राउन विश्वविद्यालय और एमआईटी में हुई गोलीबारी की घटनाओं के बाद लिया गया, जिनका प्रमुख संदिग्ध इसी कार्यक्रम के तहत अमेरिका में दाखिल हुआ था।</p>
<p>होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की सचिव क्रिस्टी नोएम ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) को इस कार्यक्रम को तत्काल रोकने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “यह एक घृणित व्यक्ति था, जिसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163761/united-states-of-america"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ट्रंप-प्रशासन-ने-ग्रीन-कार्ड-लॉटरी-कार्यक्रम.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk</strong></p>
<p><strong>वॉशिंगटन: </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को विविधता आप्रवासी वीजा यानी ग्रीन कार्ड लॉटरी कार्यक्रम को स्थगित करने का आदेश दिया। यह फैसला ब्राउन विश्वविद्यालय और एमआईटी में हुई गोलीबारी की घटनाओं के बाद लिया गया, जिनका प्रमुख संदिग्ध इसी कार्यक्रम के तहत अमेरिका में दाखिल हुआ था।</p>
<p>होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की सचिव क्रिस्टी नोएम ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) को इस कार्यक्रम को तत्काल रोकने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “यह एक घृणित व्यक्ति था, जिसे हमारे देश में कभी प्रवेश नहीं मिलना चाहिए था।”</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, 48 वर्षीय पुर्तगाली नागरिक क्लाउडियो नेवेस वैलेंते ब्राउन विश्वविद्यालय में हुई गोलीबारी का मुख्य संदिग्ध था। इस घटना में दो छात्रों की मौत हो गई, जबकि नौ अन्य घायल हुए। इसके अलावा, एक अलग गोलीबारी की घटना में एमआईटी के एक प्रोफेसर की भी जान चली गई। बाद में बृहस्पतिवार शाम नेवेस वैलेंते ने कथित तौर पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।</p>
<p>प्रोविडेंस पुलिस के एक जासूस के हलफनामे के मुताबिक, नेवेस वैलेंते वर्ष 2000 में छात्र वीजा पर ब्राउन विश्वविद्यालय में पढ़ने आया था। बाद में 2017 में उसे विविधता आप्रवासी वीजा जारी किया गया और कुछ महीनों के भीतर उसे कानूनी रूप से स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) का दर्जा मिल गया। हालांकि, वर्ष 2001 में पढ़ाई छोड़ने और 2017 में वीजा मिलने के बीच की अवधि में वह कहां था, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है।</p>
<p>विविधता वीजा लॉटरी कार्यक्रम के तहत हर साल उन देशों के नागरिकों को, जिनका अमेरिका में प्रतिनिधित्व कम है, लॉटरी के माध्यम से लगभग 50,000 ग्रीन कार्ड दिए जाते हैं। इनमें कई अफ्रीकी देश शामिल होते हैं। यह कार्यक्रम कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया था, इसलिए इसके स्थगन को लेकर कानूनी चुनौतियों का सामना करना तय माना जा रहा है।</p>
<p>आंकड़ों के अनुसार, 2025 के वीजा लॉटरी कार्यक्रम के लिए करीब दो करोड़ लोगों ने आवेदन किया था। इनमें विजेताओं और उनके जीवनसाथियों सहित 1.31 लाख से अधिक लोगों का चयन हुआ था। चयन के बाद उम्मीदवारों को दूतावासों में साक्षात्कार और कड़ी जांच प्रक्रिया से गुजरना होता है। पुर्तगाल के नागरिकों को इस लॉटरी में केवल 38 सीटें मिली थीं।</p>
<p>गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से विविधता वीजा लॉटरी कार्यक्रम के आलोचक रहे हैं और इसे अमेरिका की आव्रजन सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण बताते रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/163761/united-states-of-america</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 18:31:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अरुणाचल पर भारत के सख़्त रुख से भड़का चीन, तकनीकी व निवेश सहयोग पर लगाने लगा ब्रेक</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>भारत और चीन के बीच संबंध एक बार फिर तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गए हैं। अरुणाचल प्रदेश की एक भारतीय महिला को शंघाई हवाई अड्डे पर “अवैध पासपोर्ट” के आरोप में रोकने की घटना के बाद भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद बीजिंग के तेवर और भी सख्त दिखाई देने लगे हैं। इसका सीधा असर दोनों देशों के आर्थिक सहयोग, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी सेक्टर पर देखने को मिल रहा है।</p>
<h3><strong>शंघाई एयरपोर्ट पर रोक ने बढ़ाया विवाद</strong></h3>
<p>अरुणाचल प्रदेश की नागरिक पेमा वांगजोम थोंगडोक को 18 घंटे तक शंघाई एयरपोर्ट पर रोकना चीन के पुराने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161782/china-enraged-by-indias-tough-stance-on-arunachal-started-putting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/अरुणाचल-पर-भारत-के-सख़्त-रुख-से-भड़का-चीन,-तकनीकी-व-निवेश-सहयोग-पर-लगाने-लगा-ब्रेक.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>भारत और चीन के बीच संबंध एक बार फिर तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गए हैं। अरुणाचल प्रदेश की एक भारतीय महिला को शंघाई हवाई अड्डे पर “अवैध पासपोर्ट” के आरोप में रोकने की घटना के बाद भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद बीजिंग के तेवर और भी सख्त दिखाई देने लगे हैं। इसका सीधा असर दोनों देशों के आर्थिक सहयोग, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी सेक्टर पर देखने को मिल रहा है।</p>
<h3><strong>शंघाई एयरपोर्ट पर रोक ने बढ़ाया विवाद</strong></h3>
<p>अरुणाचल प्रदेश की नागरिक पेमा वांगजोम थोंगडोक को 18 घंटे तक शंघाई एयरपोर्ट पर रोकना चीन के पुराने दावे—अरुणाचल को “दक्षिण तिब्बत” बताने—की एक और झलक माना जा रहा है। भारत ने घटना को अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा नियमों और चीन के अपने नियमों का उल्लंघन बताया है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि <em>अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और चीन की किसी भी टिप्पणी से यह तथ्य बदलने वाला नहीं है।</em> भारत की यह तीखी प्रतिक्रिया बीजिंग को साफ संदेश देती है कि नागरिकों की वैध पहचान पर सवाल किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।</p>
<p>इसके विपरीत, चीन ने न तो हिरासत मानने को तैयार हुआ और न ही अपने विवादित दावे से पीछे हटा। विशेषज्ञों का मानना है कि पासपोर्ट संबंधी इन निर्देशों का मकसद अपने भू-राजनीतिक दावों को व्यावहारिक स्तर पर लागू करना है।</p>
<hr />
<h3><strong>भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की राह में चीन का अड़ंगा</strong></h3>
<p>तनाव केवल कूटनीतिक नहीं है; इसका असर आर्थिक सहयोग पर भी दिख रहा है। भारतीय कंपनियों की चीन से तकनीकी साझेदारी और निवेश के कई प्रस्ताव अटके पड़े हैं।</p>
<p><strong>निम्नलिखित प्रोजेक्ट महीनों से रुके हुए हैं—</strong></p>
<ul>
<li>
<p><strong>PG Electroplast</strong> की तकनीकी साझेदारी</p>
</li>
<li>
<p><strong>Hisense</strong> द्वारा भारतीय यूनिट में 26% हिस्सेदारी लेने की योजना</p>
</li>
<li>
<p><strong>Bharti Group</strong> का <strong>Haier India</strong> में 49% अधिग्रहण</p>
</li>
</ul>
<p>चीन इन प्रोजेक्ट्स पर कड़ा मूल्यांकन इसलिए कर रहा है क्योंकि 2020 की सीमा झड़पों के बाद भारत ने <em>Press Note 3</em> लागू किया था, जिसके तहत पड़ोसी देशों के निवेश पर सरकारी मंजूरी अनिवार्य है। बीजिंग इसे राजनीतिक संदेश के रूप में देखता है और अब वही सख्ती भारत के लिए अपना रहा है।</p>
<p>परिणामस्वरूप भारतीय उद्योग दोहरी मुश्किल में है—<br />एक ओर भारतीय निर्माण (Manufacturing) और वैल्यू एडिशन बढ़ाने के लिए चीन की तकनीक और मशीनरी आवश्यक है, दूसरी ओर चीन की मंजूरियों में अनिश्चितता बढ़ गई है।</p>
<hr />
<h3><strong>तनाव का बड़ा अर्थ—संबंधों में 'विश्वसनीयता' की कमी</strong></h3>
<p>ताज़ा घटनाक्रम यह स्पष्ट करता है कि भारत-चीन संबंधों में सुधार केवल बातचीत या आर्थिक प्रलोभनों से नहीं हो सकता। संप्रभुता, सुरक्षा, और राजनीतिक दावे हमेशा प्रमुख भूमिका निभाते हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों का मत है कि—</p>
<ul>
<li>
<p>भारत को हर ऐसे मामले को <strong>ICAO, IATA और वैश्विक मंचों</strong> पर उठाना चाहिए।</p>
</li>
<li>
<p>चीन द्वारा तकनीकी सहयोग में देरी भारत के लिए अपना <strong>स्थानीय टेक इकोसिस्टम मजबूत करने का अवसर</strong> भी है।</p>
</li>
<li>
<p>PLI स्कीम और R&amp;D निवेश को अब रणनीतिक प्राथमिकता देनी होगी।</p>
</li>
<li>
<p>कूटनीति जारी रहे, लेकिन स्पष्ट <em>लाल रेखाओं</em> के साथ।</p>
</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/161782/china-enraged-by-indias-tough-stance-on-arunachal-started-putting</link>
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                <pubDate>Wed, 26 Nov 2025 18:10:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूक्रेन युद्ध में रूस का बड़ा हमला: खारकीव में भारी तबाही, चार की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<h4><strong>International Desk </strong></h4>
<p>रूस-यूक्रेन युद्ध एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। रूस ने 23 नवंबर की रात यूक्रेन के खारकीव शहर पर बड़े पैमाने पर ड्रोन अटैक किया, जिसमें <strong>कम से कम चार लोगों की मौत</strong> हो गई और <strong>17 से अधिक लोग घायल</strong> हुए। शहर एक बार फिर विनाशकारी हमलों का गवाह बना है।</p>
<h4><strong>खारकीव में भीषण आग, कई इमारतें ध्वस्त</strong></h4>
<p>यूक्रेन की आपातकालीन सेवा के मुताबिक:</p>
<ul>
<li>
<p>तीन आवासीय इमारतों में भीषण आग लग गई</p>
</li>
<li>
<p>एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी बड़ा नुकसान हुआ</p>
</li>
<li>
<p>राहत व बचाव टीमें पूरी रात मलबे से शव और घायलों को निकालती</p></li></ul>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161524/russias-big-attack-in-ukraine-war-massive-destruction-in-kharkiv"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/यूक्रेन-युद्ध-में-रूस-का-बड़ा-हमला--खारकीव-में-भारी-तबाही,-चार-की-मौत.webp" alt=""></a><br /><h4><strong>International Desk </strong></h4>
<p>रूस-यूक्रेन युद्ध एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। रूस ने 23 नवंबर की रात यूक्रेन के खारकीव शहर पर बड़े पैमाने पर ड्रोन अटैक किया, जिसमें <strong>कम से कम चार लोगों की मौत</strong> हो गई और <strong>17 से अधिक लोग घायल</strong> हुए। शहर एक बार फिर विनाशकारी हमलों का गवाह बना है।</p>
<h4><strong>खारकीव में भीषण आग, कई इमारतें ध्वस्त</strong></h4>
<p>यूक्रेन की आपातकालीन सेवा के मुताबिक:</p>
<ul>
<li>
<p>तीन आवासीय इमारतों में भीषण आग लग गई</p>
</li>
<li>
<p>एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी बड़ा नुकसान हुआ</p>
</li>
<li>
<p>राहत व बचाव टीमें पूरी रात मलबे से शव और घायलों को निकालती रहीं</p>
</li>
</ul>
<p>स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि घायलों में <strong>11 और 12 वर्ष के दो बच्चे</strong> भी शामिल हैं। मेयर इहोर तेरेखोव ने टेलीग्राम पर चेतावनी देते हुए कहा कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।</p>
<h4><strong>मॉस्को पावर प्लांट अटैक का बदला?</strong></h4>
<p>रिपोर्टों के अनुसार, रूस यह ड्रोन हमला <strong>मॉस्को के पावर प्लांट पर यूक्रेनी हमले</strong> के जवाब में कर रहा है। खारकीव पहले भी कई बार रूस की मिसाइलों और ड्रोन का निशाना बन चुका है और अब फिर से शहर के कई ब्लॉक खंडहर में बदल गए हैं।</p>
<h4><strong>युद्ध की भयावह तस्वीरें फिर सामने</strong></h4>
<p>रूस-यूक्रेन युद्ध लगातार नागरिक इलाकों को प्रभावित कर रहा है। खारकीव से सामने आई तस्वीरों में दिख रहा है:</p>
<ul>
<li>
<p>जलती हुई बहुमंजिला इमारतें</p>
</li>
<li>
<p>मलबे में दबे लोग</p>
</li>
<li>
<p>धुएँ से घिरा पूरा शहर</p>
</li>
<li>
<p>रोते-बिलखते परिवार</p>
</li>
</ul>
<p>युद्ध की इन घटनाओं ने एक बार फिर साबित किया है कि संघर्ष अभी लंबा चलने वाला है और इसका सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर हो रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 18:30:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Rafale पर झूठ बोलता पकड़ा गया पाकिस्तान, फ्रांस की नौसेना ने जियो टीवी की फेक रिपोर्ट का किया पर्दाफाश</title>
                                    <description><![CDATA[<h4 style="text-align:justify;"><strong>International Desk </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान का एक और झूठ अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब हो गया है। फ्रांस की नौसेना (French Navy) ने पाकिस्तानी मीडिया समूह <strong>जियो टीवी</strong> द्वारा की गई गलत रिपोर्टिंग का खुलकर खंडन करते हुए कहा कि उनके नाम से जारी बयान <strong>फर्जी</strong> थे और पूरी रिपोर्ट मनगढ़ंत थी।</p>
<h4><strong>क्या था पाक मीडिया का झूठ?</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">21 नवंबर को जियो टीवी ने अपनी रिपोर्ट में एक कथित फ्रांसीसी अधिकारी “जैक्स लाउने” का हवाला देते हुए दावा किया था कि:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>6-7 मई को 140 से अधिक लड़ाकू विमानों के बीच हवाई मुठभेड़ हुई,</p>
</li>
<li>
<p>जिसमें पाकिस्तानी वायुसेना ने “बेहद शानदार प्रदर्शन” किया,</p>
</li>
<li>
<p>और</p></li></ul>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161521/pak-media-caught-lying-on-rafale-french-navy-exposed"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/rafale-पर-झूठ-बोलता-पकड़ा-गया-पाकिस्तान.webp" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;"><strong>International Desk </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान का एक और झूठ अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब हो गया है। फ्रांस की नौसेना (French Navy) ने पाकिस्तानी मीडिया समूह <strong>जियो टीवी</strong> द्वारा की गई गलत रिपोर्टिंग का खुलकर खंडन करते हुए कहा कि उनके नाम से जारी बयान <strong>फर्जी</strong> थे और पूरी रिपोर्ट मनगढ़ंत थी।</p>
<h4><strong>क्या था पाक मीडिया का झूठ?</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">21 नवंबर को जियो टीवी ने अपनी रिपोर्ट में एक कथित फ्रांसीसी अधिकारी “जैक्स लाउने” का हवाला देते हुए दावा किया था कि:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>6-7 मई को 140 से अधिक लड़ाकू विमानों के बीच हवाई मुठभेड़ हुई,</p>
</li>
<li>
<p>जिसमें पाकिस्तानी वायुसेना ने “बेहद शानदार प्रदर्शन” किया,</p>
</li>
<li>
<p>और चीन के सहयोग से भारतीय वायुसेना के Rafale विमान मार गिराए गए।</p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह जानकारी फ्रांस की नौसेना के अधिकारी से मिली है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>फ्रांस की नौसेना का बड़ा खुलासा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">फ्रेंच नेवी ने एक्स (X) पर आधिकारिक पोस्ट कर बताया कि:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>संबंधित अधिकारी का नाम <em>जैक्स लाउने</em> नहीं, बल्कि <strong>कैप्टन इवान लाउने</strong> है।</p>
</li>
<li>
<p>उन्होंने किसी भी मीडिया संगठन को कोई बयान नहीं दिया।</p>
</li>
<li>
<p>उनके नाम से चल रही सारी टिप्पणियां <strong>पूरी तरह फर्जी</strong> हैं।</p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">नेवी ने साफ लिखा:<br /><strong>“फेक न्यूज। कैप्टन इवान लाउने ने कभी भी किसी प्रकाशन को अपनी मंजूरी नहीं दी। आर्टिकल पूरी तरह झूठा है और तथ्यों से रहित है।”</strong></p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>अफसर की वास्तविक भूमिका क्या है?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">फ्रेंच नेवी ने स्पष्ट किया कि कैप्टन इवान लाउने की भूमिका केवल उस नौसैनिक एयरबेस की कमान संभालने तक सीमित है, जहां <strong>Rafale Marine</strong> विमान तैनात हैं। उनका किसी अंतरराष्ट्रीय एयर कंबैट ऑपरेशन से कोई संबंध नहीं है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ऑपरेशन सिंदूर के बाद झूठ फैलाने में सक्रिय पाक मीडिया</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">भारत के <strong>ऑपरेशन सिंदूर</strong> (पहलगाम आतंकी हमले के बाद की कार्रवाई) के बाद पाकिस्तान के मीडिया में लगातार भारत-विरोधी और तथ्यहीन रिपोर्टें दिखाई जा रही हैं।<br />कुछ सप्ताह पहले पाकिस्तान में स्थित <strong>रूसी दूतावास</strong> ने भी पाक मीडिया द्वारा फैलाए जा रहे झूठ पर कड़ी नाराज़गी जताई थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>एक बार फिर बेनकाब पाकिस्तान</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">जियो टीवी की गलत रिपोर्टिंग ने न सिर्फ पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, बल्कि यह भी दिखाया कि राफेल से जुड़ी भारत-विरोधी फेक न्यूज फैलाने का अभियान लगातार चलाया जा रहा है।<br />फ्रांस की नौसेना ने जो तथ्य सामने रखे हैं, उससे यह साफ हो गया है कि जियो टीवी की कहानी पूरी तरह कल्पित और भ्रामक थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 18:22:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>USA की सेकंड लेडी Usha Vance के 'रिंगलेस' लुक से अमेरिका में मची खलबली, वजह जानकर चौंक जाएंगे आप</title>
                                    <description><![CDATA[<h3 style="text-align:justify;">International Desk </h3><p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेकंड लेडी <strong>उषा वेंस</strong> हाल ही में बिना शादी की अंगूठी दिखाई देने के कारण सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर यह सवाल तेजी से उठने लगा कि आखिर उपराष्ट्रपति <strong>जेडी वेंस</strong> और उषा के रिश्ते में क्या सब ठीक है या नहीं।</p><h4 style="text-align:justify;"><strong>कैसे शुरू हुआ मामला?</strong></h4><p style="text-align:justify;">19 नवंबर को नॉर्थ कैरोलिना के <strong>कैंप लेज्यून</strong> में फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप के साथ एक संयुक्त दौरे के दौरान उषा वेंस को हाथ में <em>वेडिंग रिंग</em> पहने बिना देखा गया। तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया।</p><p style="text-align:justify;">कई यूजर्स ने यह दावा तक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161401/you-will-be-shocked-to-know-the-reason-behind-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/usa-की-सेकंड-लेडी-usha-vance-के-&#039;रिंगलेस&#039;-लुक-से-अमेरिका-में-मची-खलबली,-वजह-जानकर-चौंक-जाएंगे-आप.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">International Desk </h3><p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेकंड लेडी <strong>उषा वेंस</strong> हाल ही में बिना शादी की अंगूठी दिखाई देने के कारण सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर यह सवाल तेजी से उठने लगा कि आखिर उपराष्ट्रपति <strong>जेडी वेंस</strong> और उषा के रिश्ते में क्या सब ठीक है या नहीं।</p><h4 style="text-align:justify;"><strong>कैसे शुरू हुआ मामला?</strong></h4><p style="text-align:justify;">19 नवंबर को नॉर्थ कैरोलिना के <strong>कैंप लेज्यून</strong> में फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप के साथ एक संयुक्त दौरे के दौरान उषा वेंस को हाथ में <em>वेडिंग रिंग</em> पहने बिना देखा गया। तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया।</p><p style="text-align:justify;">कई यूजर्स ने यह दावा तक कर दिया कि कपल के रिश्ते में तनाव है, जबकि कुछ ने इसे पिछले महीनों से चल रही अफवाहों से जोड़ दिया। कई मीम्स और मज़ाक भी वायरल हुए।</p><h4 style="text-align:justify;"><strong>उषा की टीम ने दी सफाई</strong></h4><p style="text-align:justify;">मामला बढ़ने पर उषा वेंस की टीम ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उनके प्रवक्ता ने <em>People Magazine</em> को बताया:</p><p style="text-align:justify;"><strong>“तीन बच्चों की मां उषा का दिन काफी व्यस्त गुजरता है — बहुत सारी घर की जिम्मेदारियाँ, बर्तन, बच्चों को नहलाना… ऐसे में कभी-कभी अंगूठी पहनना भूल जाना बिल्कुल सामान्य है।”</strong></p><p style="text-align:justify;">प्रवक्ता के इस बयान से साफ हो गया कि रिंग न पहनने के पीछे कोई बड़ी वजह नहीं है।</p><h4 style="text-align:justify;"><strong>लेकिन विवादों का सिलसिला पुराना है</strong></h4><p style="text-align:justify;">उषा-जेडी वेंस कपल पिछले कुछ महीनों से लगातार पब्लिक स्क्रूटनी में है।</p><h5 style="text-align:justify;"><strong>1. एरिका किर्क को गले लगाने वाला विवाद</strong></h5><p style="text-align:justify;">जेडी वेंस को हाल ही में टर्निंग पॉइंट यूएसए के एक कार्यक्रम में कंजर्वेटिव एक्टिविस्ट चार्ली किर्क की विधवा <strong>एरिका किर्क</strong> को सार्वजनिक रूप से गले लगाते हुए देखा गया था।<br />बाद में एरिका ने एक कार्यक्रम में वेंस का परिचय कराते हुए कहा था कि उन्हें वेंस में अपने दिवंगत पति जैसी “कुछ बातें” दिखती हैं। इस बयान ने और सवाल खड़े कर दिए।</p><h5 style="text-align:justify;"><strong>2. धर्म परिवर्तन पर विवादित टिप्पणी</strong></h5><p style="text-align:justify;">बीते महीने जेडी वेंस ने एक भाषण में उम्मीद जताई थी कि उनकी पत्नी उषा — जो हिंदू हैं — “एक दिन कैथोलिक धर्म अपना लेंगी।”<br />इस बयान पर अमेरिकी मीडिया और सोशल मीडिया में काफी बहस छिड़ गई थी।</p><h4 style="text-align:justify;"><strong>कौन हैं उषा वेंस?</strong></h4><p style="text-align:justify;">उषा और जेडी वेंस की मुलाकात <strong>येल लॉ स्कूल</strong> में हुई थी। दोनों ने 2014 में शादी की और आज इनके तीन बच्चे हैं:</p><ul><li style="text-align:justify;"><p><strong>इवान (8)</strong></p></li><li style="text-align:justify;"><p><strong>विवेक (5)</strong></p></li><li><p style="text-align:justify;"><strong>मिराबेल (3)</strong></p></li></ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Nov 2025 17:54:31 +0530</pubDate>
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