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                <title>एशिया - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>एशिया RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>किसान समृद्धि हमारा संकल्प &quot; भाव के साथ समीक्षा बैठक का किया गया आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देश में वर्तमान कृषि की दशा व दिशा बदलने के लिए मिलकर जिम्मेदारी के साथ कार्य करना है, जिससे सभी  की विजय हो।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  उक्त बातें वरिष्ठ महाप्रबंधक विपणन नई दिल्ली इफको श्री संजय कुलश्रेष्ठ ने बतौर मुख्य अतिथि,  इफको पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र अधिकारियों की समीक्षा बैठक के दौरान कहीं।  कार्यक्रम का प्रारंभ  "किसान समृद्धि हमारा संकल्प" के भाव के साथ दीप प्रज्वलित करके किया गया। मुख्य अतिथि  ने वर्तमान कृषि में मिट्टी के स्वास्थ्य के प्रति सजग होने की बात कहते हुए कहा की मिट्टी में जीवांश कार्बन</div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-02/1001610032.jpg" alt="किसान समृद्धि हमारा संकल्प" width="1200" height="800" /></div>
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<div style="text-align:justify;"> </div>
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<div style="text-align:justify;">श्री</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171120/kisan-samridhi-hamara-review-meeting-was-organized-with-the-spirit"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1001610031.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश में वर्तमान कृषि की दशा व दिशा बदलने के लिए मिलकर जिम्मेदारी के साथ कार्य करना है, जिससे सभी  की विजय हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> उक्त बातें वरिष्ठ महाप्रबंधक विपणन नई दिल्ली इफको श्री संजय कुलश्रेष्ठ ने बतौर मुख्य अतिथि,  इफको पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र अधिकारियों की समीक्षा बैठक के दौरान कहीं।  कार्यक्रम का प्रारंभ  "किसान समृद्धि हमारा संकल्प" के भाव के साथ दीप प्रज्वलित करके किया गया। मुख्य अतिथि  ने वर्तमान कृषि में मिट्टी के स्वास्थ्य के प्रति सजग होने की बात कहते हुए कहा की मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा को बढ़ाने के लिए कार्य करना होगा। इसके लिए कार्बनिक खादों, हरी खाद एवं जैव उर्वरकों के प्रयोग को जिम्मेदारी पूर्वक बताना होगा ।</div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-02/1001610032.jpg" alt="किसान समृद्धि हमारा संकल्प" width="1280" height="800"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> किसान भाइयों को प्रेरित करना होगा कि वह अपनी मिट्टी की जांच कर के मृदा कार्ड के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग सुनिश्चित करें जिससे स्वस्थ एवं टिकाऊ उत्पादन मिल सके और भविष्य की कृषि के लिए मिट्टी भी सुरक्षित रहे। कृषि में जैव उर्वरकों के प्रयोग को प्रोत्साहित करने की जरूरत है ताकि मिट्टी में मित्र जीवों की संख्या मे वृद्धि हो और सस्ती एवं टिकाऊ खेती का रास्ता बने।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्री कुलश्रेष्ठ ने बताया की इफको के नैनो उर्वरक पर्यावरण हितैषी हैं एवं कृषि लागत को कम करने में सहायक हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-02/1001610033.jpg" alt="किसान समृद्धि हमारा संकल्प" width="1280" height="800"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर मुख्य प्रबंधक इफको नई दिल्ली  एन.एम. गजेरा , इफको ई बाजार के वरिष्ठ अधिकारी  एन.के. भाटिया, राज्य विपणन प्रबंधक इफको उत्तर प्रदेश  यतेंद्र तेवतिया,  ने अपने विचार व्यक्त किए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर इफको फूलपुर इकाई के महाप्रबंधक उत्पादन  संजय भंडारी, इफको के संयुक्त उद्यम नैनो विजन, ई बाजार, इफको एमसी के अधिकारीगण उपस्थित रहे। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में पूर्वी उत्तर प्रदेश के 40 क्षेत्राधिकारियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानाचार्य कोरडेट डॉ.डी.के.सिंह ने सभी प्रतिभागियों को कोरडेट की गतिविधियों से परिचित कराया एवं विभिन्न इकाइयों का भ्रमण भी कराया तथा नैनो उर्वरकों, जैव उर्वरकों के विभिन्न रवि फसलों पर लगे ट्रायल्स एवं प्रदर्शनों का भी अवलोकन कराया।  संयुक्त महाप्रबंधक इफको नैनो संयंत्र ,फूलपुर,  अरुण कुमार ने सभी प्रतिभागियों को नैनो यूरिया संयंत्र का भ्रमण कराया ।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 22:41:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय मंच पर फजीहत! तीन गलतियों के चलते Expo से बाहर हुई गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University)</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">ग्रेटर नोएडा स्थित Galgotias University एक बार फिर विवादों में आ गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) Expo से यूनिवर्सिटी को बाहर किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने इस फैसले की वजह स्पष्ट करते हुए कहा कि “झूठी और भ्रामक जानकारी को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं के लिए ऐसे मंच पर जगह नहीं हो सकती।”</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि यह Expo भारत की ओर से AI सेक्टर में अपनी क्षमताओं को दुनिया के सामने रखने का बड़ा मंच था। ऐसे में गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद इसे भारत की छवि के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170323/embarrassment-on-international-stage-galgotias-university-out-of-expo-due"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/galgotiya-university.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ग्रेटर नोएडा स्थित Galgotias University एक बार फिर विवादों में आ गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) Expo से यूनिवर्सिटी को बाहर किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने इस फैसले की वजह स्पष्ट करते हुए कहा कि “झूठी और भ्रामक जानकारी को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं के लिए ऐसे मंच पर जगह नहीं हो सकती।”</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि यह Expo भारत की ओर से AI सेक्टर में अपनी क्षमताओं को दुनिया के सामने रखने का बड़ा मंच था। ऐसे में गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद इसे भारत की छवि के लिए भी नुकसानदायक माना गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है पूरा मामला?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के मुताबिक, गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने AI और मशीन लर्निंग से जुड़े अपने प्रोजेक्ट्स और उपलब्धियों को लेकर Expo में कुछ ऐसे दावे किए थे, जिनकी जांच में पुष्टि नहीं हो सकी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले की समीक्षा की और यूनिवर्सिटी की भागीदारी रद्द कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अधिकारियों का कहना है कि AI जैसे संवेदनशील और तकनीकी क्षेत्र में गलत या बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई जानकारी से अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की साख प्रभावित होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सरकार ने गिनाए तीन बड़े ब्लंडर्स</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार की प्राथमिक जांच में तीन बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं:</p>
<blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;"><strong>1. उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना</strong><br />यूनिवर्सिटी पर आरोप है कि उसने अपने AI प्रोजेक्ट्स और रिसर्च को लेकर ऐसे दावे किए जो आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2. गलत डेटा और भ्रामक प्रस्तुति</strong><br />Expo में दिखाए जाने वाले कुछ मॉडल और आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठे। जांच में पाया गया कि कुछ जानकारी सत्यापित नहीं थी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>3. अंतरराष्ट्रीय मंच पर गलत प्रतिनिधित्व</strong><br />अधिकारियों के अनुसार, यूनिवर्सिटी ने खुद को कुछ प्रोजेक्ट्स का प्रमुख डेवलपर बताया, जबकि उनमें अन्य संस्थानों की भी भूमिका थी।</p>
</blockquote>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्यों अहम था यह Expo?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">यह AI Expo भारत के लिए खास माना जा रहा था क्योंकि देश AI टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और रिसर्च के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में किसी भी संस्थान द्वारा गलत जानकारी देने को गंभीरता से लिया गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>यूनिवर्सिटी की प्रतिक्रिया</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मामले पर अभी तक यूनिवर्सिटी की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी अपने पक्ष में दस्तावेज तैयार कर रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आगे क्या?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यूनिवर्सिटी के खिलाफ आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है। वहीं, AI Expo के आयोजकों ने साफ किया है कि भविष्य में केवल सत्यापित और प्रमाणित संस्थानों को ही भागीदारी दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि तेजी से बढ़ रहे AI सेक्टर में संस्थानों के दावों की जांच कितनी जरूरी है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साख मजबूत बनी रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/170323/embarrassment-on-international-stage-galgotias-university-out-of-expo-due</link>
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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 13:13:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-फ्रांस साझेदारी की कोई सीमा नहीं: नरेंद्र मोदी-इमैनुएल मैक्रों बैठक में रक्षा, सुरक्षा और व्यापार पर बड़ा जोर</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;"><strong>International Desk</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेंद्र मोदी</span></span> ने मंगलवार को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">इमैनुएल मैक्रों</span></span> के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की अहम बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना था। महाराष्ट्र लोक भवन में हुई इस वार्ता में दोनों नेताओं ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करते हुए रक्षा, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक मुद्दों सहित कई विषयों पर चर्चा की।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बैठक राष्ट्रपति मैक्रों की भारत की चौथी यात्रा के दौरान आयोजित की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात पर खुशी जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अपने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170053/there-is-no-limit-to-india-france-partnership-said-pm-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/भारत-फ्रांस-साझेदारी-की-कोई-सीमा-नहीं.webp" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><strong>International Desk</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेंद्र मोदी</span></span> ने मंगलवार को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">इमैनुएल मैक्रों</span></span> के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की अहम बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना था। महाराष्ट्र लोक भवन में हुई इस वार्ता में दोनों नेताओं ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करते हुए रक्षा, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक मुद्दों सहित कई विषयों पर चर्चा की।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बैठक राष्ट्रपति मैक्रों की भारत की चौथी यात्रा के दौरान आयोजित की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात पर खुशी जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अपने मित्र से मुंबई में मिलकर उन्हें बेहद प्रसन्नता हुई। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति मैक्रों को मुंबई बेहद पसंद आया और उन्होंने सुबह की दौड़ का भी आनंद लिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मुंबई की सड़कों पर मैक्रों की मॉर्निंग जॉगिंग</h4>
<p style="text-align:justify;">मुंबई दौरे के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों सुबह-सुबह जॉगिंग करते नजर आए। उनके साथ फ्रांसीसी और भारतीय अधिकारी तथा सुरक्षाकर्मी मौजूद थे। इस दौरान स्थानीय लोगों और मीडिया की भी नजर उन पर पड़ी, जिससे यह पल चर्चा का विषय बन गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">26/11 के पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि</h4>
<p style="text-align:justify;">अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों और फ्रांस की प्रथम महिला ब्रिगिट मैक्रों ने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह भाव आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति मैक्रों ने इस मौके पर भारत और फ्रांस के बीच लोकतंत्र, शांति और वैश्विक स्थिरता जैसे साझा मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है और भविष्य में यह साझेदारी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा</h4>
<p style="text-align:justify;">भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में पहले से ही मजबूत सहयोग है। इस बैठक को दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहराई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 17:52:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bangladesh Election 2026: ऑब्जर्वर लिस्ट से भारत गायब, चीन-पाकिस्तान की मौजूदगी पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ढाका।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><br />बांग्लादेश में 2026 में होने वाले आम चुनावों को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों (International Observers) की सूची ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। इस सूची में पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं, लेकिन भारत का नाम नदारद है। भारत-बांग्लादेश के लंबे समय से चले आ रहे करीबी संबंधों के बावजूद यह अनुपस्थिति कूटनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग की ओर से जारी सूची के अनुसार, पाकिस्तान से 8, चीन से 3, तुर्किए से 13, श्रीलंका से 11 और जापान, दक्षिण कोरिया, रूस सहित कई देशों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169276/india-missing-from-bangladesh-election-2026-observer-list-questions-raised"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/bangladesh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ढाका।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><br />बांग्लादेश में 2026 में होने वाले आम चुनावों को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों (International Observers) की सूची ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। इस सूची में पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं, लेकिन भारत का नाम नदारद है। भारत-बांग्लादेश के लंबे समय से चले आ रहे करीबी संबंधों के बावजूद यह अनुपस्थिति कूटनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग की ओर से जारी सूची के अनुसार, पाकिस्तान से 8, चीन से 3, तुर्किए से 13, श्रीलंका से 11 और जापान, दक्षिण कोरिया, रूस सहित कई देशों के प्रतिनिधि ढाका पहुंच रहे हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ का एक विशेष मिशन भी चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करेगा। हालांकि, पड़ोसी और प्रमुख सहयोगी देश भारत को इस सूची में जगह नहीं मिली है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>यूनुस सरकार के बाद बदले रिश्ते?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">शेख हसीना सरकार के पतन के बाद गठित यूनुस सरकार के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव देखा गया है। सीमा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में मजबूत सहयोग के बावजूद हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने रिश्तों में ठंडापन ला दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत को ऑब्जर्वर सूची से बाहर रखना इसी बदले हुए समीकरण का संकेत हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>चीन-पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सूची में पाकिस्तान और चीन की मौजूदगी को केवल औपचारिकता नहीं माना जा रहा है। चीन बांग्लादेश का बड़ा निवेशक है, जबकि पाकिस्तान की भागीदारी को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के नजरिए से देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम ढाका की विदेश नीति में संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>राजनीतिक तटस्थता दिखाने की कोशिश?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि पूर्व सरकार भारत के करीब थी। विपक्ष अक्सर “भारत-समर्थक” होने का मुद्दा उठाता रहा है। ऐसे माहौल में भारत को पर्यवेक्षक सूची से बाहर रखना सरकार की ओर से चुनाव प्रक्रिया को “भारत-प्रभाव से मुक्त” दिखाने का प्रयास माना जा रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कूटनीतिक संकेत या संयोग?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह फैसला महज संयोग नहीं हो सकता। दक्षिण एशिया में हर कूटनीतिक कदम का एक संदेश होता है। भारत की अनुपस्थिति यह संकेत दे सकती है कि ढाका अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्वतंत्र पहचान और संतुलित नीति को मजबूत करना चाहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि भारत को सूची से बाहर रखने पर आधिकारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया आएगी या नहीं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बयानों से ही यह तय होगा कि यह कदम रणनीतिक बदलाव है या केवल एक अस्थायी राजनीतिक फैसला।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन इतना तय है कि बांग्लादेश का यह चुनाव केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय कूटनीति की दिशा भी तय कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 22:22:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बकाया भुगतान को लेकर अडानी ग्रुप का बांग्लादेश को पत्र, बिजली संकट की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ढाका/नई दिल्ली।</strong></p><p style="text-align:justify;"><br />अडानी ग्रुप और बांग्लादेश सरकार के बीच बिजली आपूर्ति को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अडानी पावर लिमिटेड ने बांग्लादेश के पावर डेवलपमेंट बोर्ड (PDB) को करीब <strong>112.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक)</strong> के बकाया भुगतान को लेकर चेतावनी भरा पत्र भेजा है। कंपनी ने कहा है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो देश में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।</p><p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 29 जनवरी को अडानी पावर के वाइस प्रेसिडेंट अविनाश अनुराग ने पीडीबी के चेयरमैन को पत्र लिखकर बकाया राशि के तत्काल भुगतान की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168714/adani-groups-letter-to-bangladesh-regarding-payment-of-dues-warning"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/adani.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ढाका/नई दिल्ली।</strong></p><p style="text-align:justify;"><br />अडानी ग्रुप और बांग्लादेश सरकार के बीच बिजली आपूर्ति को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अडानी पावर लिमिटेड ने बांग्लादेश के पावर डेवलपमेंट बोर्ड (PDB) को करीब <strong>112.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक)</strong> के बकाया भुगतान को लेकर चेतावनी भरा पत्र भेजा है। कंपनी ने कहा है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो देश में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।</p><p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 29 जनवरी को अडानी पावर के वाइस प्रेसिडेंट अविनाश अनुराग ने पीडीबी के चेयरमैन को पत्र लिखकर बकाया राशि के तत्काल भुगतान की मांग की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बिजली संयंत्र के नियमित संचालन के लिए इस राशि का भुगतान अत्यंत आवश्यक है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>बकाया राशि का विवरण</strong></h3><p style="text-align:justify;">पत्र के मुताबिक, कुल बकाया रकम में</p><ul style="text-align:justify;"><li><p><strong>53.2 मिलियन डॉलर</strong> जून तक का पुराना बकाया,</p></li><li><p>जबकि <strong>59.6 मिलियन डॉलर</strong> अक्टूबर तक की बिजली आपूर्ति का भुगतान शामिल है।</p></li></ul><p style="text-align:justify;">कंपनी का कहना है कि कई बार अनुरोध करने के बावजूद अब तक पूरी राशि का भुगतान नहीं किया गया है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>बढ़ता आर्थिक दबाव</strong></h3><p style="text-align:justify;">अडानी ग्रुप ने पत्र में यह भी कहा है कि बढ़ते बकाये के कारण बिजली उत्पादन, रखरखाव और सहयोगी कंपनियों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। यदि भुगतान में और देरी हुई, तो बिजली आपूर्ति बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।</p><p style="text-align:justify;">कंपनी के अनुसार, आर्थिक संकट की स्थिति में बिजली उत्पादन और वितरण प्रभावित होने की आशंका है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं और उद्योगों पर पड़ेगा।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>पहले भी हो चुका है विवाद</strong></h3><p style="text-align:justify;">यह विवाद पहले भी सामने आ चुका है। नवंबर 2025 में अडानी ग्रुप ने भुगतान न मिलने पर बिजली सप्लाई रोकने की चेतावनी दी थी। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने करीब <strong>100 मिलियन डॉलर</strong> का भुगतान कर स्थिति को संभाला था।</p><p style="text-align:justify;">हालांकि, दिसंबर के बाद से फिर बकाया बढ़ने लगा और पुराने भुगतान का पूरा निपटारा नहीं हो सका। अब एक बार फिर बिजली संकट की आशंका गहराने लगी है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>चुनाव से पहले बढ़ी चिंता</strong></h3><p style="text-align:justify;">यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब बांग्लादेश में आगामी <strong>12 फरवरी को संसदीय चुनाव</strong> होने हैं। देश पहले से ही राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। चुनावी माहौल में बिजली संकट की आशंका ने सरकार की परेशानियां और बढ़ा दी हैं।</p><p style="text-align:justify;">वर्तमान में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार सत्ता में है। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध के चलते राजनीतिक हालात पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका</strong></h3><p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस विवाद का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो इसका नकारात्मक असर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और निवेश पर पड़ सकता है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से उत्पादन और व्यापार गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।</p><p style="text-align:justify;">साथ ही, यह विवाद भारत-बांग्लादेश के व्यापारिक और ऊर्जा सहयोग पर भी असर डाल सकता है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार</strong></h3><p style="text-align:justify;">फिलहाल बांग्लादेश सरकार और पावर डेवलपमेंट बोर्ड की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही अडानी ग्रुप से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश करेगी, ताकि चुनाव से पहले किसी बड़े संकट से बचा जा सके।</p><hr /><p style="text-align:justify;">अगर आप चाहें, तो मैं इसे आपके अखबार के नाम के साथ <strong>फ्रंट पेज लीड</strong>, <strong>संक्षिप्त कॉलम</strong>, या <strong>ब्रेकिंग न्यूज फॉर्मेट</strong> में भी तैयार कर दूँ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 19:55:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Taiwan ने China को दिया एक और झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk</strong></p>
<p><strong>नई ताइपे। </strong>चीन और ताइवान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ताइवान ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए <strong>TikTok सहित छह चीनी मोबाइल ऐप्लिकेशनों पर शैक्षणिक परिसरों के इंटरनेट नेटवर्क पर प्रतिबंध</strong> लगा दिया है। ताइवान के शिक्षा मंत्रालय ने इन ऐप्स को <strong>डिजिटल और साइबर सुरक्षा के लिए खतरा</strong> बताया है।</p>
<p>शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अब स्कूलों, विश्वविद्यालयों और मंत्रालय से जुड़ी एजेंसियों में उपयोग होने वाले <strong>कैंपस नेटवर्क</strong>, जिनमें <strong>TANet और iTaiwan हॉटस्पॉट</strong> शामिल हैं, पर इन ऐप्स तक पहुंच पूरी तरह बंद रहेगी। इसके साथ ही, <strong>सरकारी और आधिकारिक उपकरणों</strong> पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167692/taiwan-gave-another-blow-to-china"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/taiwan-ने-china-को-दिया-एक-और-झटका.png" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk</strong></p>
<p><strong>नई ताइपे। </strong>चीन और ताइवान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ताइवान ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए <strong>TikTok सहित छह चीनी मोबाइल ऐप्लिकेशनों पर शैक्षणिक परिसरों के इंटरनेट नेटवर्क पर प्रतिबंध</strong> लगा दिया है। ताइवान के शिक्षा मंत्रालय ने इन ऐप्स को <strong>डिजिटल और साइबर सुरक्षा के लिए खतरा</strong> बताया है।</p>
<p>शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अब स्कूलों, विश्वविद्यालयों और मंत्रालय से जुड़ी एजेंसियों में उपयोग होने वाले <strong>कैंपस नेटवर्क</strong>, जिनमें <strong>TANet और iTaiwan हॉटस्पॉट</strong> शामिल हैं, पर इन ऐप्स तक पहुंच पूरी तरह बंद रहेगी। इसके साथ ही, <strong>सरकारी और आधिकारिक उपकरणों</strong> पर इन ऐप्स को डाउनलोड, इंस्टॉल और इस्तेमाल करने पर भी रोक लगा दी गई है।</p>
<h3>सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला</h3>
<p>शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि ताइवान के <strong>डिजिटल मामलों के मंत्रालय</strong> ने पिछले महीने इन छह चीनी ऐप्स को <strong>सूचना सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण</strong> घोषित किया था। मंत्रालय ने आम नागरिकों से भी अपनी डिजिटल सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अपील की थी।</p>
<p>एक संवाददाता सम्मेलन में शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि <strong>TikTok पर हानिकारक और अनुचित सामग्री</strong> को लेकर कई देशों में जुर्माना लगाया जा चुका है, जिससे इसके सुरक्षा मानकों पर सवाल उठते हैं।</p>
<h3>बच्चों और युवाओं की सुरक्षा पर जोर</h3>
<p>शिक्षा उप मंत्री <strong>चू चुन-चांग</strong> ने कहा कि यह निर्णय<br /><strong>साइबर सुरक्षा प्रबंधन अधिनियम</strong> और<br /><strong>बाल एवं किशोर कल्याण एवं अधिकार संरक्षण अधिनियम</strong><br />के तहत लिया गया है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय वर्ष <strong>2014 से ही कैंपस नेटवर्क को अनुचित और हानिकारक सामग्री से सुरक्षित</strong> करता आ रहा है।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों को शिक्षण गतिविधियों में <strong>उच्च जोखिम वाले एप्लिकेशनों</strong> के उपयोग से बचना चाहिए, ताकि छात्रों को सुरक्षित और उपयुक्त शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।</p>
<h3>क्या है TANet?</h3>
<p>TANet शिक्षा मंत्रालय द्वारा छात्रों और शिक्षकों को प्रदान की जाने वाली <strong>निःशुल्क इंटरनेट सेवा</strong> है। ताइपे टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान में <strong>9,000 से अधिक iTaiwan हॉटस्पॉट</strong> हैं, जिनका संचालन डिजिटल मामलों के मंत्रालय द्वारा किया जाता है।</p>
<h3>मानसिक स्वास्थ्य पर भी फोकस</h3>
<p>मंत्रालय ने कहा कि युवाओं के <strong>मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी</strong> करना और उन्हें ऑनलाइन जीवन व वास्तविक दुनिया के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए मार्गदर्शन देना बेहद जरूरी है। इसके लिए स्कूलों और अभिभावकों के साथ मिलकर बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के प्रयास जारी रहेंगे।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल <strong>ताइवान की साइबर सुरक्षा नीति</strong> को मजबूत करता है, बल्कि चीन के डिजिटल प्रभाव को सीमित करने की दिशा में भी एक अहम संकेत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 18:01:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की रणनीतिक ताकत, जयशंकर ने कोमोरोस के विदेश मंत्री से की अहम मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk</strong></p>
<p><strong>नई दिल्ली। </strong>हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कोमोरोस के विदेश मंत्री म्बाए मोहम्मद से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच स्वास्थ्य, खेल, अवसंरचना और क्षमता निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई।</p>
<p>विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि कोमोरोस के विदेश मंत्री से मिलकर उन्हें खुशी हुई और दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संपर्क बनाए रखने के महत्व पर सहमति बनी।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167682/indias-strategic-strength-will-increase-in-the-indian-ocean-jaishankar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/हिंद-महासागर-में-बढ़ेगी-भारत-की-रणनीतिक-ताकत.png" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk</strong></p>
<p><strong>नई दिल्ली। </strong>हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कोमोरोस के विदेश मंत्री म्बाए मोहम्मद से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच स्वास्थ्य, खेल, अवसंरचना और क्षमता निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई।</p>
<p>विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि कोमोरोस के विदेश मंत्री से मिलकर उन्हें खुशी हुई और दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संपर्क बनाए रखने के महत्व पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि यह बातचीत भारत–कोमोरोस संबंधों को नई दिशा देने वाली है।</p>
<p>कोमोरोस के विदेश मंत्री म्बाए मोहम्मद दूसरी भारत–अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं, जो शनिवार को आयोजित होने वाली है। इस संदर्भ में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि कोमोरोस के विदेश मंत्री की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध और अधिक मजबूत होंगे।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने वर्ष 1976 में कोमोरोस के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। मेडागास्कर की राजधानी अंतानानारिवो स्थित भारतीय दूतावास को कोमोरोस के लिए भी मान्यता प्राप्त है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से घनिष्ठ और मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं और क्षेत्रीय व बहुपक्षीय मंचों पर कई मुद्दों पर दोनों के विचार समान हैं।</p>
<p>कोमोरोस वर्ष 2012 से हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) और 2017 से अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का सदस्य है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। कोमोरोस में लगभग 250 भारतीय नागरिक रहते हैं, जो व्यापार, व्यवसाय और विभिन्न पेशों में सक्रिय हैं और देश के आर्थिक विकास में अहम योगदान दे रहे हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि भारत दूसरी भारत–अरब विदेश मंत्रियों की बैठक (IAFMM) की मेजबानी कर रहा है, जिसकी सह-अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में अरब लीग के सदस्य देशों के विदेश मंत्री और अरब लीग के महासचिव भी शामिल होंगे। यह बैठक करीब 10 वर्षों के अंतराल के बाद हो रही है। इससे पहले पहली भारत–अरब विदेश मंत्रियों की बैठक वर्ष 2016 में बहरीन में आयोजित की गई थी।</p>
<p>पहली बैठक में अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति को सहयोग के पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया था। अब दूसरी बैठक से इन क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे भारत की हिंद महासागर क्षेत्र में भूमिका और प्रभाव दोनों मजबूत होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 17:50:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>क्रेमलिन में UAE राष्ट्रपति का भव्य स्वागत, पुतिन बोले— अरब जगत में हमारे मुख्य साझेदार हैं आप</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk</strong></p>
<p><strong>मॉस्को।</strong> संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान आधिकारिक दौरे पर रूस पहुंचे, जहां ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस के सेंट जॉर्ज हॉल में उनका औपचारिक और भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूएई को अरब जगत में रूस का “मुख्य साझेदार” बताया और दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग पर जोर दिया।</p>
<p>रूसी राष्ट्रपति की आधिकारिक वेबसाइट और टीवी ब्रिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने रूस-यूएई द्विपक्षीय व्यापार में निरंतर वृद्धि और संबंधों में सकारात्मक गति को रेखांकित किया। उन्होंने व्यापार, आर्थिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167673/grand-welcome-to-uae-president-in-kremlin-putin-said-%E2%80%93"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/क्रेमलिन-में-uae-राष्ट्रपति-का-भव्य-स्वागत,-पुतिन-बोले—-अरब-जगत-में-हमारे-मुख्य-साझेदार-हैं-आप.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk</strong></p>
<p><strong>मॉस्को।</strong> संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान आधिकारिक दौरे पर रूस पहुंचे, जहां ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस के सेंट जॉर्ज हॉल में उनका औपचारिक और भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूएई को अरब जगत में रूस का “मुख्य साझेदार” बताया और दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग पर जोर दिया।</p>
<p>रूसी राष्ट्रपति की आधिकारिक वेबसाइट और टीवी ब्रिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने रूस-यूएई द्विपक्षीय व्यापार में निरंतर वृद्धि और संबंधों में सकारात्मक गति को रेखांकित किया। उन्होंने व्यापार, आर्थिक और तकनीकी सहयोग पर अंतर-सरकारी आयोग के प्रभावी कार्य, संयुक्त निवेश परियोजनाओं, व्यापार मंचों और क्षेत्रीय साझेदारियों के विस्तार का उल्लेख किया।</p>
<p>पुतिन ने मानवीय सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर देते हुए कहा कि शिक्षा, विज्ञान और खेल के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने नवंबर में यूएई में आयोजित रूसी संस्कृति दिवस की सफलता का उल्लेख किया और अमीरात में एक रूसी विश्वविद्यालय तथा युवा विज्ञान पार्क स्थापित करने की योजनाओं की जानकारी दी। पर्यटन क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। वर्ष 2025 के पहले नौ महीनों में लगभग 15 लाख रूसी नागरिकों ने यूएई की यात्रा की, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है।</p>
<p>यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने विश्वास जताया कि वर्ष 2026 रूस के लिए प्रगति और विकास का वर्ष होगा और इससे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने मॉस्को के साथ सहयोग को गहरा करने और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए यूएई की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सेवा व्यापार और निवेश से जुड़े हालिया समझौते तथा यूएई और यूरेशियन आर्थिक संघ (ईएईयू) के बीच आर्थिक साझेदारी समझौता व्यापार विस्तार और पारस्परिक निवेश को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएंगे।</p>
<p>इस साझेदारी पर टिप्पणी करते हुए रूसी संघ सरकार के अधीन वित्तीय विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विशेषज्ञ मिखाइल खाचतुरियन ने कहा कि भले ही दोनों देशों के बीच व्यापार संरचना पूरी तरह संतुलित न हो, लेकिन तेज़ विकास, बढ़ते निवेश और नए समझौते एक अधिक स्थिर और विविध साझेदारी की नींव रख रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि रूस हलाल मांस और मिठाइयों सहित कृषि उत्पादों के निर्यात में वृद्धि कर रहा है, जबकि यूएई में रूसी निवेश 30 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है और वहां लगभग 4,000 रूसी कंपनियां पंजीकृत हैं। ऊर्जा मशीनरी, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, डिजिटल प्रौद्योगिकी, पर्यटन, भुगतान प्रणाली और कृषि जैसे क्षेत्र दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 17:30:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>मैं ठीक हूं, आप टेंशन मत लेना… ईरान में पढ़ रही भारतीय छात्रा का परिवार को संदेश, वीडियो में बताई जमीनी हकीकत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों और इंटरनेट शटडाउन के बीच वहां पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर परिजनों की चिंता बढ़ गई है। इसी बीच ईरान में मेडिकल की पढ़ाई कर रही एक कश्मीरी छात्रा का वीडियो संदेश सामने आया है, जिसमें वह अपने परिवार को आश्वस्त करते हुए कहती है— <em>“मैं ठीक हूं, आप लोग ज्यादा टेंशन मत लेना।”</em></p>
<p style="text-align:justify;">छात्रा ने यह वीडियो अपनी दोस्त के फोन से रिकॉर्ड कर भेजा, क्योंकि इंटरनेट बंद होने के कारण वह सीधे अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रही थी। वीडियो में वह कहती है, <em>“अस्सलामुअलैकुम अम्मी-अब्बू,</em></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166052/i-am-fine-dont-take-tension-indian-student-studying-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/मैं-ठीक-हूं,-आप-टेंशन-मत-लेना…-ईरान-में-पढ़-रही-भारतीय-छात्रा-का-परिवार-को-संदेश.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों और इंटरनेट शटडाउन के बीच वहां पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर परिजनों की चिंता बढ़ गई है। इसी बीच ईरान में मेडिकल की पढ़ाई कर रही एक कश्मीरी छात्रा का वीडियो संदेश सामने आया है, जिसमें वह अपने परिवार को आश्वस्त करते हुए कहती है— <em>“मैं ठीक हूं, आप लोग ज्यादा टेंशन मत लेना।”</em></p>
<p style="text-align:justify;">छात्रा ने यह वीडियो अपनी दोस्त के फोन से रिकॉर्ड कर भेजा, क्योंकि इंटरनेट बंद होने के कारण वह सीधे अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रही थी। वीडियो में वह कहती है, <em>“अस्सलामुअलैकुम अम्मी-अब्बू, आप सभी कैसे हैं? मैं यहां ठीक हूं, अच्छे से खा-पी रही हूं और मेरे पास पैसे भी हैं। यहां प्रोटेस्ट होते हैं, लेकिन मैं हॉस्टल के अंदर ही रहती हूं।”</em></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिंसक प्रदर्शनों से बिगड़े हालात</strong><br />ईरान बीते दो हफ्तों से हिंसक प्रदर्शनों की चपेट में है। हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक 2,500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालात को देखते हुए भारत सरकार ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है। इंटरनेट सेवाएं बंद होने से वहां रह रहे भारतीय छात्रों और उनके परिवारों के बीच संपर्क लगभग टूट गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>परिजनों में चिंता, सरकार से अपील</strong><br />खासतौर पर जम्मू-कश्मीर के अभिभावकों में बेचैनी का माहौल है, क्योंकि बड़ी संख्या में छात्र ईरान में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। श्रीनगर में परिजनों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इंटरनेट बंद होने के कारण वे न तो बच्चों से बात कर पा रहे हैं और न ही उन्हें पैसे भेज पा रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से छात्रों की सुरक्षित वापसी की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/indain-student.png" alt="indain-student" width="441" height="645"></img></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>छात्र सुरक्षित, लेकिन संपर्क बड़ी चुनौती</strong><br />ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) और FAIMA डॉक्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन ने बताया कि इंटरनेट बंद होने के बावजूद कई छात्रों ने वैकल्पिक तरीकों से संपर्क किया है। कुछ छात्र सुरक्षा कारणों से इराक सीमा के पास चले गए थे और वहां से टेक्स्ट मैसेज के जरिए उन्होंने अपनी सुरक्षा की जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ईरान में करीब 3,000 भारतीय छात्र</strong><br />डॉ. मोमिन के अनुसार, इस समय ईरान में करीब 3,000 भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें से 2,000 से ज्यादा एमबीबीएस और बीडीएस जैसे मेडिकल कोर्स में हैं। इनमें लगभग 1,800 छात्र जम्मू-कश्मीर से हैं। उन्होंने कहा कि वह लगातार छात्रों के संपर्क में हैं और स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>भारतीय दूतावास की एडवाइजरी</strong><br />भारतीय दूतावास ने छात्रों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए उन्हें हॉस्टल में रहने, इंडोर गतिविधियों तक सीमित रहने और बिना जरूरत बाहर न निकलने की सलाह दी है। दूतावास ने कहा है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है और छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>24 जनवरी तक कक्षाएं और परीक्षाएं सस्पेंड</strong><br />मौजूदा हालात को देखते हुए ईरान में 24 जनवरी तक कक्षाएं और परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। हालांकि इंटरनेट बंद होने से पढ़ाई और परिवार से संपर्क दोनों ही प्रभावित हो रहे हैं। डॉ. मोमिन ने बताया कि अभिभावकों के लिए एक अलग व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया है, जिसमें करीब 1,800 माता-पिता जुड़े हैं, ताकि उन्हें सही जानकारी दी जा सके और अफवाहों से बचाया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान से सामने आया छात्रा का यह संदेश फिलहाल परिजनों के लिए राहत जरूर है, लेकिन हालात सामान्य होने और सुरक्षित वापसी को लेकर चिंता अभी भी बरकरार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 21:34:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दिल्ली दंगों के बड़े साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं, अन्य पांच आरोपियों को मिली राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली, </strong></p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने आज 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित 'बड़ी साजिश' मामले में बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने छात्र नेता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, जबकि मामले के अन्य पांच आरोपियों - गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद - को जमानत दे दी।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने यह फैसला सुनाया, जिसमें स्पष्ट कहा गया कि उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका अन्य आरोपियों से 'गुणात्मक रूप से अलग' है।<br />यह फैसला ऐसे समय में आया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165242/important-decision-of-supreme-court-in-the-big-conspiracy-case"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/supream-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली, </strong></p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने आज 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित 'बड़ी साजिश' मामले में बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने छात्र नेता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, जबकि मामले के अन्य पांच आरोपियों - गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद - को जमानत दे दी।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने यह फैसला सुनाया, जिसमें स्पष्ट कहा गया कि उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका अन्य आरोपियों से 'गुणात्मक रूप से अलग' है।<br />यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ये आरोपी पांच साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं, बिना ट्रायल शुरू हुए। कोर्ट ने UAPA(अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) की सख्त धाराओं का हवाला देते हुए कहा कि इस कानून के तहत जमानत के सामान्य प्रावधानों से अलग नियम लागू होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने जोर दिया कि UAPA की धारा 43D(5) के तहत अगर आरोप प्रथम दृष्टया सही लगते हैं, तो जमानत देना मुश्किल होता है। उमर खालिद के वकील ने तर्क दिया कि उनके क्लाइंट पर कोई ठोस सबूत नहीं, लेकिन कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया।<br />कोर्ट की सुनवाई का पूरा ब्योरा : सुप्रीम कोर्ट में LIVE अपडेट्स के अनुसार, सुबह 10:30 बजे सुनवाई शुरू हुई। उमर खालिद के वकील कपिल सिब्बल ने कहा, "चार साल से जेल में हैं, चार्जशीट दाखिल हो चुकी, ट्रायल शुरू हो।" शरजील इमाम के वकील ने CAA विरोधी प्रदर्शनों को शांतिपूर्ण बताया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के वकील सौरभ किरणपाल ने कहा, "ये साजिश के मास्टरमाइंड थे। जामिया के भाषणों से दंगे भड़के।"</p>
<p style="text-align:justify;"><br /><strong>जस्टिस खन्ना ने टिप्पणी की, "UAPA के तहत साजिश साबित हुई है। जमानत नहीं दी जा सकती।" अन्य पांचों की याचिकाओं पर कोर्ट ने कहा, "उनके खिलाफ सबूत कमजोर हैं। ट्रायल के दौरान पेश होंगे तो जमानत मिलेगी।"</strong></p>
<p style="text-align:justify;">प्रतिक्रियाएं और राजनीतिक बवाल : फैसले पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। उमर खालिद के समर्थकों ने JNU में विरोध प्रदर्शन किया। AAP नेता संजय सिंह ने कहा, "लोकतंत्र पर हमला।" BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट किया, "आतंकवादियों को सजा मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट सही।"<br />कांग्रेस ने कहा, "ट्रायल में देरी न्यायिक सिस्टम की विफलता।" AIMIM चीफ ओवैसी ने जमानत न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की। सोशल मीडिया पर #JusticeForDelhiRiots ट्रेंड कर रहा है। मानवाधिकार संगठन Amnesty India ने कहा, "UAPA का दुरुपयोग बंद हो।"<br />परिवार वालों की भावुक अपील: उमर की मां ने कहा, "बेटा निर्दोष है। चार साल हो गए।"</p>
<h4 style="text-align:justify;"><br /><strong>मामले की पृष्ठभूमि : </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक घायल हुए थे। इन दंगों को CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की हिंसा से जोड़ा जाता है। दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि यह हिंसा कोई सामान्य दंगा नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी, जिसका मकसद देश की संप्रभुता को चुनौती देना और आवश्यक सेवाओं को ठप करना था। पुलिस के अनुसार, उमर खालिद और शरजील इमाम इस साजिश के मुख्य सूत्रधार थे।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />उमर खालिद पर आरोप है कि वे दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप (DPSG) के माध्यम से हिंसा की योजना बनाने में शामिल थे और 'चक्का जाम' की विचारधारा के संस्थापक थे। शरजील इमाम पर भड़काऊ भाषण देने और दिल्ली को आवश्यक आपूर्तियों से काटने की योजना बनाने का आरोप है। पुलिस ने कोर्ट में उनके भाषणों के वीडियो और गवाहों के बयान पेश किए थे।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2025 को इन आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जिसमें कहा गया था कि आरोप गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया साजिश साबित होती है। इसके खिलाफ आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने तर्क दिया कि पांच साल से अधिक की हिरासत बिना ट्रायल के 'सजा से पहले सजा' जैसी है और यूएपीए के तहत भी भाषणों को आतंकी गतिविधि नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (उमर खालिद की ओर से) और अन्य ने कहा कि दंगों के समय उमर दिल्ली में नहीं थे और पुलिस के पास कोई ठोस सबूत नहीं है। शरजील इमाम के वकील ने तर्क दिया कि उनके भाषण सिर्फ विरोध थे, न कि आतंकवाद। वहीं, दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ा विरोध किया और कहा कि यह साजिश देश की एकता को खतरे में डालने वाली थी।<br />आगे क्या?<br />उमर खालिद और शरजील इमाम अब जेल में ही रहेंगे। उनके पास रिव्यू पिटिशन का विकल्प है, लेकिन सफलता की संभावना कम है। अन्य पांच आरोपी जल्द रिहा हो सकते हैं। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की लंबाई और UAPA की सख्ती पर बड़ा सवाल उठाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 12:04:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नेतन्याहू से मुलाकात के बाद जयशंकर का कड़ा संदेश, आतंकवाद पर भारत–इज़राइल एकजुट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk </strong></p>
<p>यरूशलम। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इज़राइल की आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में यहूदी समुदाय पर हुए आतंकी हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।</p>
<p>मुलाकात के बाद डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नेतन्याहू को शुभकामनाएं दीं। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने तकनीक, अर्थव्यवस्था, कौशल एवं प्रतिभा विकास, कनेक्टिविटी और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163519/jaishankars-strong-message-after-meeting-netanyahu-india-israel-united-on-terrorism"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/s.-jaishankar.webp" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk </strong></p>
<p>यरूशलम। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इज़राइल की आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में यहूदी समुदाय पर हुए आतंकी हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।</p>
<p>मुलाकात के बाद डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नेतन्याहू को शुभकामनाएं दीं। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने तकनीक, अर्थव्यवस्था, कौशल एवं प्रतिभा विकास, कनेक्टिविटी और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की। साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया गया।</p>
<p>विदेश मंत्री जयशंकर ने सिडनी हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भारत और इज़राइल आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करते। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में भारत इज़राइल के साथ खड़ा है। इस बयान को आतंकवाद के विरुद्ध दोनों देशों की साझा रणनीति और प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>इसी बीच, सिडनी हमले को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सख्त रुख अपनाया है। व्हाइट हाउस में यहूदी समुदाय के एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि दुनिया के सभी देशों को कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद को समर्थन देने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।</p>
<p>गौरतलब है कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुस्लिम देशों की यात्रा पर हैं, वहीं दूसरी ओर विदेश मंत्री जयशंकर की इज़राइल यात्रा भारत की संतुलित और सक्रिय कूटनीति को दर्शाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ भारत की स्पष्ट नीति और मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग को रेखांकित करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 17:40:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तिब्बती पहचान पर चीन की नज़र? प्राग घोषणापत्र में दलाई लामा के उत्तराधिकार में हस्तक्षेप का कड़ा विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[<h3><strong>International Desk</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">तिब्बती बौद्ध समुदाय की स्वतंत्रता और दलाई लामा के उत्तराधिकार पर चीन के कथित हस्तक्षेप के बढ़ते विवाद के बीच, प्राग में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता या विश्वास गठबंधन (IRFBA) के पांचवें वर्षगांठ सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण घोषणापत्र जारी किया गया। इस <strong>प्राग घोषणापत्र 2025</strong> में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तिब्बती बौद्धों को अपने आध्यात्मिक नेताओं को <strong>स्वतंत्र रूप से चुनने का प्राकृतिक और धार्मिक अधिकार</strong> है—और इस प्रक्रिया में किसी भी राजनीतिक दखल की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>दलाई लामा के 90 वर्ष—आध्यात्मिक परंपरा पर वैश्विक ध्यान</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">घोषणापत्र में उल्लेख किया गया कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162063/china-eyes-tibetan-identity-prague-declaration-strongly-opposes-interference-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/प्राग-घोषणापत्र-में-दलाई-लामा-के-उत्तराधिकार-में-हस्तक्षेप-का-कड़ा-विरोध.png" alt=""></a><br /><h3><strong>International Desk</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">तिब्बती बौद्ध समुदाय की स्वतंत्रता और दलाई लामा के उत्तराधिकार पर चीन के कथित हस्तक्षेप के बढ़ते विवाद के बीच, प्राग में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता या विश्वास गठबंधन (IRFBA) के पांचवें वर्षगांठ सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण घोषणापत्र जारी किया गया। इस <strong>प्राग घोषणापत्र 2025</strong> में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तिब्बती बौद्धों को अपने आध्यात्मिक नेताओं को <strong>स्वतंत्र रूप से चुनने का प्राकृतिक और धार्मिक अधिकार</strong> है—और इस प्रक्रिया में किसी भी राजनीतिक दखल की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>दलाई लामा के 90 वर्ष—आध्यात्मिक परंपरा पर वैश्विक ध्यान</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">घोषणापत्र में उल्लेख किया गया कि 14वें दलाई लामा इस वर्ष 90 वर्ष के हो गए हैं। ‘करुणा वर्ष’ पहल के तहत दुनिया भर में उनके जीवन और योगदान का सम्मान किया जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में, उनके उत्तराधिकार से जुड़ा मुद्दा और भी संवेदनशील हो गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>चीन के हस्तक्षेप के प्रयासों पर वैश्विक फटकार</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">फयुल की रिपोर्ट के अनुसार, सम्मेलन में जारी वक्तव्य को तिब्बती आध्यात्मिक नेतृत्व पर चीन की बढ़ती दखलअंदाज़ी के प्रति एक सीधा संदेश माना जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तिब्बती बौद्ध धर्म की पुनर्जन्म प्रणाली में सरकारी हस्तक्षेप धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों का उल्लंघन है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>पेनपा त्सेरिंग की चेतावनी: “चीन एक कठपुतली दलाई लामा चाहता है”</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">“तिब्बती बौद्ध धर्म के धार्मिक नेता के रूप में दलाई लामा को श्रद्धांजलि” विषयक सत्र को संबोधित करते हुए <strong>सेंट्रल तिब्बetan एडमिनिस्ट्रेशन (CTA)</strong> के अध्यक्ष पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि चीन पुनर्जन्म प्रक्रिया पर प्रभाव डालकर तिब्बती धार्मिक संरचना को नियंत्रित करना चाहता है।<br />उन्होंने कहा—</p>
<blockquote>
<p>“चीन की मंशा स्पष्ट है—वे तिब्बती लोगों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए एक कठपुतली दलाई लामा नियुक्त करना चाहते हैं।”</p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;">त्सेरिंग ने <strong>अमेरिका के 2002 तिब्बत नीति अधिनियम</strong> का भी उल्लेख किया, जो चीन पर दलाई लामा के साथ संवाद फिर से शुरू करने का दबाव बनाता है और तिब्बत में वास्तविक स्वायत्तता सुनिश्चित करने पर ज़ोर देता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सात लोकतांत्रिक देशों ने जताया समर्थन</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी बताया कि 6 जुलाई को सात लोकतांत्रिक देशों ने संयुक्त रूप से तिब्बती समुदाय के अपने अगले आध्यात्मिक नेता को चुनने के अधिकार का समर्थन किया था। त्सेरिंग ने IRFBA से अपील की कि वह चीन की दखलअंदाज़ी के विरुद्ध एक <strong>वैश्विक सहमति</strong> को मजबूत करने के लिए एक सशक्त बयान जारी करे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>उच्च-स्तरीय उपस्थिति और वैश्विक संदेश</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">प्राग कैसल में आयोजित इस सम्मेलन में चेक गणराज्य के राष्ट्रपति <strong>पेट्र पावेल</strong>, संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत <strong>नाज़िला घनेया</strong>, और मानवाधिकार अधिवक्ता <strong>मुबारक बाला</strong> जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल रहीं।<br />CTA प्रतिनिधि <strong>थिनले चुक्की</strong> ने प्राग घोषणापत्र का स्वागत करते हुए कहा— “यह हमारी आध्यात्मिक परंपराओं की महत्वपूर्ण पुष्टि है और राज्य के हस्तक्षेप की स्पष्ट अस्वीकृति।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 18:35:50 +0530</pubDate>
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