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                <title>देश - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>देश RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कोचिंग सेंटर फायरिंग मामले में खान सर की बढ़ीं मुश्किलें</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>पटना।</strong> बिहार के चर्चित शिक्षक और यूट्यूबर <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">(खान सर)</span></span></strong> एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पटना के कदमकुआं क्षेत्र स्थित कोचिंग संस्थान से जुड़े फायरिंग मामले में दर्ज एफआईआर के बाद कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। ताजा घटनाक्रम में खान सर ने फिलहाल अदालत में आत्मसमर्पण नहीं करने का फैसला लिया है और 8 जून को अग्रिम जमानत (एंटिसिपेटरी बेल) के लिए याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">खान सर के अधिवक्ता अरविंद कुमार महुआर ने बताया कि उनके मुवक्किल फिलहाल पटना सिविल कोर्ट में सरेंडर नहीं करेंगे। मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत अग्रिम जमानत की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180775/khan-sirs-problems-increased-in-coaching-center-firing-case"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/ljv6icj8_khan-sir_625x300_02_june_26.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पटना।</strong> बिहार के चर्चित शिक्षक और यूट्यूबर <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">(खान सर)</span></span></strong> एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पटना के कदमकुआं क्षेत्र स्थित कोचिंग संस्थान से जुड़े फायरिंग मामले में दर्ज एफआईआर के बाद कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। ताजा घटनाक्रम में खान सर ने फिलहाल अदालत में आत्मसमर्पण नहीं करने का फैसला लिया है और 8 जून को अग्रिम जमानत (एंटिसिपेटरी बेल) के लिए याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">खान सर के अधिवक्ता अरविंद कुमार महुआर ने बताया कि उनके मुवक्किल फिलहाल पटना सिविल कोर्ट में सरेंडर नहीं करेंगे। मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत अग्रिम जमानत की अर्जी दायर की जाएगी। अदालत के निर्णय के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व पटना के मुसल्लहपुर हाट स्थित कोचिंग संस्थान के बाहर फायरिंग की घटना हुई थी, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए थे। घटना के बाद बड़ी संख्या में छात्र संस्थान के बाहर एकत्र हो गए थे और पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकरण में पुलिस ने खान सर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं और संबंधित पक्षों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, खान सर के समर्थकों का कहना है कि उन्हें साजिश के तहत विवाद में घसीटा जा रहा है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। मामले ने शिक्षा जगत और छात्र समुदाय में व्यापक चर्चा पैदा कर दी है। अब सबकी निगाहें 8 जून को दाखिल होने वाली अग्रिम जमानत याचिका और अदालत के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत के आदेश के बाद मामले की दिशा काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 19:45:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एनएच-347 बी के उन्नयन को कैबिनेट की मंजूरी, मध्य प्रदेश को बड़ी सौगात</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-347बी के हिवरखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रूधी और देशगांव-जुलवानिया खंड के उन्नयन एवं चौड़ीकरण परियोजना को मंजूरी दे दी है। 233.653 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर 4,415.60 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) पर विकसित किया जाएगा।</p>
<p>परियोजना के तहत हिवरखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रूधी खंड के 125.01 किलोमीटर लंबे मौजूदा इंटरमीडिएट लेन मार्ग को पक्के कंधों सहित दो लेन में उन्नत किया जाएगा। वहीं देशगांव-जुलवानिया खंड के 108.643 किलोमीटर लंबे मौजूदा दो लेन मार्ग को चार लेन में विस्तारित किया जाएगा।</p>
<p>सरकार के अनुसार, यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180585/cabinet-approval-for-upgradation-of-nh-347b-is-a-big-gift"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/pm-modi-good-img.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-347बी के हिवरखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रूधी और देशगांव-जुलवानिया खंड के उन्नयन एवं चौड़ीकरण परियोजना को मंजूरी दे दी है। 233.653 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर 4,415.60 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) पर विकसित किया जाएगा।</p>
<p>परियोजना के तहत हिवरखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रूधी खंड के 125.01 किलोमीटर लंबे मौजूदा इंटरमीडिएट लेन मार्ग को पक्के कंधों सहित दो लेन में उन्नत किया जाएगा। वहीं देशगांव-जुलवानिया खंड के 108.643 किलोमीटर लंबे मौजूदा दो लेन मार्ग को चार लेन में विस्तारित किया जाएगा।</p>
<p>सरकार के अनुसार, यह परियोजना बैतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी जिलों में सड़क की ज्यामितीय कमियों, तीखे मोड़ों और आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात जाम की समस्या का समाधान करेगी। परियोजना के तहत खरगोन जिले में 16.20 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड बाईपास भी विकसित किया जाएगा।</p>
<p>सड़क उन्नयन के बाद इस मार्ग पर वाहनों की औसत गति बढ़ेगी, यात्रा समय कम होगा और सड़क सुरक्षा में सुधार आएगा। इसके साथ ही ईंधन की खपत और वाहन संचालन लागत में कमी आएगी, जिससे क्षेत्रीय संपर्क और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>यह परियोजना मध्य प्रदेश के महत्वपूर्ण आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक केंद्रों को बेहतर संपर्क प्रदान करेगी। उन्नत कॉरिडोर प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत छह आर्थिक केंद्रों, पांच सामाजिक केंद्रों और पांच लॉजिस्टिक केंद्रों से जुड़ेगा।</p>
<p>इनमें एक वस्त्र क्लस्टर, दो मेगा फूड पार्क, एक औद्योगिक पार्क, दो सुपर थर्मल पावर प्लांट, दो आकांक्षी जिले — खंडवा और बड़वानी, तथा तीन जनजातीय जिले — बैतूल, खंडवा और खरगोन शामिल हैं।</p>
<p>परियोजना इंदौर और नागपुर हवाई अड्डों, बैतूल और खंडवा रेलवे स्टेशनों तथा इंदौर मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क (एमएमएलपी) को भी बेहतर संपर्क प्रदान करेगी। यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग-47, राष्ट्रीय राजमार्ग-753, राष्ट्रीय राजमार्ग-347बीजी और राष्ट्रीय राजमार्ग-52 के साथ-साथ राज्य राजमार्ग-15 और अन्य प्रमुख जिला मार्गों से जुड़ेगा।</p>
<p>इस कॉरिडोर से बैतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी जैसे प्रमुख शहरों और कस्बों को लाभ मिलेगा तथा माल और यात्रियों की आवाजाही तेज होने से व्यापार, उद्योग और कृषि गतिविधियों को नई गति मिलेगी।</p>
<p>सरकार के अनुसार, परियोजना से लगभग 19.50 लाख मानव-दिवस प्रत्यक्ष और 23 लाख मानव-दिवस अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होने का अनुमान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 19:05:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट में पांच नए जज: सीजेआई सूर्यकांत ने दिलाई शपथ, पहली बार न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हुई।</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>दयाशंकर त्रिपाठी</strong></span>  </p>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने आज पांच नए जजों को शपथ दिलाई। इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई। अब कोर्ट में स्वीकृत 38 पदों में से केवल एक पद खाली रह गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">नए जजों में वरिष्ठ वकील वेंकिता सुब्रमणि मोहना, बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा और जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180559/five-new-judges-in-the-supreme-court-were-sworn-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260603-wa0202.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>दयाशंकर त्रिपाठी</strong></span> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने आज पांच नए जजों को शपथ दिलाई। इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई। अब कोर्ट में स्वीकृत 38 पदों में से केवल एक पद खाली रह गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">नए जजों में वरिष्ठ वकील वेंकिता सुब्रमणि मोहना, बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा और जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 27 मई को इन नामों की सिफारिश की थी, जिसे सरकार ने महज चार दिनों में हरी झंडी दे दी।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले महीने सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी थी। इसमें मुख्य न्यायाधीश का पद भी शामिल है। संख्या बढ़ने और पहले से खाली पदों को मिलाकर कुल छह पद खाली थे। पांच नई नियुक्तियों के बाद अब केवल एक पद रिक्त है। हालांकि, जून के महीने में दो जज रिटायर होने वाले हैं। जस्टिस पंकज मिथल 16 जून को और जस्टिस जे के माहेश्वरी 28 जून को रिटायर होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">वरिष्ठ वकील वेंकिता सुब्रमणि मोहना की नियुक्ति काफी महत्वपूर्ण है। वे जस्टिस इंदु मल्होत्रा (2018) के बाद देश की दूसरी ऐसी महिला वकील हैं, जिन्हें सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया है। 59 वर्षीय मोहना ने 1988 में कोयंबटूर लॉ कॉलेज से पढ़ाई पूरी की थी। साल 2015 में उन्हें वरिष्ठ वकील का दर्जा मिला था। अब सुप्रीम कोर्ट में दो महिला जज हो गई हैं- जस्टिस मोहना और जस्टिस बी वी नागरत्ना। जस्टिस नागरत्ना साल 2027 में एक महीने से अधिक समय के लिए भारत की मुख्य न्यायाधीश भी बनेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 15:22:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दया शंकर त्रिपाठी ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'भगवान मंत्रियों का इंतजार नहीं करते, सब बराबर हैं'</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत में लगभग हर छोटे-बड़े प्रसिद्ध मंदिर में वीआईपी दर्शन के लिए एक अलग लाइन या विशेष पास की व्यवस्था होती है। कुछ तय रकम या टिकट के पैसे देने के बाद कोई भी व्यक्ति घंटों लंबी लाइनों से बचकर सीधे भगवान के गर्भगृह तक दर्शन के लिए पहुंच जाता है। हालांकि, पैसे और रसूख के दम पर मिलने वाली इस विशेष सुविधा पर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला अब मद्रास हाई कोर्ट की चौखट पर पहुंचा है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मंदिरों में पैसे और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180385/god-does-not-wait-for-ministers-all-are-equal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/vmyzo_hj.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत में लगभग हर छोटे-बड़े प्रसिद्ध मंदिर में वीआईपी दर्शन के लिए एक अलग लाइन या विशेष पास की व्यवस्था होती है। कुछ तय रकम या टिकट के पैसे देने के बाद कोई भी व्यक्ति घंटों लंबी लाइनों से बचकर सीधे भगवान के गर्भगृह तक दर्शन के लिए पहुंच जाता है। हालांकि, पैसे और रसूख के दम पर मिलने वाली इस विशेष सुविधा पर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला अब मद्रास हाई कोर्ट की चौखट पर पहुंचा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मंदिरों में पैसे और वीआईपी दर्जे के आधार पर दी जाने वाली इस विशेष सुविधा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अदालत ने दोटूक शब्दों में कहा कि भगवान के दरबार में कोई मंत्री हो या आम आदमी, उनमें कोई भेद नहीं हो सकता। ईश्वर के सामने सभी इंसान बराबर हैं, ऐसे में मंदिरों के भीतर वीआईपी दर्शन की इस कुप्रथा का कोई औचित्य नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">‘लाइव लॉ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी आर स्वामीनाथन और जस्टिस लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ (बेंच) ने इस मामले की सुनवाई के दौरान बेहद तीखे सवाल उठाए। अदालत ने मंदिरों में वीआईपी दर्शन की प्रथा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या भगवान के सामने किसी रसूखदार मंत्री और एक आम नागरिक में कोई फर्क है? कोर्ट ने कड़े लहजे में कहा कि दर्शन के लिए कोई भी प्रशासनिक प्रक्रिया तय की जाए, लेकिन उससे मंदिर की कतारों में खड़े आम श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी या मानसिक ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जस्टिस जी आर स्वामीनाथन की बेंच ने वीआईपी संस्कृति पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, “मंत्रियों और विधायकों को अपने मन से यह गलतफहमी निकाल देनी चाहिए कि मंदिर में भगवान उनका इंतजार कर रहे हैं, और वे अपने रसूख के दम पर किसी भी समय मंदिर में सीधे प्रवेश कर सकते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। आखिर हमें इस वीआईपी दर्शन की क्या आवश्यकता है? जब ईश्वर के समक्ष सभी लोग पूरी तरह समान हैं, तो फिर वहां क्या मंत्री और क्या आम जनता।”।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट के इन कड़े और तीखे सवालों पर सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पी वी बालासुब्रमण्यम ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने वीआईपी दर्शन की पैरवी करते हुए दलील दी कि इस तरह की प्रथा का पालन करने से एक तरफ जहां विशिष्ट लोगों के कारण लगने वाली लंबी-लंबी कतारों से मुक्ति मिलती है, वहीं दूसरी तरफ वीआईपी टिकटों से मंदिरों को भी काफी बड़ी आय (राजस्व) प्राप्त होती है। अपनी इस दलील के साथ ही उन्होंने इस विषय पर सरकार का विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से कुछ समय की मांग की। हाई कोर्ट ने सरकार के इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए उन्हें पूरा जवाब पेश करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल, यह पूरा कानूनी विवाद हाल ही में विजय सरकार में मंत्री बने आर निर्मल कुमार के एक मंदिर दौरे को लेकर शुरू हुआ है। मंत्री निर्मल कुमार पर बेहद गंभीर आरोप लगे थे कि जब वे दर्शन के लिए पहुंचे, तो उनके रसूख के कारण तिरुपरनकुंड्रम स्थित ऐतिहासिक सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के कपाट आम जनता के लिए पूरी तरह बंद करवा दिए गए थे। इसके बाद जब मंत्री महोदय ने आराम से दर्शन कर लिए, तब कहीं जाकर आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर को दोबारा खोला गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, विपक्ष द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों को विजय सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। मद्रास हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका विश्व हिंदू परिषद (VHP) की तमिलनाडु इकाई के वरिष्ठ नेता पी. चोकलिंगम द्वारा दायर की गई है। उन्होंने कोर्ट में दावा किया कि मंत्री निर्मल कुमार की तरह ही आए दिन कई बड़े नेता, मंत्री और विधायक मंदिरों में वीआईपी दर्शन के लिए प्रोटोकॉल का धौंस जमाते हैं, जिसकी वजह से दूर-दूर से आए आम भक्तों को घंटों धूप और कतारों में खड़े रहकर भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि सनातन धर्म किसी भी व्यक्ति के साथ धन, सामाजिक स्थिति, पद या जाति के आधार पर भेदभाव की अनुमति कतई नहीं देता है, इसलिए मंदिर के भीतर सभी भक्तों के साथ पूरी तरह समान व्यवहार किया जाना चाहिए। हालांकि, याचिकाकर्ता चोकलिंगम ने अपनी गुहार में व्यावहारिक आधार पर कुछ विशेष छूट की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, गर्भवती महिलाओं, नवविवाहित जोड़ों, मंदिर में अपनी कला की प्रस्तुति देने वाले स्थानीय कलाकारों, इसके अलावा देश के राष्ट्राध्यक्षों और संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों (जैसे राष्ट्रपति, राज्यपाल या मुख्य न्यायाधीश) को इस नियम से अलग रखकर कुछ विशेष रियायतें जरूर दी जानी चाहिए, लेकिन इसका फायदा राजनीतिक लाभ के लिए नहीं उठाया जाना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 19:03:31 +0530</pubDate>
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                <title>दावे विश्वगुरु के लेकिन देश में एक परीक्षा भी नहीं करवा सकते',  राहुल का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को नीट पेपर लीक विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए बड़ा हमला बोला। राहुल गांधी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखते हुए कहा कि नीट, सीबीएसई,एसएससी और आज CUET, चार परीक्षाएं और एक करोड़ बच्चे। एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई। जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं - वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर देश की शिक्षा व्यवस्था को ‘‘पूरी तरह से बर्बाद’’ करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180381/claims-of-vishwaguru-but-cannot-even-conduct-an-examination-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images12.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को नीट पेपर लीक विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए बड़ा हमला बोला। राहुल गांधी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखते हुए कहा कि नीट, सीबीएसई,एसएससी और आज CUET, चार परीक्षाएं और एक करोड़ बच्चे। एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई। जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं - वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर देश की शिक्षा व्यवस्था को ‘‘पूरी तरह से बर्बाद’’ करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार एक ओर भारत के ‘विश्वगुरु’ होने का दावा करती है जबकि दूसरी ओर वह एक भी परीक्षा निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से आयोजित नहीं कर पा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने कहा कि भारत भर में स्नातक डिग्री कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली सामान्य विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा-स्नातक (सीयूईटी-यूजी) 2026 की परीक्षा में तकनीकी खराबी के कारण शनिवार को कुछ केंद्रों पर देरी हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘नीट, सीबीएसई, एसएससी और आज सीयूईटी। चार परीक्षाएं। एक करोड़ बच्चे। एक भी (परीक्षा) ईमानदारी से नहीं हो पाई।’’गांधी ने कहा, ‘‘दावे विश्वगुरु के, लेकिन देश में एक परीक्षा नहीं करवा सकते - मोदी जी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था तबाह कर दी है।’’ कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं - वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।’’ राहुल गांधी ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत रूप से नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक की निगरानी भी की थी। बता दें कि राहुल गांधी पिछले कुछ दिनों से लगातार नीट पेपर लीक और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर सरकार को घेरते नजर आ रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा था कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की विफलता पर मोदी की चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई न करना यह दर्शाता है कि उन्हें केवल अपनी सरकार के अस्तित्व की चिंता है, न कि लाखों छात्रों के भविष्य की। कांग्रेस नेता ने उन छात्रों के साथ अपनी पिछली बातचीत का एक वीडियो भी साझा किया, जिन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) परीक्षा दी थी और पेपर लीक के मद्देनजर परीक्षा प्रणाली को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:55:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सामान्य विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा में तकनीकी खामी, कई केंद्रों पर परीक्षा शुरू होने में हुई देरी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली, </strong> राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने आज सूचित किया है कि साझा विश्वविद्यालय स्नातक प्रवेश परीक्षा 2026 के दौरान कुछ परीक्षा केंद्रों पर बड़ी तकनीकी गड़बड़ी हो गई। इससे परीक्षा शुरू करने में देरी हुई। एजेंसी के अनुसार, परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रही कंपनी ने बताया कि उनके स्तर पर हुई तकनीकी समस्या के कारण 30 मई 2026 को कुछ केंद्रों पर परीक्षा समय पर शुरू नहीं हो सकी। अब समस्या का समाधान कर लिया गया है और सभी प्रभावित विद्यार्थियों को पूरा अतिरिक्त समय दिया जा रहा है ताकि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>दोपहर</strong></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180353/technical-glitch-in-common-university-entrance-examination-delay-in-commencement"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/neet-ug-2026-exam-2-780x470.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली, </strong> राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने आज सूचित किया है कि साझा विश्वविद्यालय स्नातक प्रवेश परीक्षा 2026 के दौरान कुछ परीक्षा केंद्रों पर बड़ी तकनीकी गड़बड़ी हो गई। इससे परीक्षा शुरू करने में देरी हुई। एजेंसी के अनुसार, परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रही कंपनी ने बताया कि उनके स्तर पर हुई तकनीकी समस्या के कारण 30 मई 2026 को कुछ केंद्रों पर परीक्षा समय पर शुरू नहीं हो सकी। अब समस्या का समाधान कर लिया गया है और सभी प्रभावित विद्यार्थियों को पूरा अतिरिक्त समय दिया जा रहा है ताकि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>दोपहर सत्र का संशोधित समय</strong></div><div style="text-align:justify;">एजेंसी ने दोपहर के सत्र के लिए समय में बदलाव किया है। अब अभ्यर्थियों को इस प्रकार निर्देश दिए गए हैं:</div><div style="text-align:justify;">रिपोर्टिंग और प्रवेश दोपहर ढाई बजे से शुरू होगा। परीक्षा दोपहर चार बजे से शुरू होगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सुबह की पारी में परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को पूरे निर्धारित समय तक परीक्षा पूरी करने की छूट दी गई है। वे परीक्षा समाप्त होने के बाद ही केंद्र से बाहर निकल सकेंगे। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने छात्रों और उनके अभिभावकों को हुई परेशानी पर खेद जताया है। एजेंसी ने कहा कि वह सभी विद्यार्थियों के हितों की पूरी रक्षा करेगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे समय-समय पर आधिकारिक वेबसाइट पर नवीनतम जानकारी देखते रहें। हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है जहां से सहायता ली जा सकती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह घटना परीक्षा के पहले दिन हुई है जिससे देशभर के हजारों छात्रों को असुविधा का सामना करना पड़ा। एजेंसी का कहना है कि सभी केंद्रों पर परीक्षा सुचारू रूप से चल रही है और किसी भी विद्यार्थी के भविष्य पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:46:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जल्दी शुरू हो सकते हैं प्लास्टिक के नोट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>संवाददाता सचिन बाजपेई </strong></p>
<div>
<div><strong>नई दिल्ली,</strong> रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) जल्द ही प्लास्टिक (पॉलीमर) के नोट जारी करने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकता है। कागजी नोटों की बढ़ती मांग, मुद्रण लागत में तेज वृद्धि और जल्द खराब होने वाली करेंसी को ध्यान में रखते हुए आरबीआई एक दशक पुरानी योजना को पुनर्जीवित कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही 10 और 20 जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है।</div>
<div>  </div>
<div><strong>आरबीआई की योजना और पृष्ठभूमि</strong></div>
<div>आरबीआई के पिछले दो बोर्ड मीटिंग्स (पटना और मुंबई) में इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180346/plastic-notes-may-be-introduced-soon"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/plastic-notes.webp" alt=""></a><br /><p><strong>संवाददाता सचिन बाजपेई </strong></p>
<div>
<div><strong>नई दिल्ली,</strong> रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) जल्द ही प्लास्टिक (पॉलीमर) के नोट जारी करने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकता है। कागजी नोटों की बढ़ती मांग, मुद्रण लागत में तेज वृद्धि और जल्द खराब होने वाली करेंसी को ध्यान में रखते हुए आरबीआई एक दशक पुरानी योजना को पुनर्जीवित कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही 10 और 20 जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है।</div>
<div> </div>
<div><strong>आरबीआई की योजना और पृष्ठभूमि</strong></div>
<div>आरबीआई के पिछले दो बोर्ड मीटिंग्स (पटना और मुंबई) में इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई है। प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरबीआई एक पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा करने वाला है, जिसमें पॉलीमर नोटों को आम जनता के बीच परीक्षण के लिए जारी किया जाएगा। यह योजना 2012 में शुरू की गई थी, जब पांच शहरों में 10 के पॉलीमर नोटों का पायलट चलाया गया था। लेकिन उस समय एटीएम मशीनें इन मोटे नोटों को हैंडल नहीं कर पाती थीं, जिसके कारण योजना रोक दी गई। अब तकनीकी प्रगति के साथ यह समस्या हल हो चुकी है।</div>
<div> </div>
<div><strong>क्यों ला रहा है आरबीआई प्लास्टिक नोट?</strong></div>
<div>-बढ़ती करेंसी डिमांड: डिजिटल पेमेंट्स के बावजूद भौतिक करेंसी की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में करेंसी इन सर्कुलेशन 42.86 ट्रिलियन के करीब पहुंच गई है, जो पिछले साल की तुलना में 11.5% अधिक है।</div>
<div>-मुद्रण लागत का बोझ:वित्त वर्ष 2024-25 में नोट छापने पर 6,373 करोड़ खर्च हुए। कागजी नोट जल्दी गंदे और फट जाते हैं, जिससे हर साल अरबों नोट वापस लिए जाते हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>टिकाऊपन: </strong>पॉलीमर नोट कागजी नोटों की तुलना में 3-4 गुना अधिक टिकाऊ होते हैं। ये पानी, गंदगी और फटने से ज्यादा सुरक्षित रहते हैं।</div>
<div><strong>जालसाजी रोकथाम:</strong> पॉलीमर नोटों में बेहतर सिक्योरिटी फीचर्स लगाए जा सकते हैं, जिससे नकली नोटों को बनाना और मुश्किल हो जाएगा।</div>
<div>पॉलीमर नोट क्या हैं?</div>
<div>पॉलीमर नोट प्लास्टिक जैव-आधारित पॉलीप्रोपाइलीन या समान सामग्री से बने होते हैं। दुनिया भर में 60 से ज्यादा देश (ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन आदि) पहले से इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। ये नोट लंबे समय तक चलते हैं, जिससे लंबे समय में सरकार और आरबीआई को लागत बचत होती है।</div>
<div> </div>
<div><strong>चरणबद्ध रणनीति</strong></div>
<div>आरबीआई तुरंत सभी नोटों को प्लास्टिक में बदलने की योजना नहीं बना रहा है। पहले चरण में छोटे मूल्यवर्ग (₹10 और ₹20) के नोटों का पायलट लॉन्च होगा। पायलट की सफलता के बाद ही बड़े नोटों पर विचार किया जाएगा। एटीएम और मुद्रण प्रक्रिया को भी अपडेट किया जाएगा।</div>
<div> </div>
<div><strong>विशेषज्ञों की राय</strong></div>
<div>विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि, शुरुआती चरण में जनता को नई नोटों की आदत डालने और सप्लाई चेन में बदलाव की चुनौतियां भी होंगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में यह पहल करेंसी मैनेजमेंट को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।अभी देखना बाकी है कि पायलट प्रोजेक्ट कब शुरू होता है और आम लोगों की प्रतिक्रिया क्या होती है। अगर सब ठीक रहा तो आने वाले समय में आपके बटुए में प्लास्टिक के नोट भी दिख सकते हैं।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180346/plastic-notes-may-be-introduced-soon</link>
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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:38:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'यूपीएससी में कभी नहीं हुआ पेपर लीक, एनटीए को सीखने की जरूरत' : सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">नीट-यूजी  2026 परीक्षा रद्द किए जाने और पेपर लीक विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि जब तक स्पष्ट और व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं की जाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आती रहेंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ एनटीए को भंग करने और उसकी संरचना में व्यापक बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि एनटीए को उन संस्थाओं से सीखने की जरूरत है जो बड़े</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180331/there-was-never-any-paper-leak-in-upsc-nta-needs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/supream-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">नीट-यूजी  2026 परीक्षा रद्द किए जाने और पेपर लीक विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि जब तक स्पष्ट और व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं की जाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आती रहेंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ एनटीए को भंग करने और उसकी संरचना में व्यापक बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि एनटीए को उन संस्थाओं से सीखने की जरूरत है जो बड़े पैमाने पर परीक्षाएं बिना किसी पेपर लीक के सफलतापूर्वक आयोजित करती हैं।जस्टिस नरसिम्हा ने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">यूपीएससी की परीक्षाओं में कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी। एनटीए को उससे सीखने की जरूरत है।”</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आगे कहा कि वास्तविक समाधान तभी संभव है जब यह स्पष्ट हो कि किसी विफलता की जिम्मेदारी किस व्यक्ति पर है। केवल संस्थागत जिम्मेदारी तय करना पर्याप्त नहीं होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर बताए कि एनटीए में “संस्थागत निरंतरता” विकसित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि भविष्य में एजेंसी के पास परीक्षाएं निष्पक्ष और सुरक्षित ढंग से आयोजित करने की क्षमता और विशेषज्ञता उपलब्ध रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान 2024 में गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष और पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन भी अदालत में उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि समिति ने 35 दीर्घकालिक और लगभग 60 अल्पकालिक सिफारिशें दी थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें से अधिकांश को लागू किया जा चुका है। हालांकि अदालत ने पूछा कि यदि सुधार लागू किए गए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो फिर इस वर्ष पेपर लीक जैसी स्थिति कैसे उत्पन्न हुई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष के विवाद के बाद परीक्षा प्रक्रिया की पूरी श्रृंखला की समीक्षा की गई और नई कमजोरियों की पहचान कर सुधारात्मक उपाय तैयार किए गए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने लाखों छात्रों पर पड़े प्रभाव का भी उल्लेख किया। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि परीक्षा की तैयारी में वर्षों का समय और भावनाएं लगाने वाले छात्रों के लिए ऐसी घटनाएं बेहद पीड़ादायक और आघातकारी होती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि एनटीए को विश्वविद्यालयों और विशेषज्ञ संस्थानों के साथ स्थायी सहयोग विकसित करना चाहिए ताकि परीक्षा प्रणाली को लगातार बेहतर बनाया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गौरतलब है कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इसके बाद कई डॉक्टर संगठनों और छात्र समूहों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए एनटीए को भंग करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी जगह एक वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण गठित करने और भविष्य की परीक्षाओं की न्यायिक निगरानी की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे पर विचार किया जाएगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:19:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-family:Mangal, serif;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong></span><span lang="hi" xml:lang="hi">चर्चित दो पासपोर्ट मामले में सपा नेता अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत मिली है। एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को उनकी अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सात साल की सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने इस मामले में उनकी जमानत भी मंजूर कर ली है। फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज कराया गया था। शहर विधायक आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम ने दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाए थे। मामले की जांच के बाद पुलिस ने</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180327/big-relief-to-abdullah-azam-in-two-passport-cases"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/ab_1576478568.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-family:Mangal, serif;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong></span><span lang="hi" xml:lang="hi">चर्चित दो पासपोर्ट मामले में सपा नेता अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत मिली है। एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को उनकी अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सात साल की सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने इस मामले में उनकी जमानत भी मंजूर कर ली है। फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज कराया गया था। शहर विधायक आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम ने दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाए थे। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में चली थी। कोर्ट ने पांच दिसंबर 2025 को फैसला सुनाते हुए अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें सात साल की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ बचाव पक्ष की ओर से एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में क्रिमिनल अपील दाखिल की गई थी। वहीं अभियोजन पक्ष ने भी सजा बढ़ाने की मांग करते हुए अपील दायर की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शुक्रवार को एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट के न्यायाधीश विजय कुमार ने फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी और अब्दुल्ला आजम को इस मामले में बरी कर दिया। अदालत ने उनकी जमानत भी मंजूर कर ली।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब्दुल्ला के अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने बताया कि निचली अदालत ने सात साल की सजा का आदेश पारित किया था। इसके खिलाफ विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। अब कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा कि हर मामला अपने अलग तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय होता है। न्यायालय पर पूरा भरोसा है और आगे भी न्याय मिलने की उम्मीद है। इस दाैरान अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही। उधर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दो पैन कार्ड में सात साल की सजा के चलते जेल में होने के कारण वह बाहर नहीं आ सकते।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:17:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनपद में जनगणना 2027 का कार्य पकड़ रहा गत, गांव गांव पहुंच रहे जनगणना कर्मी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर।</strong></p><p style="text-align:justify;">भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार जनपद अम्बेडकर नगर में जनगणना 2027 से संबंधित प्रारंभिक गतिविधियों का संचालन व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। जनपद में निर्धारित कुल 4429 गणना ब्लाकों में जनगणना का कार्य किया जाना है।</p><p style="text-align:justify;">प्रमुख जनगणना अधिकारी/जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने नागरिकों से विशेष अनुरोध करते हुए कहा कि वे अपने मकान सूचीकरण (HLO) कार्य को पूर्ण कराने हेतु अपनी स्व-गणना आईडी (SE ID) प्रगणकों के साथ साझा करें, जिससे गणना कार्य अधिक सरल, सटीक एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सके। उन्होंने जनपदवासियों से अपील करते हुए कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180024/census-workers-are-reaching-every-village-taking-up-the-work"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260524-wa1034.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर।</strong></p><p style="text-align:justify;">भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार जनपद अम्बेडकर नगर में जनगणना 2027 से संबंधित प्रारंभिक गतिविधियों का संचालन व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। जनपद में निर्धारित कुल 4429 गणना ब्लाकों में जनगणना का कार्य किया जाना है।</p><p style="text-align:justify;">प्रमुख जनगणना अधिकारी/जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने नागरिकों से विशेष अनुरोध करते हुए कहा कि वे अपने मकान सूचीकरण (HLO) कार्य को पूर्ण कराने हेतु अपनी स्व-गणना आईडी (SE ID) प्रगणकों के साथ साझा करें, जिससे गणना कार्य अधिक सरल, सटीक एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सके। उन्होंने जनपदवासियों से अपील करते हुए कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारभूत प्रक्रिया है। जनगणना से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पेयजल, सड़क, सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा तैयार की जाती है। उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान नागरिकों द्वारा उपलब्ध कराई गई सभी सूचनाएं पूर्णतः गोपनीय रखी जाती हैं तथा उनका उपयोग केवल सांख्यिकीय एवं शासकीय नियोजन उद्देश्यों के लिए किया जाता है। इसलिए आमजन बिना किसी संकोच के प्रगणकों को सही एवं पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/img-20260524-wa1030.jpg" alt="IMG-20260524-WA1030" width="1200" height="800"></img></p><p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि “हम सबकी सहभागिता, विकसित भारत की आधारशिला” के संकल्प को साकार करने हेतु प्रत्येक नागरिक की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। सही एवं विश्वसनीय आंकड़े ही योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p><p style="text-align:justify;">उक्त जानकारी देते हुए जिला जनगणना अधिकारी/अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ज्योत्स्ना बंधु ने समस्त नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना 2027 के कार्य में सक्रिय सहयोग प्रदान करें तथा प्रगणकों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराकर इसे सफल बनाने में सहभागी बनें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180024/census-workers-are-reaching-every-village-taking-up-the-work</link>
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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 20:42:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ambedkarnagar Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांग्लादेश डिपोर्ट किए गए कुछ लोगों को वापस भारत लाया जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179984/some-people-deported-to-bangladesh-will-be-brought-back-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260523-wa0013-960x640.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की सदस्यता वाली पीठ से कहा कि सरकार उन्हें वापस लाएगी और उसके बाद उनकी स्थिति की जांच करेगी। परिणाम के आधार पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम तदनुसार कदम उठाएंगे। शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा कि इन व्यक्तियों को भारत वापस लाने में 8-10 दिन लग सकते हैं। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख जुलाई में तय की है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उच्चतम न्यायालय केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय के 26 सितंबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उच्च न्यायालय ने सुनाली खातून और अन्य को बांग्लादेश निर्वासित करने के केंद्र सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था और इसे ‘अवैध’ करार दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले साल तीन दिसंबर को शीर्ष अदालत ने ‘मानवीय आधार’ पर खातून और उनके आठ वर्षीय बच्चे को बांग्लादेश भेजे जाने के महीनों बाद भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी।अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को बच्चे की देखभाल करने का निर्देश दिया था और बीरभूम जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को गर्भवती खातून को मुफ्त प्रसव की सुविधा सहित हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायालय ने 24 अप्रैल को केंद्र सरकार को अंतिम अवसर दिया और उसके अधिवक्ता को इस मामले में निर्देश लेकर अदालत को अवगत कराने को कहा। खातून के पिता भोदु शेख की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और संजय हेगड़े ने कहा कि केंद्र सरकार का यह रवैया ‘कुछ हद तक अनुचित’ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने इस मामले में न्यायालय को अपने विचार नहीं बताए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">क्षेत्र के सेक्टर 26 में दो दशकों से अधिक समय से दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे इन परिवारों को पिछले साल 18 जून को बांग्लादेशी होने के संदेह में पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में 27 जून को सीमा पार धकेल दिया। कि निर्वासित किए गए छह नागरिकों को एक महीने के भीतर भारत वापस लाया जाए और आदेश पर अस्थायी रोक लगाने की सरकार की अपील को खारिज कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:31:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>एक ओर यूएपीए में जमानत,दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद का मामला बड़ी पीठ को भेजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एक ओर यूएपीए में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत के मामले पर अब बड़ी बेंच फैसला करेगी। इस मामले में शुक्रवार को दिन में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने ज़ोर देकर कहा था कि इस मामले को एक बड़ी बेंच के पास भेजा जाए। दूसरी ओर एक दूसरे मामले में अन्य बातों के अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साढ़े चार साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहने की बात पर ध्यान देते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी साज़िश</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मामले में यूएपीए के आरोपी सुहैल अहमद ठोकर को ज़मानत दे दी। यह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179982/on-one-hand-bail-in-uapa-on-the-other-hand"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images10.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एक ओर यूएपीए में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत के मामले पर अब बड़ी बेंच फैसला करेगी। इस मामले में शुक्रवार को दिन में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने ज़ोर देकर कहा था कि इस मामले को एक बड़ी बेंच के पास भेजा जाए। दूसरी ओर एक दूसरे मामले में अन्य बातों के अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साढ़े चार साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहने की बात पर ध्यान देते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी साज़िश</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मामले में यूएपीए के आरोपी सुहैल अहमद ठोकर को ज़मानत दे दी। यह मामला संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद सामने आया था। सीजेआई सूर्यकांत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह आदेश पारित किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बीच अब सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आतंकवाद और यूएपीए यानी गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामलों में जमानत देने के नियमों पर अहम फ़ैसला सुना दिया। कोर्ट ने दिल्ली दंगे मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न देने वाले अपने पुराने फैसले पर सवाल उठाते हुए मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने यह आदेश दिया। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों- तसलीम अहमद और खालिद सैफी को 6 महीने की अंतरिम जमानत भी दे दी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली में फरवरी 2020 में </span>CAA <span lang="hi" xml:lang="hi">विरोधी प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे हुए थे। इन दंगों में 50 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने कई लोगों पर आरोप लगाया कि उन्होंने दंगों की साज़िश रची थी। उमर खालिद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरजील इमाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तसलीम अहमद और खालिद सैफी समेत कई लोग यूएपीए के तहत गिरफ्तार किए गए थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट से कहा कि यूएपीए मामलों में जमानत के नियमों पर दोबारा विचार होना चाहिए। उन्होंने हाल के एक फ़ैसले पर सवाल उठाया। इससे पहले न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने नार्को-टेरर मामले में स्येद इफ्तिखार अंदरबी को जमानत देते हुए कहा था कि यूएपीए मामलों में भी </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">जमानत नियम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जेल अपवाद</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">। उन्होंने उमर खालिद वाले पुराने फ़ैसले पर संदेह जताया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एसजी राजू ने कहा कि यूएपीए जैसे गंभीर मामलों में सभी आरोपियों को एक जैसी छूट नहीं दी जा सकती है। हर मामले को अलग-अलग देखना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बहरहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि के ए नजीब वाले पुराने फैसले में दिए गए सिद्धांतों को लेकर अब भ्रम है। खासकर यूएपीए की धारा 43</span>D(<span lang="hi" xml:lang="hi">5) यानी जमानत के सख्त नियम और अनुच्छेद 21 यानी जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह तय करना जरूरी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया कि एक बेंच दूसरे बराबर की बेंच के फ़ैसले को आसानी से नहीं बदल सकती। क़ानून में स्पष्टता होनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए यह मुद्दा मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा जा रहा है ताकि बड़ी बेंच बने और अंतिम फैसला दे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तसलीम अहमद और खालिद सैफी को 6 महीने के लिए अंतरिम जमानत मिल गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले इनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। बता दें कि उमर खालिद और शरजील इमाम को अभी जमानत नहीं मिली है। उनका मामला अब बड़ी बेंच तय करेगी।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच 2020 दिल्ली दंगे के दो आरोपियों- तसलीम अहमद और खालिद सैफी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे पहले शुक्रवार को दिन में सुनवाई के दौरान आतंकवाद और </span>UAPA <span lang="hi" xml:lang="hi">मामलों में जमानत को लेकर मतभेद के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इस मुद्दे को बड़ी बेंच को भेज दिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि अलग-अलग दो-जज की बेंचों के फैसले एक-दूसरे से उलट हैं। केंद्र सरकार ने सवाल उठाया कि क्या </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बेल नियम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जेल अपवाद है</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">वाला सिद्धांत आतंकवाद जैसे गंभीर मामलों में भी लागू होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर ट्रायल में देरी हो रही हो</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने 26/11 मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब और लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद का उदाहरण दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू और वकील रजत नायर ने कोर्ट में कहा</span>, '<span lang="hi" xml:lang="hi">अगर अजमल कसाब 7-8 साल जेल में रहने के बाद बेल मांगता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या उसे बेल दे देते</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सैकड़ों गवाह हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सबूत इकट्ठा करने में समय लगता है। इसी तरह अगर हाफिज सईद पाकिस्तान से आकर ट्रायल में 5 साल जेल में रह जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या सिर्फ देरी के आधार पर उसे बेल दे देंगे</span>?' <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का कहना है कि हर केस के तथ्यों को देखकर बेल देनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि सिर्फ जेल में कितना समय बीता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस आधार पर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह फ़ैसला आने वाले समय में आतंकवाद और यूएपीए से जुड़े सभी जमानत मामलों पर असर डालेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए जमानत क़ानून को और साफ़ करने के लिए बड़े फ़ैसले की तैयारी कर ली है। दो आरोपियों को राहत मिल गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उमर खालिद समेत बड़े सवाल अब बड़ी बेंच के सामने हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक अन्य मामले में  सीजेआई सूर्यकांत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने  अन्य बातों के अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साढ़े चार साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहने की बात पर ध्यान देते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने आज जम्मू-कश्मीर के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी साज़िश</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मामले में यूएपीए के आरोपी सुहैल अहमद ठोकर को ज़मानत दे दी।पीठ ने यह भी कहा कि अगर अपीलकर्ता चल रहे मुक़दमे में सहयोग करने में नाकाम रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसे दी गई राहत का दुरुपयोग माना जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">खास बात यह है कि कोर्ट ने पहले समय-समय पर आदेश जारी किए थे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि याचिकाकर्ता के खिलाफ गवाही देने वाले अहम/सुरक्षित गवाह बिना किसी डर के अपने बयान दर्ज करा सकें (याचिकाकर्ता की रिहाई से पहले)। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज की सुनवाई के दौरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने बताया कि हालांकि कुछ अहम/सुरक्षित गवाहों की जांच अभी बाकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनके बयान सह-आरोपी की भूमिका से जुड़े हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि याचिकाकर्ता से।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह देखते हुए कि कुछ सह-आरोपियों को ज़मानत मिल चुकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कि मुक़दमे के पूरा होने में समय लग सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हिरासत में पहले ही बिताई जा चुकी अवधि को ध्यान में रखते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने याचिकाकर्ता को ज़मानत दे दी। ज़मानत बांड संबंधित </span>NIA <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमा करने का निर्देश दिया गया। उक्त अदालत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">याचिकाकर्ता की संबंधित पुलिस थाने में उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी मर्ज़ी के अनुसार शर्तें लगाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके वकील के अनुरोध पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने याचिकाकर्ता को </span>NIA <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत से वर्चुअली (सह-आरोपियों की तरह) पेश होने की अनुमति मांगने की भी छूट दी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">इस अनुरोध पर अदालत द्वारा कानून के अनुसार विचार किया जाएगा। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> बड़ी साज़िश का मास्टरमाइंड विभिन्न आतंकवादी संगठनों के बड़े नेता थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें लश्कर-ए-तैयबा (</span>LeT), <span lang="hi" xml:lang="hi">हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन (</span>HM), <span lang="hi" xml:lang="hi">अल-बद्र और पाकिस्तान में मौजूद अन्य संगठन शामिल थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चार्जशीट में आगे आरोप लगाया गया है कि यह साज़िश अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद रची गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका मकसद जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ भारत के अन्य हिस्सों में भी आतंकवाद की घटनाओं को फिर से भड़काना था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य एजेंसी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आतंकवादी समूह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान में मौजूद अपने मददगारों और नेताओं के साथ-साथ भारत के भीतर मौजूद अपने ओवर-ग्राउंड वर्करों (</span>OGWs) <span lang="hi" xml:lang="hi">के सहयोग से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आसानी से प्रभावित होने वाले स्थानीय युवाओं को अपने प्रभाव में लेने और उन्हें कट्टरपंथी बनाने में शामिल थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि उन्हें आतंकवाद की घटनाओं में शामिल होने के लिए भर्ती और प्रशिक्षित किया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">STF <span lang="hi" xml:lang="hi">ने बताया कि यह गैंग केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सचिवालय सुरक्षा बल और  ब राइफल्स की भर्ती परीक्षाओं में धांधली कर रहा था. आरोपियों ने ऑनलाइन परीक्षा सिस्टम को तकनीकी तरीके से प्रभावित कर उम्मीदवारों तक सही जवाब पहुंचाने की व्यवस्था बना रखी थी. बताया गया कि प्रत्येक उम्मीदवार से परीक्षा पास कराने के लिए करीब 4 लाख रुपये वसूले जाते थे.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सीधे </span>SSC <span lang="hi" xml:lang="hi">के सर्वर को हैक नहीं किया था. इसके बजाय परीक्षा केंद्र पर प्रॉक्सी सर्वर इंस्टॉल किया गया था. स्क्रीन शेयरिंग एप्लिकेशन के जरिए प्रश्नपत्र बाहर बैठे सॉल्वरों तक पहुंचाया जाता था. वहां से सवाल हल कर उम्मीदवारों को सही जवाब भेजे जाते थे.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस ने बताया कि अरुण कुमार तकनीकी काम संभालता था और वही प्रॉक्सी सर्वर सिस्टम को ऑपरेट करता था. </span>STF <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है. एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इसी तरीके का इस्तेमाल अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी किया गया था.</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:29:21 +0530</pubDate>
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