बाइडन दृष्टि बनाम बाइडन पैकेज

बाइडन- दृष्टि- बनाम -बाइडन- पैकेज
‘पैकेज ‘ का मतलब समझने में मुझे एक उम्र लग गयी .झूठ बोलना राजनीतिक कलाबाजी है लेकिन मै एकदम सफेद सच बोल रहा हूँ.मै पैकेज के बारे में कुछ साल पहले ही जान पाया.हमारे जमाने में ‘ पैकेज ‘एक अपरचित शब्द था,लेकिन जब से दुनिया में स्थायित्व का अभाव हुआ है तभी से पैकेज शब्द का प्रादुर्भाव भी हुआ है. पहले पैकेज केवल बाजार में चलता था लेकिन अब जीवन के हर क्षेत्र में पैकेज एक जाना-पहचाना शब्द है .दरअसल ‘ पैकेज ‘ एक संज्ञा है. जब तक ये संज्ञा है तब तक इसके एक दर्जन नाम हैं लेकिन जैसे ही ये शब्द क्रिया होता है इसके नाम घटकर एक या दो रह जाते हैं .दुनिया में कोरोनाकाल पैकेज के लिए यादगार समय मना जाएगा,क्योंकि चीन के बुहान से निकले कोरोना ने दुनिया के अधिकाँश देशों में अर्थव्यवस्था की नींव हिलाकर रख दी है,इसे ही मजबूत करने के लिए सरकारें नए-नए पैकेज घोषित कर रहीं हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने देश के लिए दो लाख करोड़ अमरीकी डालर का नया पैकेज घोषित कर दावा किया है की ये सदी का सबसे बड़ा आर्थिक पैकेज है .
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमेरिका के आधारभूत ढांचे को सुधारने और चीन से मुकाबले के लिए बुधवार को दो ट्रिलियन डॉलर (दो लाख करोड़ डॉलर) के इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज का एलान किया। उन्होंने कहा कि इससे चार वर्षों में अच्छे वेतन वाली एक करोड़ अस्सी लाख नौकरियों पैदा होंगी। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक इस इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान को वर्तमान सदी में का सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव बताया जा रहा है।
अमेरिका में राष्ट्रपति ने इस पाहाईकेज की घोषणा के लिए पूरे देश को रात आठ बजे टीवी देखने के लिए नहीं कहा था. वे पेंसिलवेनिया के पिट्सबर्ग में थे और वहीं से इंफ्रा प्लान का एलान करते हुए बाइडन ने कहा कि यह सभी को ना केवल समान अवसर प्रदान करने का काम करेगा बल्कि श्रमिकों को सशक्त भी बनाएगा। यह योजना यह भी सुनिश्चित करेगी कि नई पैदा होने वाली नौकरियां अच्छे वेतन की हो, जिससे कामगार अपने परिवार का भरण-पोषण अच्छी तरह से कर सके। बाइडन ने संसद से अपील की वह प्रो एक्ट (प्रोटेक्टिंग द राइट टू आर्गनाइज एक्ट) को पारित करके जल्द से जल्द उनके पास भेजे, जिससे इसे कानून की शक्ल दी जा सके।
कोरोनाकाल में बीती साल हमारे यहां भी 20 लाख  करोड़ का एक पैकेज घोषित किया गया था और जिसका बाद में हमारे वित्तमंत्री सीनियर,जूनियर किश्तों में बखान करते रहे थे,हमारे पैकेज  में जितना दिया गया उससे जयादा निकाल भी लिया गया अमेरिका का आर्थिक पैकेज इससे अलग है.इसमें साफ़ कहा गया है की पैकेज का मकसद किसी पर दया करना नहीं बल्कि सुरसा मुख की तरह सामने खड़े चीन का मुकाबला करना है .
हमारे आर्थिक पैकेज की खासियत ये थी की हमने यानि हमारी सरकार ने रक्षा जैसे राष्ट्रहित से जुड़े क्षेत्र तक को विदेशी निवेश के लिए खोल दिया था ,नयी नौकरियों का वादा किया था लेकिन वे दरअसल खिन थी हिन् नहीं ,क्योंकि वो एक राजनीतिक पैकेज था .उसमें व्यापकता का अभाव था.लेकिन अमरीका का पैकेज राष्ट्रपति बाइडन के नाम की तरह ही बाइड यानि व्यापक है .बाइडन ने इस दौरान प्रतिवर्ष चार लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक कमाने वालों पर कर बढ़ाने की घोषणा की। बाइडन ने पेन्सिलवेनिया के पिट्सबर्ग में कहा कि अमेरिका में पहली बार इतना बड़ा निवेश किया जा रहा है। इस योजना का मकसद लाखों अच्छे रोजगारों को पैदा करना है।
चीन से मुकाबला करने के लिए यह योजना जरूरी है। बाइडन ने जोर देकर कहा कि हमको यह करना ही होगा। इस पैकेज में लगभग 32 हजार किलोमीटर सड़कों, 10 हजार पुलों के साथ साथ हवाईअड्डों और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का आधुनिकीकरण किया जाएगा।अमरीका का यह आर्थिक पैकेज जल प्रणालियों, इलेक्ट्रिकल ग्रिड, हाईस्पीड इंटरनेट और क्वालिटी हाउसिंग में सुधार के लिए भी जारी किया गया है। गौरतलब है कि राष्‍ट्रपति चुनाव के दौरान डेमोक्रेट ने देश के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए एक बड़े पैकेज के जारी करने की बात कही थी।
बाइडन  को इस पैकेज को मंजूरी दिलाने के लिए अमेरिकी संसद के समर्थन की जरूरत होगी,वहां ध्वनिमत से काम नहीं चलने वाला  होगी। इस पैकेज को अपनाने के लिए राष्ट्रपति को लगभग 10 रिपब्लिकन नेताओं के अनुमोदन की जरूरत होगी। वहीं सीनेट में रिपब्लिकन नेता मिच मैककॉनेल ने इस योजना को तुरंत खारिज कर दिया।लेकिन अब तक मैच को देशद्रोही नहीं कहा गया है .अमरीका में अभी इस पैकेज को लेकर प्रतिक्रियाएं आने में समय लगेगा .वाहन भारत की तरह लोग एकदम टीवी पर बहस के लिए उपासे नहीं बैठे हैं .
मुझे अमरीका में कोई डेढ़ साल रहने का अनुभव है. मै देखता हूँ की अमरीकी बाजार चीनी उत्पादों से भरे पड़े हैं .जाहिर है इससे अमरीकी अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव भी पड़ता ही होगा .चीनी उत्पाद ही नहीं अपने इंजीनियर भी अमरीका की सेवा में लगाए हुए है,अर्थात बाजार पर भी कब्जा और नौकरियों पर भी कब्जा .अमरीका की विवशताएँ होंगी की उसने चीन के लिए अपने दरवाजे एकदम से बंद नहीं किये ,कर भी नहीं सकता,क्योंकि चीन जितने कम दाम में जितना भरोसे का माल अमरीका को दे रहा है कोई और देश दे नहीं सकता और अमरीका उसे बना नहीं सकता ऐसे  में कुछ नया करना अमरीका की मजबूरी भी है और जरूरत भी .
भारत को भी अमरीका की तरह ही चीन से मुकाबला करने के लिए एक और पैकेज की जरूरत है लेकिन ऐसे पैकेज की जो एक हाथ से देकर दूसरे हाथ से दोगुना वापस लेने वाला न हो .सरकार को सबसे पहले तो देश के किसानों की समस्या का निराकरण करना चाहिए,यदि सरकार ऐसा कर सके तो समझ लीजिये की पैकेज का आधा काम तो वैसे ही पूरा हो जाएगा .दूसरा पैकेज में ऐसे प्रबंध करना चाहिए जो एकदम अराजनीतिक हों.कोई भी पैकेज आगामी   आम चुनाव को नजर में रखकर बनाया जाएगा तो वो व्यापक और  राष्ट्र हितैषी हो ही नहीं सकता .
पैकेज का मतलब गठ्ठर,पुलिंदा,संकुल,एकमुश्त इंतजाम ,बंडल,बोरा संदूक कुछ भी हो सकता है लेकिन सबका मकसद एक ही होता है और वो है देश को संकट से बाहर निकालना .देश चौतरफा संकट में है. भारत में कोरोना केवल आम जनता को ही नहीं अपितु देश की आर्थिक,राजनितिक और सामाजिक व्यवस्था को भी हुआ है .इन तीनों के कोरोना की चपेट में आने से लोकतंत्र का दम घुट रहा है. देश में लोकतंत्र को फौरी और एकमुश्त इंतजाम कर ही रोका जा सकता है .हमारे बाइडन यानि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से क्या देश किसी ‘बाइडन पैकेज’ की उम्मीद कर सकता है ?

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