भक्ति ही मुक्ति का कारण


श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान मेंं घटयात्रा ध्वजारोहण एवं वेदी शुद्धि की क्रियाये संपन्न


ललितपुर।

परम पूज्य वीतरागी दिगम्बर श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के मंगल आर्शीवाद परम पूज्य निर्याेपक श्रमण मुनिमुगंव की सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा से परम पूज्य मुनि श्री महाराज के मंगल साध्यि एवं बाल ब्रम्हचारी मनोज भैया के दिशा निर्देशन मेंं श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर मेंं 2 मार्च से होने वाले श्री सिद्ध चक्र महामण्डल विधान के पूर्व आज घटयात्रा, ध्वजारोहण वेदी शुद्धि का कार्यक्रम जिन शासन की महती धर्म पभावना के साथ सानंद संपन्न हुआ।
घटयात्रा का मांगलिक जुलूस दोपहर 1 बजे से श्री दि. जैन बड़ा मंदिर जी से प्रांरभ हुआ।

जिसमें संगीत की मुधर स्वर लहरियों के बीच 25 अश्व वागियों मेंं विधान के मुख्य पात्र सोधर्म इन्द्र और उनकी देवी शचि के साथ सभी इन्द्र और इन्द्रानियां वागियामेंं इन्द्राणियां वागयिोंं मेंं सवार होकर मानों स्वर्ग लोक के वैभव का ही दर्शनकरा रहे थे। आलोककि आनंद और प्रभु भकित में संगी हुये सभी इन्द्र परिवारों का उत्साह आज चरम पर था। सैकडों इन्द्रानियां सिर पर मंगल कलशो को धारण करते हुये भक्ति गीत गाली चल रही थी। सैकड़ो इन्द्र, पुरूष और महिलाओंं की टोलियां सभी का मंगल हो के उदघोष के साथ जुलूस मेंं शोभायमान हो रहे थे। सभी स्वयं सेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता जुलूस को भव्यता प्रदान कर रहे थे।

सब से मुख्य आकर्षण का केन्द्र श्री सुधा कलश का दिव्य घोष रहा। जिसे युवतियों और महिलाओं की टीम प्रथम बार अपी कला का प्रदर्शन करते हुये लोगों मेंं उत्साह का संचार कर रही थी। सभी लोग उनकी इस कला से भाव विभोर हो गये थे। यह जुलूस रावरपुरा से घण्टाघर,अटामंदिर, तालाबपुरा होते हुये अपने गन्तव्ध की और बढ़ रहा था। जुलूस के मंदिर में पहुंचने के बाद कलशों के जल से इन्दाणियोंं ने 81 मंत्री के द्वारा वेददी और पूरे परिसर की शुद्धि की। विधान का ध्वजारोहण करने का सौभाग्य अनूप जी मोहने मावा परिवार को प्राप्त हुआ एवं बड़ बााबा के शिखर पर ध्वजारोहण मदनलाल विवेक कुमार काका बस वालों ने किया।

उसके पूर्व मुनि श्रीविश्चल सागर जी महाराज ने अपने उद्बबोधान मेंं अपरा जन समूह को सबंोधित ेकरते हुये कहा कि भक्ति ही मुक्ति का कारण है। निश्क्षल और निपकाम भक्ति एक दिन भक्त को भी भगवान बना देती है। उन्होंने कहा कि घटयात्रा के माध्यम से बाहय शुद्धि की जाता है। वाहय शुद्धि ही अतरंग शुद्धि मेंं कारण है। परम पूज्य श्री देशभूषण महाराज ने सिद्ध चक्र विधान के महत्व बोलते हुये कहा कि निर्मल परिणामोंं के द्वारा किया गया विधान- विधि कर्म के विधा को भी बदल देता है। उन्होंंने कहा किइस विधान के माध्यम से अनन्तानत जो सिद्ध भगवान है। उनकी पूजा की जाती है। जो कर्म कल से रहित हो गये।

जिन्हे अनंत काल तक सिद्ध हे। ऐसे सिद्धो की पूजा आठ दिनोंं तक हम सभी भक्ति भाव से करेंगे। मीडिया प्रभ्ज्ञारी अन्तिम जैन परोल ने बताया कि इस विधान मेंं रात्रि मेंं दिल्ली से आये कलाकार मनोज शर्मा कंठष्ठ की टीम के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जायेगा। यह विधान सकल दिगम्बर जैन समाज पंचायत ललितपुर ेक तत्वाधान में किया जा रहा है। मंदिर प्रबंधक एंव सभी कार्यकर्ताओं का सहयोग निरन्तर मिल रहा है।


आज यह होंगे कार्यक्रम
सुबह 6 बजे मंगलाष्टक अभिषेक शान्तिधारा, सकलीकरण, इन्द्र प्रतिष्ठा, मंडप प्रतिपष्ठा, देव शास्त्र गुरू की पूजा एवएं मुनि श्री के प्रवचन उसके बाद सिद्धों के आठ गुणों के माध्यम से आठ अद्र्य समयति किये जायेंगे।