<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/author/5/swatantra-prabhat-reporters" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Swatantra Prabhat UP - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/author/5/rss</link>
                <description>Swatantra Prabhat UP RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>प्रीपेड मीटर : बैलेंस खत्म होने पर तुरंत नहीं कटेगी बिजली,मिलेगा 'इमरजेंसी क्रेडिट'</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>लखनऊ:</strong> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर के संबंध में नए विस्तृत दिशा-निर्देश  जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब प्रीपेड मीटर का बैलेंस खत्म होते ही घर की बत्ती गुल नहीं होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उपभोक्ताओं को एक निश्चित अवधि के लिए </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">इमरजेंसी क्रेडिट</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की सुविधा दी जाएगी। </span><span class="m_-4907186834231856065whitespace-normal"><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड</span></span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए नए और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब बैलेंस खत्म होते ही बिजली सप्लाई तुरंत बंद नहीं होगी</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177680/electricity-will-not-be-cut-immediately-if-prepaid-meter-balance"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/uppcl.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>लखनऊ:</strong> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर के संबंध में नए विस्तृत दिशा-निर्देश  जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब प्रीपेड मीटर का बैलेंस खत्म होते ही घर की बत्ती गुल नहीं होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उपभोक्ताओं को एक निश्चित अवधि के लिए </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">इमरजेंसी क्रेडिट</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की सुविधा दी जाएगी। </span><span class="m_-4907186834231856065whitespace-normal"><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड</span></span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए नए और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब बैलेंस खत्म होते ही बिजली सप्लाई तुरंत बंद नहीं होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उपभोक्ताओंको </span><span lang="hi" xml:lang="hi">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">इमरजेंसी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्रेडिट</span><span lang="hi" xml:lang="hi">”</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुविधा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे वे बिना रुकावट कुछ समय तक बिजली का उपयोग कर सकेंगे।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई व्यवस्था के तहत </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं को बैलेंस समाप्त होने के बाद भी </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों तक बिजली मिलती रहेगी। वहीं </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>2 <span lang="hi" xml:lang="hi">किलोवाट तक के उपभोक्ताओं को </span>3 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन या </span>₹200 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक (जो भी बाद में हो) की राहत दी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि अन्य सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को </span>3 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों का इमरजेंसी क्रेडिट मिलेगा। इस अवधि में उपयोग की गई बिजली की लागत अगले रिचार्ज से स्वतः समायोजित कर ली जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे उपभोक्ताओं को सेवा बाधित होने का खतरा कम होगा।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए </span><span lang="hi" xml:lang="hi">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">नो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">डिस्कनेक्शन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पॉलिसी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">”</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लागू</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तहत</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शाम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>6:00 <span lang="hi" xml:lang="hi">बजे से सुबह </span>8:00 <span lang="hi" xml:lang="hi">बजे तक बिजली नहीं काटी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाहे बैलेंस शून्य या नेगेटिव ही क्यों न हो। इसके अलावा रविवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरे शनिवार और सभी सरकारी अवकाशों के दौरान भी बिजली आपूर्ति जारी रहेगी। यह व्यवस्था विशेष रूप से रात और छुट्टियों में उपभोक्ताओं को होने वाली असुविधा को ध्यान में रखकर लागू की गई है।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रिचार्ज को लेकर भी प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। विभाग के अनुसार रिचार्ज सफल होने के बाद सामान्यतः </span>2 <span lang="hi" xml:lang="hi">घंटे के भीतर बिजली स्वतः बहाल हो जाती है। यदि किसी कारणवश ऐसा नहीं होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उपभोक्ता टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर </span>1912 <span lang="hi" xml:lang="hi">पर संपर्क कर सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां स्मार्ट मीटर से संबंधित शिकायतों के त्वरित समाधान की व्यवस्था की गई है।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उपभोक्ताओं को समय पर रिचार्ज की जानकारी देने के लिए एक प्रभावी </span>SMS <span lang="hi" xml:lang="hi">अलर्ट सिस्टम भी लागू किया गया है। इसके तहत उपभोक्ताओं को चार चरणों में सूचनाएं मिलेंगी—जब बैलेंस </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत रह जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत बचेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब बैलेंस पूरी तरह समाप्त हो जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और प्रत्येक माह की शुरुआत में एक मासिक अलर्ट भी भेजा जाएगा। इससे उपभोक्ता समय रहते रिचार्ज कर सकेंगे और अनावश्यक परेशानी से बच पाएंगे।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपभोक्ताओं को अपना मोबाइल नंबर अपडेट रखने की भी सलाह दी गई है। मोबाइल नंबर को </span>UPPCL Smart App, <span lang="hi" xml:lang="hi">विभागीय वेबसाइट या </span>1912 <span lang="hi" xml:lang="hi">हेल्पलाइन के माध्यम से आसानी से अपडेट किया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि सभी जरूरी सूचनाएं समय पर प्राप्त होती रहें। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि किसी उपभोक्ता को यह संदेह होता है कि उनका स्मार्ट मीटर तेज चल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे संबंधित उपखंड कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनके परिसर में </span><span lang="hi" xml:lang="hi">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">चेक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मीटर</span><span lang="hi" xml:lang="hi">”</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लगाया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मीटर की सटीकता की जांच की जा सके।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इमरजेंसी क्रेडिट का नया नियम</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विभागीय जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैलेंस खत्म होने के बाद उपभोक्ताओं को अलग-अलग श्रेणियों में राहत दी गई है:</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">1<span lang="hi" xml:lang="hi"> किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ता: बैलेंस खत्म होने के बाद भी </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों तक बिजली नहीं कटेगी।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">1<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> किलोवाट तक के उपभोक्ता: इन्हें </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन या </span>₹200 (<span lang="hi" xml:lang="hi">जो भी बाद में हो) तक का इमरजेंसी क्रेडिट मिलेगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अन्य सभी उपभोक्ता: बैलेंस शून्य होने के बाद </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों का समय दिया जाएगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रात और त्योहारों पर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">नो डिस्कनेक्शन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">पॉलिसी</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">UPPCL <span lang="hi" xml:lang="hi">ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए शाम </span>6:00<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे से सुबह </span>8:00<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे तक बिजली नहीं काटी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भले ही बैलेंस नेगेटिव क्यों न हो। इसके अलावा रविवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरे शनिवार और सभी सार्वजनिक अवकाशों के दिन भी बिजली आपूर्ति बाधित नहीं की जाएगी। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस अवधि के दौरान खर्च की गई बिजली की राशि अगले रिचार्ज में काट ली जाएगी।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर मिलेगा </span>SMS </strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अलर्ट</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उपभोक्ताओं को रिचार्ज की याद दिलाने के लिए सिस्टम द्वारा चार चरणों में </span>SMS <span lang="hi" xml:lang="hi">भेजे जाएंगे:</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रथम अलर्ट: पिछला रिचार्ज </span>30%<span lang="hi" xml:lang="hi"> बचने पर।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">द्वितीय अलर्ट पिछला रिचार्ज </span>10%<span lang="hi" xml:lang="hi"> बचने पर।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शून्य बैलेंस:</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बैलेंस पूरी तरह खत्म होने पर।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">4. <span lang="hi" xml:lang="hi">मासिक अलर्ट: प्रत्येक माह के प्रारंभ में।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">रिचार्ज और मोबाइल अपडेट की सुविधा</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दस्तावेजों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिचार्ज सफल होने के बाद आमतौर पर </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे के भीतर बिजली स्वतः बहाल हो जाएगी। यदि ऐसा नहीं होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर </span>1912<span lang="hi" xml:lang="hi"> पर संपर्क कर सकते हैं। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि किसी उपभोक्ता का मोबाइल नंबर बदल गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे </span>'UPPCL Smart App' <span lang="hi" xml:lang="hi">या विभागीय वेबसाइट के माध्यम से उसे अपडेट कर सकते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">तेज मीटर की शिकायत पर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">चेक मीटर</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की सुविधा</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि किसी उपभोक्ता को लगता है कि उनका स्मार्ट मीटर बहुत तेज चल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे संबंधित उपखंड कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद उनके परिसर में एक </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">चेक मीटर</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">लगाया जाएगा ताकि मीटर की सटीकता की पुष्टि की जा सके।</span></p><p style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">निष्कर्ष:</span></strong><br /><span lang="hi" xml:lang="hi">इन नए दिशा-निर्देशों के लागू होने से प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब न केवल बिजली कटने का डर कम होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उपभोक्ता अपनी खपत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैलेंस और खर्च को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित तरीके से मैनेज कर सकेंगे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177680/electricity-will-not-be-cut-immediately-if-prepaid-meter-balance</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177680/electricity-will-not-be-cut-immediately-if-prepaid-meter-balance</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 18:16:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/uppcl.jpg"                         length="85414"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छोटे बच्चों की माता शिक्षिकाओं को जनगणना ड्यूटी से मुक्त किया जाए-नरेश गंगवार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली। </strong>राष्ट्रीय कार्यक्रम जनगणना में इस समय मकान गणना के लिए प्रशिक्षण चल रहा जिस के लिए बेसिक शिक्षा विभाग सभी के सभी शिक्षक यानी 99. 5%  शिक्षक, शिक्षा मित्र अनुदेशकों की ड्यूटी लगा दी गई है, इसमें कई खामियां देखने में आई हैं। जैसे स्कूल के हेड इंचार्ज की ड्यूटी लगा दी गई है इनकी ड्यूटी लगने से स्कूल का संचालन, सूचनाओं के आदान प्रदान के साथ साथ विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में दिक्कतें होंगी, साथ ही वह जो ड्यूटी करने की स्थिति में नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  उनमें गंभीर रूप से अस्वस्थ शिक्षक ,वृद्ध, और छोटे बच्चों की माता</div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177675/unwell-teachers-along-with-head-incharges-of-schools"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260430-wa0007.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बरेली। </strong>राष्ट्रीय कार्यक्रम जनगणना में इस समय मकान गणना के लिए प्रशिक्षण चल रहा जिस के लिए बेसिक शिक्षा विभाग सभी के सभी शिक्षक यानी 99. 5%  शिक्षक, शिक्षा मित्र अनुदेशकों की ड्यूटी लगा दी गई है, इसमें कई खामियां देखने में आई हैं। जैसे स्कूल के हेड इंचार्ज की ड्यूटी लगा दी गई है इनकी ड्यूटी लगने से स्कूल का संचालन, सूचनाओं के आदान प्रदान के साथ साथ विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में दिक्कतें होंगी, साथ ही वह जो ड्यूटी करने की स्थिति में नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> उनमें गंभीर रूप से अस्वस्थ शिक्षक ,वृद्ध, और छोटे बच्चों की माता शिक्षिकाओं की इस भीषण गर्मी में कोई अप्रिय स्थिति का सामना न करना पड़े इसीलिए आज उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नरेश गंगवार, मांडलिक मंत्री केसी पटेल, जिला मंत्री बलवीर सिंह ने बुधवार को जिला जनगणना अधिकारी अपर जिलाधिकारी (वित्त) को पत्र ज्ञापन दे कर  मांग की है।  सभी शिक्षकों को को जनगणना के कार्य से मुक्त रखा जाए । आवश्यक हो तो अन्य विभाग से कर्मचारी लगाए जाने की मांग की है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177675/unwell-teachers-along-with-head-incharges-of-schools</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177675/unwell-teachers-along-with-head-incharges-of-schools</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:26:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img-20260430-wa0007.jpg"                         length="144293"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कछुए की तरह रेंग रहा है राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का सपना</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">लेखक: राजीव शुक्ला</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय शिक्षा नीति (</span>NEP) 2020<span lang="hi" xml:lang="hi">  को लागू हुए छह वर्ष बीत चुके हैं। इस दौरान </span>5+3+3+4<span lang="hi" xml:lang="hi">  की नई संरचना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहु-विषयी शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यावसायिक प्रशिक्षण और निरंतर मूल्यांकन जैसे सुधारों की दिशा में कुछ प्रगति हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आधारभूत चुनौतियाँ—शिक्षक कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुनियादी ढांचे की कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक प्रशिक्षण की अपर्याप्तता और धनराशि की कमी—अभी भी शिक्षा व्यवस्था को जकड़े हुए हैं। विशेषज्ञों और रिपोर्टों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति का वास्तविक रूपांतरण अभी भी दूर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और सरकारी स्कूलों में।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">NEP 2020<span lang="hi" xml:lang="hi">  का मूल उद्देश्य रट्टा-आधारित शिक्षा को समाप्त कर</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177673/the-dream-of-national-education-policy-2020-is-crawling-like"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-29-at-10.07.24.jpeg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">लेखक: राजीव शुक्ला</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय शिक्षा नीति (</span>NEP) 2020<span lang="hi" xml:lang="hi"> को लागू हुए छह वर्ष बीत चुके हैं। इस दौरान </span>5+3+3+4<span lang="hi" xml:lang="hi"> की नई संरचना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहु-विषयी शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यावसायिक प्रशिक्षण और निरंतर मूल्यांकन जैसे सुधारों की दिशा में कुछ प्रगति हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आधारभूत चुनौतियाँ—शिक्षक कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुनियादी ढांचे की कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक प्रशिक्षण की अपर्याप्तता और धनराशि की कमी—अभी भी शिक्षा व्यवस्था को जकड़े हुए हैं। विशेषज्ञों और रिपोर्टों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति का वास्तविक रूपांतरण अभी भी दूर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और सरकारी स्कूलों में।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">NEP 2020<span lang="hi" xml:lang="hi"> का मूल उद्देश्य रट्टा-आधारित शिक्षा को समाप्त कर कौशल-उन्मुख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लचीली और समावेशी शिक्षा प्रणाली विकसित करना था। नीति में सार्वजनिक शिक्षा पर जीडीपी का </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत व्यय करने का लक्ष्य रखा गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक यह आंकड़ा अभी भी लगभग </span>2.9-3<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत के आसपास ही है। इससे बुनियादी ढांचा विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक क्षमता निर्माण और डिजिटल विस्तार प्रभावित हो रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देशभर में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। संसद में प्रस्तुत आंकड़ों और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राथमिक स्तर पर लाखों पद खाली हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर रिक्तियां और बढ़ रही हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में यह समस्या और गंभीर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां शिक्षक-छात्र अनुपात प्रभावित हो रहा है। कई शिक्षक अनुबंधित या अपर्याप्त प्रशिक्षित हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे </span>NEP <span lang="hi" xml:lang="hi">की नई शिक्षण पद्धतियों—अनुभव-आधारित सीखना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समस्या-समाधान का क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण हो गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बुनियादी ढांचे की स्थिति भी चिंताजनक है। ग्रामीण स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयोगशालाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुस्तकालय और स्थिर इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी डिजिटल डिवाइड को बढ़ा रही है। </span>NEP <span lang="hi" xml:lang="hi">में बहु-भाषी शिक्षा और मातृभाषा में शिक्षण पर जोर दिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पाठ्यपुस्तकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षित शिक्षकों और क्षेत्रीय विविधता को ध्यान में रखते हुए मानकीकरण की चुनौती बनी हुई है। कई राज्यों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषकर दक्षिण भारत में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तीन-भाषा फॉर्मूला और कुछ प्रावधानों पर विरोध या आंशिक स्वीकार्यता देखी जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उच्च शिक्षा में भी चुनौतियाँ समान हैं। लचीले प्रवेश-निकास विकल्प </span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रेडिट बैंक और बहु-विषयी पाठ्यक्रमों को लागू करने में संसाधनों और शिक्षक प्रशिक्षण की कमी बाधक बन रही है। डिजिटल कनेक्टिविटी और उपकरणों की उपलब्धता ग्रामीण तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक नहीं पहुंच पा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ी संख्या में बच्चे प्रभावित होते हैं</span>, NEP 2020<span lang="hi" xml:lang="hi"> को चरणबद्ध तरीके से लागू कर रहा है। </span>2026-27<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बजट में शिक्षा क्षेत्र को महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दी गई है—बुनियादी शिक्षा के लिए </span>77,622<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माध्यमिक शिक्षा के लिए </span>22,167<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये (</span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत वृद्धि) और उच्च शिक्षा के लिए </span>6,591<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। व्यावसायिक शिक्षा पर फोकस बढ़ाते हुए </span>UP <span lang="hi" xml:lang="hi">बोर्ड ने </span>2026-27<span lang="hi" xml:lang="hi"> सत्र से कक्षा </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> और </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi"> में व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य कर दिया है। यह कदम </span>NEP <span lang="hi" xml:lang="hi">के स्किल डेवलपमेंट लक्ष्य से मेल खाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाल ही में लखनऊ में आयोजित एजुकेशन कॉन्क्लेव </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">योगी मॉडल</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा। फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी (</span>FLN), <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन</span>, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">और एडटेक के उपयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निरंतर मूल्यांकन और शिक्षक सशक्तिकरण पर जोर दिया गया। राज्य सरकार स्मार्ट स्कूलों का विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल और अभ्युदय कोचिंग जैसी पहलों पर काम कर रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी</span>, UP <span lang="hi" xml:lang="hi">में भी शिक्षक रिक्तियां (लगभग </span>1.93<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से अधिक)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल मर्जर की प्रक्रिया और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी चर्चा में रहती है। व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में नामांकन अभी कम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दर्शाता है कि जागरूकता और बुनियादी ढांचे पर और काम की जरूरत है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">NEP <span lang="hi" xml:lang="hi">के छठे वर्ष में हम एक मोड़ पर खड़े हैं। जहां नीति की दिशा सही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता बढ़ाना अनिवार्य है। यदि इन चुनौतियों का समाधान नहीं किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा। सरकारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षाविदों और समाज को मिलकर इस </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा क्रांति</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">को वास्तविकता बनाने की जरूरत है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा राष्ट्र का भविष्य है। नई शिक्षा नीति </span>2020 <span lang="hi" xml:lang="hi">को मात्र नीति-पत्र नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जन-आंदोलन बनाना होगा। बजट बढ़ोतरी और राज्य-स्तरीय पहलें सराहनीय हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव तभी दिखेगा जब हर स्कूल में योग्य शिक्षक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उचित बुनियादी ढांचा और छात्र-केंद्रित वातावरण उपलब्ध होगा। समय अब प्रतीक्षा का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177673/the-dream-of-national-education-policy-2020-is-crawling-like</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177673/the-dream-of-national-education-policy-2020-is-crawling-like</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:22:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/whatsapp-image-2026-04-29-at-10.07.24.jpeg"                         length="187879"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएँ </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के धार जिले में हाल ही में हुआ भीषण सड़क हादसा एक बार फिर देश को झकझोर गया। मजदूरों से भरा एक पिकअप वाहन, जिसमें क्षमता से कहीं अधिक लोग सवार थे, टायर फटने के बाद अनियंत्रित होकर पलट गया और दूसरी दिशा में जाकर एक अन्य वाहन से टकरा गया। इस दर्दनाक घटना में कई लोगों की जान चली गई, जिनमें मासूम बच्चे भी शामिल थे। यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि भारत में हर साल होने वाली हजारों सड़क दुर्घटनाओं की लंबी और चिंताजनक श्रृंखला का एक हिस्सा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारत दुनिया के उन देशों में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177671/increasing-road-accidents-in-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/4nq5nhkbfmcilqk31cddfdp18pky2hzib9cukjj3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के धार जिले में हाल ही में हुआ भीषण सड़क हादसा एक बार फिर देश को झकझोर गया। मजदूरों से भरा एक पिकअप वाहन, जिसमें क्षमता से कहीं अधिक लोग सवार थे, टायर फटने के बाद अनियंत्रित होकर पलट गया और दूसरी दिशा में जाकर एक अन्य वाहन से टकरा गया। इस दर्दनाक घटना में कई लोगों की जान चली गई, जिनमें मासूम बच्चे भी शामिल थे। यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि भारत में हर साल होने वाली हजारों सड़क दुर्घटनाओं की लंबी और चिंताजनक श्रृंखला का एक हिस्सा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बेहद अधिक है। हर साल लाखों लोग दुर्घटनाओं में घायल होते हैं और हजारों लोगों की जान चली जाती है। इन हादसों के पीछे कई कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी, वाहन चालकों की लापरवाही और सड़कों की खराब स्थिति। इसके अलावा ओवरलोडिंग और ओवरटेकिंग जैसी गलत आदतें भी दुर्घटनाओं को बढ़ावा देती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तेज रफ्तार आज के समय में सड़क दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण बन चुकी है। लोग समय बचाने या जल्द गंतव्य तक पहुंचने की होड़ में अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डाल देते हैं। वाहन चलाते समय गति सीमा का पालन न करना एक आम समस्या बन गई है। खासकर हाईवे पर लोग 80-100 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे भी अधिक गति से वाहन चलाते हैं, जिससे जरा सी चूक भी बड़ी दुर्घटना का रूप ले लेती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही ओवरलोडिंग भी एक गंभीर समस्या है। धार की घटना में भी देखा गया कि पिकअप वाहन में क्षमता से अधिक मजदूर सवार थे। इस तरह की लापरवाही अक्सर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में देखने को मिलती है, जहां लोग सस्ते और आसान परिवहन के लिए जोखिम उठाते हैं। लेकिन जब हादसा होता है, तो इसका परिणाम बेहद भयावह होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में सड़कों की स्थिति भी कई जगहों पर दुर्घटनाओं का कारण बनती है। गड्ढों से भरी सड़कें, अधूरी निर्माण प्रक्रिया, खराब संकेत व्यवस्था और अंधे मोड़ जैसी समस्याएं अक्सर दुर्घटनाओं को न्योता देती हैं। कई बार सड़क निर्माण में गुणवत्ता की कमी भी सामने आती है, जिससे सड़क जल्दी खराब हो जाती है और दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ड्राइवर की लापरवाही और थकान भी एक बड़ा कारण है। कई ड्राइवर लंबे समय तक लगातार वाहन चलाते हैं, जिससे उनकी एकाग्रता कम हो जाती है। नींद के झोंके में वाहन चलाना बेहद खतरनाक होता है। कई बड़े हादसों में यह पाया गया है कि ड्राइवर की थोड़ी सी झपकी ने कई जिंदगियां छीन लीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर पिछले एक साल की बड़ी सड़क दुर्घटनाओं पर नजर डालें, तो तस्वीर और भी चिंताजनक हो जाती है। देश के विभिन्न राज्यों में हुए हादसों में सैकड़ों परिवार उजड़ गए। कहीं बस खाई में गिर गई, तो कहीं ट्रक और कार की टक्कर में पूरा परिवार खत्म हो गया। कई मामलों में शादी या धार्मिक कार्यक्रम से लौट रहे लोग दुर्घटना का शिकार हो गए। इन घटनाओं में एक समानता देखने को मिलती है—ज्यादातर हादसे मानवीय गलती या लापरवाही के कारण हुए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर भारत में कई ऐसे हादसे हुए जहां बसें नदी या खाई में गिर गईं। दक्षिण भारत में तेज रफ्तार कारों की टक्कर से कई लोगों की मौत हुई। पश्चिम भारत में हाईवे पर ट्रकों की भिड़ंत ने बड़े नुकसान पहुंचाए। इन सभी घटनाओं ने यह साबित किया कि सड़क सुरक्षा के मामले में अभी भी बहुत काम किया जाना बाकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार ने सड़क सुरक्षा के लिए कई नियम बनाए हैं, जैसे हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना, शराब पीकर वाहन न चलाना और गति सीमा का पालन करना। इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस द्वारा चालान और सख्ती भी की जाती है। लेकिन इन नियमों का पालन तभी संभव है जब आम लोग जागरूक हों और अपनी जिम्मेदारी समझें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दुर्घटनाओं के बाद सरकार द्वारा मुआवजा दिया जाता है, जैसे मृतकों के परिवार को आर्थिक सहायता और घायलों के इलाज का खर्च। लेकिन यह सहायता उस नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती जो एक परिवार अपने किसी सदस्य को खोने के बाद झेलता है। कई बार परिवार का एकमात्र कमाने वाला व्यक्ति ही दुर्घटना का शिकार हो जाता है, जिससे पूरे परिवार का भविष्य संकट में पड़ जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि समाज और हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। हमें वाहन चलाते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। ट्रैफिक नियमों का पालन करना चाहिए और दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए। वाहन की नियमित जांच और रखरखाव भी जरूरी है, ताकि तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटना न हो।स्कूल और कॉलेज स्तर पर भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने की जरूरत है। युवाओं को यह समझाना जरूरी है कि तेज रफ्तार और स्टंट करना कोई बहादुरी नहीं, बल्कि यह जानलेवा हो सकता है। मीडिया और सोशल मीडिया भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह समझना होगा कि सड़क पर हर व्यक्ति की जान की कीमत बराबर है। एक छोटी सी गलती कई जिंदगियों को खत्म कर सकती है। इसलिए जब भी हम सड़क पर निकलें, तो जिम्मेदारी और सावधानी के साथ वाहन चलाएं। धार जैसी घटनाएं हमें चेतावनी देती हैं कि अगर हमने अभी भी नहीं संभले, तो ऐसे हादसे आगे भी होते रहेंगे। जरूरत है सख्त नियमों के साथ-साथ मजबूत इरादों की, ताकि हम एक सुरक्षित और जिम्मेदार यातायात व्यवस्था बना सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177671/increasing-road-accidents-in-india</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177671/increasing-road-accidents-in-india</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:20:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/4nq5nhkbfmcilqk31cddfdp18pky2hzib9cukjj3.jpg"                         length="88731"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आज़ाद भारत का सर्वाधिक मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के चौथे सबसे बड़े राज्य पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान सम्पन्न होने के साथ ही पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों पर अब सबकी निगाहें चार मई को होने वाली मतगणना पर टिक गई हैं। बिहार से शुरू हुए मतदाता सूची के शुद्धिकरण (पुनरीक्षण) के बाद वहां हुई बंपर वोटिंग ने मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि का संकेत दिया था। इसी क्रम में चुनाव आयोग ने विपक्ष के विरोध के बावजूद सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177669/highest-voter-turnout-of-independent-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(2)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के चौथे सबसे बड़े राज्य पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान सम्पन्न होने के साथ ही पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों पर अब सबकी निगाहें चार मई को होने वाली मतगणना पर टिक गई हैं। बिहार से शुरू हुए मतदाता सूची के शुद्धिकरण (पुनरीक्षण) के बाद वहां हुई बंपर वोटिंग ने मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि का संकेत दिया था। इसी क्रम में चुनाव आयोग ने विपक्ष के विरोध के बावजूद सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनाव से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया। इस प्रक्रिया में हजारों-लाखों मतदाता आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत न कर पाने के कारण सूची से बाहर हुए। इसके बावजूद इन पांचों राज्यों में रिकॉर्ड मतदान हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो लोकतांत्रिक चेतना और नागरिक सहभागिता का मजबूत संकेत है। यह स्थिति राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ाने वाली है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल में इस बार लगभग </span>92 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत मतदान दर्ज होना अपने आप में ऐतिहासिक है। यह न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस जनादेश का सेहरा किसके सिर बंधता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्रता के बाद से पश्चिम बंगाल में कभी भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं बनी। यहां कांग्रेस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वामपंथी दलों और पिछले डेढ़ दशक से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। इस बार का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके परिणाम राज्य ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि भाजपा इस चुनाव में सफलता प्राप्त करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह उसके लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी और विपक्षी दलों के लिए बड़ा झटका। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता में लौटती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की सबसे मजबूत नेता के रूप में उभर सकती हैं। यह भी विचारणीय है कि बढ़ता मतदान प्रतिशत कहीं न कहीं मतदाताओं के बढ़ते विश्वास और लोकतंत्र में उनकी आस्था को दर्शाता है। चाहे इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक छवि और नेतृत्व का प्रभाव हो या स्थानीय मुद्दों की भूमिका एक बात स्पष्ट है कि देश का मतदाता अब पहले से अधिक जागरूक और सक्रिय हो चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">                                                                                                                                  <strong><span lang="hi" xml:lang="hi">                                   अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177669/highest-voter-turnout-of-independent-india</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177669/highest-voter-turnout-of-independent-india</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:16:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/images-%282%298.jpg"                         length="90318"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पांच राज्यों के चुनाव परिणाम को लेकर देशभर में बढ़ती उत्सुकता और राजनीतिक भविष्य की दिशा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के बाद अब पूरे देश की नजर आने वाले परिणामों पर टिकी हुई है। मतदान समाप्त होने के साथ ही विभिन्न एजेंसियों द्वारा जारी किए गए एग्जिट पोल ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है ।हर गली हर शहर और हर राजनीतिक मंच पर यही चर्चा है कि आखिर किसकी सरकार बनेगी और कौन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठेगा ।हालांकि यह भी सच है कि एग्जिट पोल केवल अनुमान होते हैं और कई बार ये वास्तविक परिणामों से काफी अलग साबित हुए हैं। इसलिए अंतिम फैसला तो मतगणना</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177667/there-is-increasing-curiosity-across-the-country-regarding-the-election"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20250331-wa0163.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के बाद अब पूरे देश की नजर आने वाले परिणामों पर टिकी हुई है। मतदान समाप्त होने के साथ ही विभिन्न एजेंसियों द्वारा जारी किए गए एग्जिट पोल ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है ।हर गली हर शहर और हर राजनीतिक मंच पर यही चर्चा है कि आखिर किसकी सरकार बनेगी और कौन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठेगा ।हालांकि यह भी सच है कि एग्जिट पोल केवल अनुमान होते हैं और कई बार ये वास्तविक परिणामों से काफी अलग साबित हुए हैं। इसलिए अंतिम फैसला तो मतगणना के दिन ही होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन चुनावों में असम केरल पश्चिम बंगाल तमिलनाडु और पुदुचेरी जैसे राज्यों की राजनीति दांव पर लगी हुई है ।हर राज्य का राजनीतिक परिदृश्य अलग है और वहां की जनता के मुद्दे भी भिन्न हैं। ऐसे में इन चुनावों के परिणाम केवल सरकारों का गठन ही तय नहीं करेंगे बल्कि यह देश की व्यापक राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित करेंगे। असम में एग्जिट पोल के अनुसार सत्तारूढ़ दल को बढ़त मिलती दिख रही है और लगातार तीसरी बार सरकार बनने की संभावना जताई जा रही है यदि ऐसा होता है तो यह राज्य की राजनीति में स्थिरता का संकेत होगा वहीं विपक्ष के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी कि वह अपनी रणनीति को पुनः परिभाषित करे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केरल में स्थिति कुछ अलग नजर आती है यहां एग्जिट पोल में सत्ता परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो यह राज्य की पारंपरिक राजनीतिक प्रवृत्ति के अनुरूप होगा जहां जनता समय समय पर सरकार बदलती रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि मतदाता अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं और वे प्रदर्शन के आधार पर निर्णय लेते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल का चुनाव इस बार सबसे अधिक चर्चा में रहा है। यहां मुकाबला बेहद कड़ा बताया जा रहा है ।एग्जिट पोल के अनुसार दोनों प्रमुख दलों के बीच कांटे की टक्कर है कुछ अनुमानों में एक पक्ष को बढ़त दिखाई गई है तो कुछ में दूसरे को यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण काफी गहरा है और मतदाताओं ने सोच समझकर मतदान किया है। तमिलनाडु में एग्जिट पोल के अनुसार वर्तमान सरकार की वापसी की संभावना जताई गई है यदि ऐसा होता है तो यह वहां की जनता द्वारा स्थिरता और निरंतरता को प्राथमिकता देने का संकेत होगा। साथ ही यह भी दर्शाता है कि राज्य में क्षेत्रीय दलों की पकड़ अभी भी मजबूत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुदुचेरी में भी राजनीतिक समीकरण दिलचस्प बने हुए हैं। यहां एग्जिट पोल में मौजूदा गठबंधन को बढ़त मिलती दिख रही है हालांकि छोटे राज्यों में अक्सर परिणाम अप्रत्याशित भी हो सकते हैं इसलिए यहां भी अंतिम नतीजों का इंतजार करना जरूरी है। एग्जिट पोल को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इनका इतिहास पूरी तरह विश्वसनीय नहीं रहा है कई बार ये वास्तविक परिणामों के काफी करीब रहे हैं लेकिन कई बार पूरी तरह गलत भी साबित हुए हैं। उदाहरण के तौर पर पहले भी कई चुनावों में एग्जिट पोल ने एक पक्ष की जीत का दावा किया लेकिन परिणाम ठीक इसके उलट आए ,इससे यह स्पष्ट होता है कि मतदाताओं का अंतिम निर्णय अक्सर अनुमान से परे होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देशभर में इन चुनावों को लेकर उत्साह का माहौल है ।चाय की दुकानों से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह लोग अपने अपने अनुमान लगा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक विभिन्न आंकड़ों और रुझानों के आधार पर भविष्यवाणी कर रहे हैं। वहीं आम जनता भी इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में गहरी रुचि दिखा रही है। इन चुनावों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसमें महिलाओं और युवाओं की भागीदारी काफी अधिक रही है। कई स्थानों पर महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक दर्ज की गई है यह लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि समाज के सभी वर्ग अपनी भूमिका निभा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा इन चुनावों में स्थानीय मुद्दों के साथ साथ राष्ट्रीय मुद्दों का भी प्रभाव देखा गया है ।विकास ,रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे विषय मतदाताओं के निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते नजर आए हैं। राजनीतिक दलों ने भी अपने अपने घोषणापत्र में इन मुद्दों को प्रमुखता दी है। चुनाव परिणाम केवल सरकार गठन तक सीमित नहीं होते बल्कि यह आने वाले समय की नीतियों और योजनाओं को भी प्रभावित करते हैं ,इसलिए इन परिणामों का महत्व और भी बढ़ जाता है ।यह तय करेंगे कि किस दिशा में विकास की नीतियां आगे बढ़ेंगी और जनता की अपेक्षाओं को किस प्रकार पूरा किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि यह भी जरूरी है कि हम एग्जिट पोल को अंतिम सत्य न मानें यह केवल एक संकेत हैं न कि निष्कर्ष वास्तविक परिणाम ही यह तय करेंगे कि जनता ने किसे अपना समर्थन दिया है ।इसलिए धैर्य बनाए रखना और आधिकारिक नतीजों का इंतजार करना ही उचित होगा।</div>
<div style="text-align:justify;">अंत में यह कहा जा सकता है कि पांच राज्यों के ये चुनाव देश के लोकतांत्रिक ढांचे की मजबूती को दर्शाते हैं। मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता इस बात का प्रमाण है कि लोकतंत्र केवल एक व्यवस्था नहीं बल्कि एक जीवंत परंपरा है।</div>
<div style="text-align:justify;">अब सभी की नजरें मतगणना के दिन पर टिकी हुई हैं जब यह स्पष्ट हो जाएगा कि किसकी सरकार बनेगी और कौन मुख्यमंत्री बनेगा तब तक अटकलों और चर्चाओं का दौर जारी रहेगा लेकिन अंतिम निर्णय जनता के मतों के आधार पर ही होगा और यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है।</div>
<div style="text-align:justify;">          *कान्तिलाल मांडोत*</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177667/there-is-increasing-curiosity-across-the-country-regarding-the-election</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177667/there-is-increasing-curiosity-across-the-country-regarding-the-election</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:12:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img-20250331-wa0163.jpg"                         length="154899"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाल श्रम की व्यथा और कठोर श्रम करते हाथ मूल सुविधाओं से वंचित</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 1 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस केवल श्रमिकों के सम्मान का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उन असंख्य अदृश्य हाथों की पीड़ा को भी सामने लाता है जो आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं। भारत जैसे विकासशील देश में यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यहाँ श्रम के साथ-साथ बाल श्रम की समस्या भी एक गहरी सामाजिक विडंबना के रूप में उपस्थित है।</p>
<p style="text-align:justify;">संविधान और कानूनों के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से खतरनाक उद्योगों, कारखानों, होटलों, ढाबों या अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों में कार्य कराना अपराध</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177665/the-pain-of-child-labor-and-hard-labor-deprived-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/international-labour-day_-_loom_solar_600x.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 1 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस केवल श्रमिकों के सम्मान का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उन असंख्य अदृश्य हाथों की पीड़ा को भी सामने लाता है जो आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं। भारत जैसे विकासशील देश में यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यहाँ श्रम के साथ-साथ बाल श्रम की समस्या भी एक गहरी सामाजिक विडंबना के रूप में उपस्थित है।</p>
<p style="text-align:justify;">संविधान और कानूनों के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से खतरनाक उद्योगों, कारखानों, होटलों, ढाबों या अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों में कार्य कराना अपराध है। इसके बावजूद वास्तविकता यह है कि देश के छोटे-बड़े शहरों, कस्बों और गांवों में लाखों बच्चे आज भी श्रम के बोझ तले दबे हुए हैं। वे कभी चाय की दुकानों पर काम करते दिखते हैं, कभी पटाखा उद्योगों में, तो कभी कचरा बीनते या भीख मांगते हुए। यह केवल आर्थिक शोषण नहीं, बल्कि उनके बचपन, शिक्षा और भविष्य का भी हनन है।<br />बाल श्रम की जड़ें गहरी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> गरीबी, भुखमरी, कुपोषण, बेरोजगारी, अशिक्षा और सामाजिक जागरूकता का अभाव इसके प्रमुख कारण हैं। कई परिवारों में आर्थिक मजबूरी इतनी तीव्र होती है कि वे स्वयं अपने बच्चों को श्रम के दलदल में धकेल देते हैं। इसके अतिरिक्त अभिभावकों की असामयिक मृत्यु, बीमारी या परिवार में अधिक सदस्यों का होना भी बच्चों को समय से पहले जिम्मेदारियों के बोझ तले ला देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाल श्रमिकों का शोषण बहुआयामी होता है शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक। उन्हें वयस्क श्रमिकों की तुलना में बहुत कम पारिश्रमिक दिया जाता है, जिससे नियोजकों के लिए वे सस्ते और सुविधाजनक श्रम का स्रोत बन जाते हैं। यही कारण है कि बाल श्रम की प्रवृत्ति समाप्त होने के बजाय कई स्थानों पर बढ़ती दिखाई देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार ने कई महत्वपूर्ण कानून और योजनाएँ लागू की हैं, जैसे बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, तथा राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना। इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा पोषण, शिक्षा और बाल संरक्षण से जुड़ी अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन और यूनिसेफ जैसे संगठन बाल श्रम उन्मूलन के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन के कन्वेंशन 138 और 182 विशेष रूप से बाल श्रम के उन्मूलन और खतरनाक कार्यों से बच्चों को मुक्त कराने पर केंद्रित हैं। फिर भी, समस्या का समाधान केवल कानून बनाने से नहीं होगा, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन से ही संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्भाग्यवश, कई बार इन कानूनों का पालन कराने वाली एजेंसियाँ भ्रष्टाचार, लापरवाही और लालफीताशाही की शिकार हो जाती हैं। परिणामस्वरूप, नियोजक आसानी से बच निकलते हैं और बच्चे शोषण की आग में झोंक दिए जाते हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि बाल श्रम केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक और नैतिक प्रश्न भी है। जब तक समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता नहीं बढ़ेगी, जब तक हम बच्चों को श्रम नहीं बल्कि शिक्षा और संस्कार का अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं होंगे, तब तक यह समस्या बनी रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मजदूर वर्ग की व्यापक स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिक आज भी न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षित कार्यस्थल जैसे मूल अधिकारों से वंचित हैं। प्रवासी मजदूरों की स्थिति, विशेषकर महामारी के समय, ने इस सच्चाई को उजागर कर दिया कि श्रमिक वर्ग हमारे विकास का आधार होने के बावजूद सबसे अधिक उपेक्षित है। आज आवश्यकता इस बात की है कि बाल श्रम और श्रमिक शोषण के विरुद्ध एक समन्वित और सख्त नीति अपनाई जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए कानूनों का कठोर और पारदर्शी क्रियान्वयन,शिक्षा और पोषण योजनाओं का प्रभावी विस्तार, गरीब परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा, और समाज में जागरूकता का प्रसार अत्यंत आवश्यक है। यदि हम सचमुच एक सशक्त और विकसित राष्ट्र का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें अपने बच्चों को श्रम की बेड़ियों से मुक्त कर शिक्षा और अवसरों की मुख्यधारा में लाना होगा। अन्यथा, आज का यह बाल श्रमिक कल का कमजोर नागरिक बनेगा, और एक सुदृढ़ राष्ट्र का सपना अधूरा ही रह जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177665/the-pain-of-child-labor-and-hard-labor-deprived-of</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177665/the-pain-of-child-labor-and-hard-labor-deprived-of</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:08:14 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/international-labour-day_-_loom_solar_600x.webp"                         length="28518"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कंकाल से उपजते व्यवस्था पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>महेन्द्र तिवारी </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ओडिशा के क्योंझर जिले से आई कंकाल ढोने की खबर ने देश की सामूहिक चेतना को इस कदर झकझोर दिया कि उसने आधुनिक भारत के विकास और डिजिटल साक्षरता के दावों पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए। यह घटना केवल एक व्यक्ति के निजी दुख या उसकी अज्ञानता की कहानी नहीं है बल्कि यह उस अमानवीय स्थिति का जीवंत चित्रण है जहाँ एक निर्धन और असहाय नागरिक को अपनी मृत बहन के कंकाल को लेकर बैंक की दहलीज तक जाना पड़ा। 19402 रुपये की एक ऐसी राशि जो किसी संपन्न व्यक्ति के लिए बहुत मामूली हो सकती</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177663/questions-on-the-system-arising-from-the-skeleton"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)14.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>महेन्द्र तिवारी </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ओडिशा के क्योंझर जिले से आई कंकाल ढोने की खबर ने देश की सामूहिक चेतना को इस कदर झकझोर दिया कि उसने आधुनिक भारत के विकास और डिजिटल साक्षरता के दावों पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए। यह घटना केवल एक व्यक्ति के निजी दुख या उसकी अज्ञानता की कहानी नहीं है बल्कि यह उस अमानवीय स्थिति का जीवंत चित्रण है जहाँ एक निर्धन और असहाय नागरिक को अपनी मृत बहन के कंकाल को लेकर बैंक की दहलीज तक जाना पड़ा। 19402 रुपये की एक ऐसी राशि जो किसी संपन्न व्यक्ति के लिए बहुत मामूली हो सकती है पर एक गरीब के लिए वह उसके जीवन भर की संचित पूंजी थी। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस छोटी सी राशि को प्राप्त करने के लिए एक भाई का यह भयावह कदम समाज की संवेदनहीनता और हमारे प्रशासनिक ढांचे की चरम विफलता का एक ऐसा प्रमाण है जिसे इतिहास कभी भुला नहीं पाएगा। यह घटना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि जब सरकारी नियम और कानून मानवीय संवेदनाओं से ऊपर हो जाते हैं तो व्यवस्था किस प्रकार एक नागरिक को अपमानित और लाचार बना देती है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बहन की मृत्यु के लगभग 2 महीने बीत जाने के बाद भी जब वह व्यक्ति अपनी छोटी सी जमा राशि को प्राप्त करने के लिए दर-दर भटकता रहा तो उसकी गहरी हताशा ने उसे इस मार्ग को चुनने पर विवश कर दिया। वह व्यक्ति लगभग 3 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करते हुए उस कंकाल को कंधे पर लादकर बैंक तक पहुंचा ताकि वह वहां बैठे अधिकारियों को यह अंतिम और अकाट्य प्रमाण दे सके कि उसकी बहन अब वास्तव में इस दुनिया में नहीं है। इस दृश्य ने न केवल वहां उपस्थित लोगों को स्तब्ध कर दिया बल्कि इसने पूरे देश के प्रशासनिक और बैंकिंग तंत्र की खामियों को भी सार्वजनिक रूप से नग्न कर दिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस घटना की पृष्ठभूमि में यदि हम गहराई से उतरें तो यह स्पष्ट होता है कि भारत में एक मृत्यु प्रमाण पत्र केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है बल्कि यह एक ऐसा कानूनी दस्तावेज है जिसके बिना व्यक्ति का अस्तित्व समाप्त होने के बाद भी उसकी संपत्तियां और अधिकार एक कानूनी जाल में फंसे रहते हैं। भारत के नियमों के अनुसार किसी भी व्यक्ति की मृत्यु का पंजीकरण 21 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य होता है। यह अवधि बीत जाने के बाद प्रक्रिया और भी जटिल हो जाती है जिसमें शपथ पत्र और विभिन्न स्तरों पर सत्यापन की आवश्यकता होती है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">क्योंझर के उस आदिवासी व्यक्ति के पास न तो शिक्षा थी और न ही उसे इन जटिल कानूनी प्रक्रियाओं का कोई ज्ञान था। उसके लिए उसकी बहन की मृत्यु एक अपूरणीय क्षति थी लेकिन व्यवस्था के लिए वह केवल एक आंकड़ा भर थी जिसके लिए दस्तावेजों की पूर्ति अनिवार्य थी। जब वह व्यक्ति पहली बार बैंक गया होगा तो शायद उसे नियमों का हवाला देकर लौटा दिया गया होगा। उसके पास मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं था और न ही वह कानूनी उत्तराधिकारी होने का कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत कर पा रहा था। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यहाँ बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता के तर्क तो सही हो सकते हैं लेकिन जिस संवेदनशीलता के साथ ऐसे मामलों का निपटारा किया जाना चाहिए था उसका वहां पूर्ण अभाव दिखा। बैंक अधिकारियों का यह कहना कि उन्होंने केवल कानूनी दस्तावेजों की मांग की थी और कभी भी मृत शरीर की उपस्थिति नहीं मांगी थी तकनीकी रूप से सही हो सकता है लेकिन एक अशिक्षित व्यक्ति की दृष्टि से यह उसकी असफलता और निराशा का अंत था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह त्रासदी तीन मुख्य स्तरों पर हुई विफलता का परिणाम है। पहला स्तर प्रशासनिक है जहाँ स्थानीय प्रशासन और पंचायत स्तर पर उस व्यक्ति को कोई सहयोग प्राप्त नहीं हुआ। यदि स्थानीय प्रशासन ने समय पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में उसकी सहायता की होती या उसे सही दिशा दिखाई होती तो शायद उसे इस अपमानजनक स्थिति से नहीं गुजरना पड़ता। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दूसरा स्तर जागरूकता की कमी है जो हमारे देश के सुदूर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में आज भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। सरकारें भले ही डिजिटल इंडिया का नारा देती हों लेकिन धरातल पर आज भी एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिसे यह नहीं पता कि एक सामान्य प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया क्या है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण स्तर संस्थागत संवेदनशीलता का है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बैंक जैसे वित्तीय संस्थानों में नियम अत्यंत कठोर होते हैं क्योंकि वहां धन की सुरक्षा का प्रश्न होता है। लेकिन क्या नियमों की इस कठोरता में मानवीय विवेक के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए? जब एक व्यक्ति बार-बार आकर अपनी विवशता बता रहा था तो क्या बैंक प्रबंधक या स्थानीय अधिकारी किसी वैकल्पिक सत्यापन की प्रक्रिया को नहीं अपना सकते थे?</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस पूरी घटना का सबसे विडंबनापूर्ण पहलू यह है कि जिस प्रशासनिक तंत्र ने उस व्यक्ति को महीनों तक चक्कर कटवाए उसी तंत्र ने इस घटना के तूल पकड़ते ही मात्र कुछ घंटों के भीतर सारे दस्तावेज तैयार कर दिए। जैसे ही यह मामला समाचारों की सुर्खियों में आया और उच्च अधिकारियों तक पहुंचा तो उसी दिन मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यहाँ तक कि बैंक ने भी तुरंत 19402 रुपये की राशि संबंधित वारिसों को हस्तांतरित कर दी। यह गतिशीलता इस बात का प्रमाण है कि हमारी व्यवस्था अक्षम नहीं है बल्कि वह उदासीन है। जब तक कोई मामला राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का कारण नहीं बनता तब तक फाइलों के पहिए नहीं घूमते। यदि यही सक्रियता दो महीने पहले दिखाई गई होती तो उस व्यक्ति को अपनी बहन के अवशेषों के साथ 3 किलोमीटर तक पैदल चलकर समाज को अपनी विवशता का यह भयावह प्रदर्शन नहीं करना पड़ता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस मामले में कानूनी उत्तराधिकार का प्रश्न भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। कानून के अनुसार उत्तराधिकार की श्रेणियां निर्धारित होती हैं और अक्सर भाई या अन्य रिश्तेदारों को प्रथम श्रेणी का वारिस नहीं माना जाता जब तक कि कुछ विशिष्ट परिस्थितियां न हों। यह कानूनी बारीकियां एक आम आदमी की समझ से परे होती हैं। वह व्यक्ति केवल इतना जानता था कि उसकी बहन का पैसा बैंक में है और उसे उसकी आवश्यकता है। समाज में मौजूद आर्थिक असमानता यहाँ एक और बड़ा कारक बनकर उभरती है। एक निर्धन व्यक्ति के लिए कानूनी प्रक्रिया की लागत और समय दोनों ही उसकी क्षमता से बाहर होते हैं। वह वकील नहीं कर सकता और न ही वह कचहरी के चक्कर काटने के लिए अपनी मजदूरी छोड़ सकता है। ऐसे में उसके पास केवल निराशा ही शेष रह जाती है।</div><div style="text-align:justify;">यह घटना हमें यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि क्या हमारी बैंकिंग और सरकारी प्रणालियाँ केवल साक्षर और शहरी जनसंख्या को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं? ग्रामीण भारत की वास्तविकताएं शहरों से बिल्कुल अलग हैं। वहाँ पहचान के संकट से लेकर भाषा और प्रक्रियागत बाधाएं कदम-कदम पर खड़ी होती हैं। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं हुईं और जांच के आदेश भी दिए गए लेकिन वास्तविक प्रश्न यह है कि क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई बुनियादी बदलाव किए जाएंगे? केवल जांच करना या किसी कर्मचारी को निलंबित कर देना इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। समाधान तब होगा जब हमारी व्यवस्था प्रत्येक नागरिक को एक संख्या के बजाय एक इंसान के रूप में देखना शुरू करेगी।</div><div style="text-align:justify;">अंत में यह कहना उचित होगा कि क्योंझर की यह घटना एक व्यक्ति की अज्ञानता से कहीं अधिक एक पूरे तंत्र की सामूहिक हार है। यह हमें यह सबक देती है कि नियम समाज की सुविधा के लिए होने चाहिए न कि समाज को प्रताड़ित करने के लिए। 19402 रुपये की उस राशि ने उस दिन केवल एक खाते का निपटारा नहीं किया बल्कि उसने हमारे आधुनिक समाज के चेहरे पर एक ऐसा दाग लगा दिया जो लंबे समय तक हमें हमारी जिम्मेदारियों की याद दिलाता रहेगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> विकास का अर्थ केवल ऊंची इमारतें या तेज इंटरनेट नहीं है बल्कि विकास का असली अर्थ तब है जब समाज का सबसे अंतिम व्यक्ति भी सम्मान के साथ अपना अधिकार प्राप्त कर सके और उसे अपनी सच्चाई साबित करने के लिए किसी कंकाल का सहारा न लेना पड़े। जब तक संवेदनशीलता को प्रशासन का अनिवार्य अंग नहीं बनाया जाएगा तब तक ऐसी हृदयविदारक घटनाएं व्यवस्था की पोल खोलती रहेंगी और हम केवल मूकदर्शक बनकर रह जाएंगे। हमें एक ऐसी प्रणाली की आवश्यकता है जहाँ नियम मानवीय गरिमा के साथ सामंजस्य बिठा सकें ताकि कोई भी व्यक्ति स्वयं को इतना अकेला और लाचार महसूस न करे कि उसे अपनी मर्यादा और मृत अपनों के सम्मान को दांव पर लगाना पड़े।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177663/questions-on-the-system-arising-from-the-skeleton</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177663/questions-on-the-system-arising-from-the-skeleton</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:03:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/images-%281%2914.jpg"                         length="61405"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किन्नरपट्टी बाजार में बैंक ऑफ महाराष्ट्र ग्राहक सेवा केंद्र का उद्घाटन, ग्राम प्रधान नथुनी चौहान रहे मुख्य अतिथि</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रमोद रौनियार</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर</strong>। पडरौना जटहां बाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत किन्नर पट्टी बाजार में शुक्रवार को बैंक ऑफ महाराष्ट्र के ग्राहक सेवा केंद्र का उद्घाटन राष्ट्रीय चौहान एकता मंच के जिलाध्यक्ष एवं ग्राम प्रधान गोबरी उर्फ नथुनी चौहान द्वारा किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><span style="text-align:left;">उद्घाटन अवसर पर ग्राम प्रधान ने कहा कि इस ग्राहक सेवा केंद्र के खुलने से क्षेत्र के लोगों को बैंकिंग सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होंगी और उन्हें दूर-दराज के बैंकों में जाने की परेशानी से राहत मिलेगी। </span><span style="text-align:left;">इस दौरान ग्राहक सेवा केंद्र संचालक रंजीत चौहान, समाजसेवी विकास चौहान सहित विनय, संजय तिवारी, चंद्रभान चौहान, रंगलाल चौहान, अवधेश चौहान,</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177660/village-head-nathuni-chauhan-was-the-chief-guest-to-inaugurate"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/inshot_20260430_142828262.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रमोद रौनियार</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर</strong>। पडरौना जटहां बाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत किन्नर पट्टी बाजार में शुक्रवार को बैंक ऑफ महाराष्ट्र के ग्राहक सेवा केंद्र का उद्घाटन राष्ट्रीय चौहान एकता मंच के जिलाध्यक्ष एवं ग्राम प्रधान गोबरी उर्फ नथुनी चौहान द्वारा किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><span style="text-align:left;">उद्घाटन अवसर पर ग्राम प्रधान ने कहा कि इस ग्राहक सेवा केंद्र के खुलने से क्षेत्र के लोगों को बैंकिंग सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होंगी और उन्हें दूर-दराज के बैंकों में जाने की परेशानी से राहत मिलेगी। </span><span style="text-align:left;">इस दौरान ग्राहक सेवा केंद्र संचालक रंजीत चौहान, समाजसेवी विकास चौहान सहित विनय, संजय तिवारी, चंद्रभान चौहान, रंगलाल चौहान, अवधेश चौहान, नरेश चौहान, राधेश्याम चौहान, बाबूनंदन कुशवाहा, अरविंद कुशवाहा, रामनारायण चौहान, आरपीएन यादव, विनय यादव, अरुण पाल, सोनू यादव, प्रदीप चौहान, धीरज चौहान, रविकिशन साहनी, गोपाल चौहान, स्वामीनाथ चौहान, जयक्षी चौहान, रघुनाथ चौहान, शकिल अंसारी, राजन यादव, अनूप बर्नवाल, तृलोकी यादव सहित क्षेत्र के अनेक सम्मानित नागरिक उपस्थित रहे। </span><span style="text-align:left;">कार्यक्रम के अंत में सभी ने केंद्र के सफल संचालन और क्षेत्र के विकास की कामना की।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177660/village-head-nathuni-chauhan-was-the-chief-guest-to-inaugurate</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177660/village-head-nathuni-chauhan-was-the-chief-guest-to-inaugurate</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:34:30 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/inshot_20260430_142828262.jpg"                         length="602452"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>घर के छप्पर में लगे बांस के सहारे फंदा लगाकर युवक ने दी जान</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> जिले के खेसरहा थाना क्षेत्र के बदुरगहना गांव में बुधवार की सुबह एक युवक ने फंदे से लटककर अपनी जान दे दी। </div><div style="text-align:justify;">    जानकारी के अनुसार, बलिराम (40 वर्ष) पुत्र शिवचरन ने सुबह  अपने घर के छप्पर में लगे बांस के सहारे फंदा लगाकर आत्महत्या की। </div><div style="text-align:justify;">  घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में शोक छा गया। मृतक की पत्नी आरती, माता-पिता और अन्य परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। बलिराम अपने पीछे तीन  बच्चों  भोला, कृष्णनाथ और बेटी उर्मिला को छोड़ गया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">परिजनों के अनुसार, बलिराम कुछ समय से मानसिक रूप से अस्वस्थ था और उसका इलाज</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177650/the-young-man-committed-suicide-by-hanging-himself-with-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20250331-wa0163.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> जिले के खेसरहा थाना क्षेत्र के बदुरगहना गांव में बुधवार की सुबह एक युवक ने फंदे से लटककर अपनी जान दे दी। </div><div style="text-align:justify;">  जानकारी के अनुसार, बलिराम (40 वर्ष) पुत्र शिवचरन ने सुबह  अपने घर के छप्पर में लगे बांस के सहारे फंदा लगाकर आत्महत्या की। </div><div style="text-align:justify;"> घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में शोक छा गया। मृतक की पत्नी आरती, माता-पिता और अन्य परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। बलिराम अपने पीछे तीन  बच्चों  भोला, कृष्णनाथ और बेटी उर्मिला को छोड़ गया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">परिजनों के अनुसार, बलिराम कुछ समय से मानसिक रूप से अस्वस्थ था और उसका इलाज चल रहा था। आशंका जताई जा रही है कि इसी मानसिक परेशानी के चलते उसने यह कदम उठाया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सूचना पर खेसरहा पुलिस मौके पर पहुंच कर आवश्यक जांच-पड़ताल की। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस मामले में थानाध्यक्ष अनूप कुमार मिश्रा ने बताया कि परिजन पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते थे, जिसके चलते कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="WhmR8e"></div></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177650/the-young-man-committed-suicide-by-hanging-himself-with-the</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177650/the-young-man-committed-suicide-by-hanging-himself-with-the</guid>
                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 23:01:00 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img-20250331-wa0163.jpg"                         length="154899"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थनगर में  पुलिया के पास मिला युवक का शव, हत्या की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सदर थाना क्षेत्र के कोइलहरा गांव के नाला के पास पुलिया के नीचे  संदिग्ध परिस्थितियों में एक युवक का शव मिला है । जिसकी पहचान ग्राम जगदीशपुर राजा के टोला लोधपुरवा  निवासी जसवंत लोधी ( 30 ) पुत्र शिवकुमार लोधी के रूप में हुई है। जिसका सिर पानी में आंशिक रूप से डूबा हुआ था और शरीर किनारे की ओर पड़ा था।  जो मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे और अपनी पत्नी व दो छोटे बच्चों के साथ अलग रहकर जीवनयापन कर रहे थे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">परिजनों के अनुसार, जसवंत मंगलवार की शाम घर से बाजार कुछ सामान लेने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177648/dead-body-of-youth-found-near-culvert-in-siddharthnagar-suspicion"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20250331-wa0163.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सदर थाना क्षेत्र के कोइलहरा गांव के नाला के पास पुलिया के नीचे  संदिग्ध परिस्थितियों में एक युवक का शव मिला है । जिसकी पहचान ग्राम जगदीशपुर राजा के टोला लोधपुरवा  निवासी जसवंत लोधी ( 30 ) पुत्र शिवकुमार लोधी के रूप में हुई है। जिसका सिर पानी में आंशिक रूप से डूबा हुआ था और शरीर किनारे की ओर पड़ा था।  जो मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे और अपनी पत्नी व दो छोटे बच्चों के साथ अलग रहकर जीवनयापन कर रहे थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिजनों के अनुसार, जसवंत मंगलवार की शाम घर से बाजार कुछ सामान लेने के लिए निकले थे, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटे, जिसके बाद परिवार के लोगों ने आसपास काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका।सुबह गांव के एक व्यक्ति द्वारा पुलिया के पास शव पड़े होने की सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे, जहां उनका शव देखकर परिवार में कोहराम मच गया। तस्वीरों और मौके के हालात से यह प्रतीत होता है कि युवक की बेरहमी से हत्या की गई है, क्योंकि उसके मुंह से खून निकलने के निशान दिखाई दिए और शव की स्थिति भी संदिग्ध रही। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मामले में प्रभारी निरीक्षक  मुकेश कुमार राय का कहना है कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा, जिसके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177648/dead-body-of-youth-found-near-culvert-in-siddharthnagar-suspicion</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177648/dead-body-of-youth-found-near-culvert-in-siddharthnagar-suspicion</guid>
                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 22:59:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img-20250331-wa0163.jpg"                         length="154899"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दबंग स्टूडियो संचालक के हनक के सामने बेबस है गोपीगंज थाने कि पुलिस</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong>  गोपीगंज के दबंग स्टूडियो संचालक के हनक के सामने बेबस हुई गोपीगंज थाने कि पुलिस ,पत्रकार के साथ मारपीट कर मोबाईल छीनने वाले के ऊपर 48 घंटे बीत जाने के बाद भी दर्ज नहीं हुआ मुकदमा जानकारी के मुताबिक बताते चले कि  बीते दिन कल गोपीगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत फाटक वाली गली  से पीड़ित पत्रकार सरस राजपूत अपने बड़े भाई को दवा दिलाकर वापस घर लौट रहे थे। इसी दौरान फाटक वाली गली के पास कथित रूप से मनबढ़ स्टूडियो संचालक शुभम पाठक अपने तीन अज्ञात साथियों के साथ  बीच सड़क पर खड़े होकर हुल्लड़ बाजी करते</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वही</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177646/the-police-of-gopiganj-police-station-is-helpless-in-front"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img_20260211_191811.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> गोपीगंज के दबंग स्टूडियो संचालक के हनक के सामने बेबस हुई गोपीगंज थाने कि पुलिस ,पत्रकार के साथ मारपीट कर मोबाईल छीनने वाले के ऊपर 48 घंटे बीत जाने के बाद भी दर्ज नहीं हुआ मुकदमा जानकारी के मुताबिक बताते चले कि  बीते दिन कल गोपीगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत फाटक वाली गली  से पीड़ित पत्रकार सरस राजपूत अपने बड़े भाई को दवा दिलाकर वापस घर लौट रहे थे। इसी दौरान फाटक वाली गली के पास कथित रूप से मनबढ़ स्टूडियो संचालक शुभम पाठक अपने तीन अज्ञात साथियों के साथ  बीच सड़क पर खड़े होकर हुल्लड़ बाजी करते हुए रास्ता रोक कर  पत्रकार सरस राजपूत व  उनके पत्रकार भाई के साथ मारपीट करते हुए मोबाईल फोन भी छीन लिया  था</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वही मारपीट के दरमियान पत्रकार के हाथ और आंख में काफी गंभीर चोट आई थी लेकिन गोपीगंज थाने कि पुलिस पत्रकारों का मेडिकल उपचार कराने के बजाय उनको मारपीट  के मामले में जॉच के लिए तीन से चार घंटे तक थाने से  चौकी और चौकी से थाने के चक्कर लगवाए गए लेकिन ना तो पत्रकारों का पुलिस के द्वारा मेडिकल कराया गया ना ही उनकी प्राथमिकी दर्ज कि गई अभी तक 48 घंटे बीत जाने के बाद भी गोपीगंज थाने कि पुलिस दबंग स्टूडियो संचालक शुभम पाठक के हनक के सामने बेबस नजर आ रही है अब सवाल यह उठता है आखिर क्या गोपीगंज पुलिस पत्रकारों के हत्या होने का इंतजार कर रही  है  वही कुछ समाजसेवियों का कहना है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कि जो दबंग स्टूडियो संचालक शुभम पाठक भरे बाजार में पत्रकारों के साथ मारपीट करते हुए उनका मोबाईल छीन सकता है  वह कुछ भी कर सकता है और  तो और 48 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस अभी तक मुकदमा दर्ज करके दबंग स्टूडियो संचालक शुभम पाठक को गिरफ्तार नहीं कर पा रही जबकि गोपीगंज पुलिस को पता है कि शुभम पाठक का स्टूडियो कहां है और वह कहां मिलेगा फिर भी,वही पत्रकार संगठनों ने घटना की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है यदि कार्यवाही नहीं हुई तो पत्रकार संगठन  आंदोलन के लिए बाध्य होगी। क्योंकि भदोही जिले में भी अब पत्रकारों वीके साथ मारपीट के अनेक मामले हो चुके जिससे इन घटनाओं ने प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177646/the-police-of-gopiganj-police-station-is-helpless-in-front</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177646/the-police-of-gopiganj-police-station-is-helpless-in-front</guid>
                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 22:58:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img_20260211_191811.jpg"                         length="65865"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        