<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/author/5/swatantra-prabhat-reporters" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Swatantra Prabhat UP - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/author/5/rss</link>
                <description>Swatantra Prabhat UP RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कुशीनगर: रेलवे लाइन में आने वाले पेड़ों का सर्वे पूरा, किसानों के मुआवजे की राह हुई आसान!</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर। </strong>छितौनी–तमकुही रोड स्वीकृत रेल लाइन परियोजना के तहत अधिग्रहित भूमि पर खड़े वृक्षों का शुक्रवार को रेलवे विभाग और वन विभाग की संयुक्त टीम द्वारा सर्वे किया गया। सर्वे के दौरान जटहां बाजार, जरार, माघी कोठिलवा, अरनहवा और चिईहवा क्षेत्र में रेलवे लाइन की जद में आने वाले पेड़ों का आकलन किया गया। <span style="text-align:left;">संयुक्त सर्वे में वन रक्षक संदीप पटेल, वन दैनिक श्रमिक वन प्रमोद यादव, तथा एनपीए एसोसिएट रेलवे गोरखपुर की ओर से राहुल यादव और अभिनाश यादव शामिल रहे। सर्वे के बाद किसानों में पेड़ों के मुआवजे के भुगतान को लेकर उम्मीद बढ़ गई है। </span><span style="text-align:left;">इस दौरान</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181071/survey-of-trees-coming-in-kushinagar-railway-line-completed-way"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/screenshot_2026-06-12-15-50-56-930_com.miui.gallery-edit.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर। </strong>छितौनी–तमकुही रोड स्वीकृत रेल लाइन परियोजना के तहत अधिग्रहित भूमि पर खड़े वृक्षों का शुक्रवार को रेलवे विभाग और वन विभाग की संयुक्त टीम द्वारा सर्वे किया गया। सर्वे के दौरान जटहां बाजार, जरार, माघी कोठिलवा, अरनहवा और चिईहवा क्षेत्र में रेलवे लाइन की जद में आने वाले पेड़ों का आकलन किया गया। <span style="text-align:left;">संयुक्त सर्वे में वन रक्षक संदीप पटेल, वन दैनिक श्रमिक वन प्रमोद यादव, तथा एनपीए एसोसिएट रेलवे गोरखपुर की ओर से राहुल यादव और अभिनाश यादव शामिल रहे। सर्वे के बाद किसानों में पेड़ों के मुआवजे के भुगतान को लेकर उम्मीद बढ़ गई है। </span><span style="text-align:left;">इस दौरान किसान धनंजय गुप्त, शिवनारायण यादव, कमलेश यादव, सुग्रीव यादव सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181071/survey-of-trees-coming-in-kushinagar-railway-line-completed-way</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181071/survey-of-trees-coming-in-kushinagar-railway-line-completed-way</guid>
                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:51:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/screenshot_2026-06-12-15-50-56-930_com.miui.gallery-edit.jpg"                         length="469121"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गृहिणियों को राष्ट्र निर्माता मानकर सुप्रीम कोर्ट ने रचा सामाजिक न्याय का नया अध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[<div>भारतीय समाज में गृहिणी का स्थान हमेशा से परिवार की धुरी के रूप में रहा है। वह घर की व्यवस्था संभालती है बच्चों का पालन-पोषण करती है बुजुर्गों की देखभाल करती है और परिवार को भावनात्मक स्थिरता प्रदान करती है। इसके बावजूद उसके श्रम को लंबे समय तक आर्थिक मूल्यांकन से बाहर रखा गया। घर के भीतर किए जाने वाले अनगिनत कार्यों को कर्तव्य और जिम्मेदारी का नाम देकर उनकी वास्तविक कीमत को नजरअंदाज किया जाता रहा। ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक चेतना को नई दिशा देने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181065/supreme-court-created-a-new-chapter-of-social-justice-by"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/4.jpg" alt=""></a><br /><div>भारतीय समाज में गृहिणी का स्थान हमेशा से परिवार की धुरी के रूप में रहा है। वह घर की व्यवस्था संभालती है बच्चों का पालन-पोषण करती है बुजुर्गों की देखभाल करती है और परिवार को भावनात्मक स्थिरता प्रदान करती है। इसके बावजूद उसके श्रम को लंबे समय तक आर्थिक मूल्यांकन से बाहर रखा गया। घर के भीतर किए जाने वाले अनगिनत कार्यों को कर्तव्य और जिम्मेदारी का नाम देकर उनकी वास्तविक कीमत को नजरअंदाज किया जाता रहा। ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक चेतना को नई दिशा देने वाला भी है। सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाली गृहिणियों के मुआवजे को लेकर सर्वोच्च अदालत ने जो मानक निर्धारित किया है वह महिलाओं के सम्मान और न्याय व्यवस्था की संवेदनशीलता दोनों का प्रतीक है।</div>
<div>अदृश्य श्रम को मिली प्रतिष्ठा</div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा है कि गृहिणियों के काम का मूल्य कम से कम 30 हजार रुपए प्रतिमाह माना जाना चाहिए और इसी आधार पर मुआवजे की गणना की जानी चाहिए। अदालत ने यह भी माना कि गृहिणियां केवल परिवार का हिस्सा नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण शक्ति हैं। यह टिप्पणी अपने आप में ऐतिहासिक है क्योंकि पहली बार इतने स्पष्ट और प्रभावशाली शब्दों में गृहिणियों की भूमिका को राष्ट्रीय विकास से जोड़ा गया है।</div>
<div> </div>
<div>दरअसल किसी भी समाज की प्रगति का आधार मजबूत परिवार होता है और मजबूत परिवार का आधार अक्सर एक समर्पित महिला होती है। वह बिना किसी वेतन और अवकाश के चौबीसों घंटे कार्य करती है। उसकी मेहनत का कोई हिसाब नहीं रखा जाता और उसके योगदान को आर्थिक आंकड़ों में नहीं मापा जाता। सुप्रीम कोर्ट ने इस वास्तविकता को स्वीकार कर महिलाओं के अदृश्य श्रम को वह सम्मान दिया है जिसकी मांग लंबे समय से की जा रही थी।</div>
<div> </div>
<div>पुरानी सोच को बदलने वाला निर्णय है।अब तक सड़क दुर्घटना मामलों में गृहिणियों की आय का अनुमान अक्सर कुशल मजदूर की मजदूरी के आधार पर लगाया जाता था। यह व्यवस्था न केवल अव्यावहारिक थी बल्कि महिलाओं के योगदान को कम करके आंकने वाली भी थी। अदालत ने इस सोच को खारिज करते हुए कहा कि घरेलू कार्यों को सामान्य मजदूरी के पैमाने पर नहीं तौला जा सकता</div>
<div> </div>
<div>यह निर्णय इस बात की स्वीकारोक्ति है कि घर संभालना एक पूर्णकालिक और बहुआयामी जिम्मेदारी है। गृहिणी एक साथ प्रबंधक शिक्षक मार्गदर्शक परिचारिका और परिवार की भावनात्मक शक्ति के रूप में कार्य करती है। इसलिए उसके योगदान की तुलना किसी एक पेशे या मजदूरी से नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने इसी व्यापक दृष्टिकोण को अपनाकर न्याय की नई परिभाषा प्रस्तुत की है।</div>
<div> </div>
<div>महिला सम्मान की दिशा में बड़ा कदम कहा जा सकता है।</div>
<div>यह फैसला केवल मुआवजे की राशि बढ़ाने का मामला नहीं है बल्कि महिलाओं के सम्मान को कानूनी मान्यता देने का प्रयास भी है। भारतीय समाज में आज भी अनेक महिलाएं अपने कार्यों के लिए सामाजिक सराहना तो पाती हैं लेकिन आर्थिक पहचान नहीं मिलती। अदालत ने इस स्थिति को बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।</div>
<div> </div>
<div>जब देश की सर्वोच्च अदालत किसी गृहिणी को राष्ट्र निर्माता कहती है तब यह संदेश केवल न्यायालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे समाज तक पहुंचता है। इससे महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना मजबूत होती है और यह स्वीकार किया जाता है कि राष्ट्र निर्माण केवल कार्यालयों और उद्योगों में नहीं बल्कि घरों के भीतर भी होता है।</div>
<div> </div>
<div>न्याय प्रणाली का  संवेदनशील उदाहरण है और इस फैसले की सबसे बड़ी विशेषता न्यायपालिका की संवेदनशीलता है। अदालत ने कहा कि मुआवजा तय करते समय केवल महिला की आय को आधार नहीं बनाया जा सकता। उसकी उम्र शिक्षा कौशल पारिवारिक जिम्मेदारियां और आर्थिक परिस्थितियां भी ध्यान में रखी जानी चाहिए। यह दृष्टिकोण बताता है कि न्यायालय जीवन की वास्तविकताओं को समझते हुए निर्णय दे रहा है</div>
<div> </div>
<div>कई बार दुर्घटना में गृहिणी की मृत्यु के बाद परिवार केवल एक सदस्य को नहीं खोता बल्कि पूरे परिवार की व्यवस्था प्रभावित हो जाती है। बच्चों का भविष्य बुजुर्गों की देखभाल और घर की स्थिरता पर गहरा असर पड़ता है। अदालत ने इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए भावनात्मक और पारिवारिक क्षति को भी मुआवजे का हिस्सा माना है। यह न्याय की मानवीय और व्यावहारिक व्याख्या है।</div>
<div> </div>
<div>त्वरित न्याय के प्रति प्रतिबद्धता</div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने केवल मुआवजे की गणना का नया आधार निर्धारित नहीं किया बल्कि न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि ऐसे मामलों की निगरानी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश स्वयं करें और दावों का निपटारा एक वर्ष के भीतर किया जाए।</div>
<div> </div>
<div>भारतीय न्याय व्यवस्था में लंबित मामलों की समस्या लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। दुर्घटना पीड़ित परिवार अक्सर वर्षों तक मुआवजे की प्रतीक्षा करते रहते हैं। ऐसे में अदालत का यह निर्देश न्याय को समयबद्ध और पीड़ित केंद्रित बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि सर्वोच्च न्यायालय केवल सिद्धांतों की बात नहीं कर रहा बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन को भी सुनिश्चित करना चाहता है</div>
<div>न्यायपालिका की प्रगतिशील सोच</div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारतीय न्यायपालिका की प्रगतिशील और दूरदर्शी सोच का परिचायक है। अदालत ने यह समझा कि बदलते समय में महिलाओं की भूमिका को पुराने मानकों से नहीं आंका जा सकता। आज महिलाओं का योगदान केवल आर्थिक कमाई तक सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक और पारिवारिक संरचना को मजबूत बनाने में भी उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।</div>
<div> </div>
<div>इस निर्णय ने यह संदेश दिया है कि किसी व्यक्ति का मूल्य केवल उसकी वेतन पर्ची से नहीं तय किया जा सकता। समाज के लिए किए गए उसके योगदान को भी समान महत्व मिलना चाहिए। गृहिणियों के मामले में यह संदेश विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका अधिकांश श्रम घर की चारदीवारी के भीतर ही रह जाता है।</div>
<div>सामाजिक बदलाव की नई शुरुआत शुरू हो चुका है।</div>
<div> </div>
<div>यह फैसला भविष्य में व्यापक सामाजिक बदलाव का आधार बन सकता है। इससे महिलाओं के घरेलू कार्यों के आर्थिक महत्व पर नई चर्चा शुरू होगी। नीति निर्माण के स्तर पर भी घरेलू श्रम को लेकर गंभीर विचार हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे करोड़ों गृहिणियों को यह एहसास होगा कि उनके कार्यों को देश की सर्वोच्च अदालत ने सम्मान और मान्यता दी है</div>
<div> </div>
<div>समाज में लंबे समय से यह धारणा रही है कि घर का काम स्वाभाविक जिम्मेदारी है और उसका कोई आर्थिक मूल्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस धारणा को चुनौती देते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि घरेलू श्रम भी उतना ही मूल्यवान है जितना किसी अन्य पेशे में किया जाने वाला कार्य। यह विचार महिलाओं की स्थिति को मजबूत करने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में सहायक होगा</div>
<div> </div>
<div>न्याय और सम्मान का ऐतिहासिक संगम देखने को मिला है।सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय भारतीय न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इसने गृहिणियों के अदृश्य श्रम को पहचान दी है महिलाओं के सम्मान को नई ऊंचाई प्रदान की है और दुर्घटना पीड़ित परिवारों को अधिक न्यायपूर्ण राहत सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त किया है</div>
<div> </div>
<div>यह फैसला बताता है कि न्यायपालिका केवल कानून की व्याख्या करने वाली संस्था नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन की प्रेरक शक्ति भी है। महिलाओं को राष्ट्र निर्माता का दर्जा देकर सर्वोच्च अदालत ने न्याय और संवेदनशीलता का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है जिसकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है। यह निर्णय आने वाले वर्षों में महिला सम्मान सामाजिक न्याय और मानवीय न्यायशास्त्र के एक आदर्श उदाहरण के रूप में याद किया जाएगा। भारत की न्याय प्रणाली ने इस फैसले के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया है कि सच्चा न्याय वही है जो समाज के सबसे अनदेखे और उपेक्षित योगदान को भी सम्मानपूर्वक पहचान दे सके।</div>
<div>     <strong>   *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181065/supreme-court-created-a-new-chapter-of-social-justice-by</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181065/supreme-court-created-a-new-chapter-of-social-justice-by</guid>
                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:01:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/4.jpg"                         length="239353"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिधुआ बाजार: बरसात की पहली फुहार में डूबा सिधुआ बाजार, जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह फेल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>उपेंद्र कुशवाहा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पडरौना (कुशीनगर)।</strong> पडरौना-दुदही मार्ग पर स्थित सिधुआ बाजार में जलनिकासी की बदहाल व्यवस्था और अतिक्रमण के कारण मुख्य सड़क नाले में तब्दील होती जा रही है। सड़क के दोनों किनारों पर दुकानदारों द्वारा किए गए अतिक्रमण से नालियां पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं, जिससे बारिश का पानी सड़क पर ही जमा हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों के अनुसार जलनिकासी के लिए बनाई गई नालियों को भी पाटकर उन पर कब्जा कर लिया गया है। नतीजतन हल्की बारिश में ही बाजार की मुख्य सड़क घुटने भर पानी से भर जाती है और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180819/sidhua-market-submerged-in-the-first-shower-of-rain-sidhua"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260607-wa0021.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>उपेंद्र कुशवाहा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पडरौना (कुशीनगर)।</strong> पडरौना-दुदही मार्ग पर स्थित सिधुआ बाजार में जलनिकासी की बदहाल व्यवस्था और अतिक्रमण के कारण मुख्य सड़क नाले में तब्दील होती जा रही है। सड़क के दोनों किनारों पर दुकानदारों द्वारा किए गए अतिक्रमण से नालियां पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं, जिससे बारिश का पानी सड़क पर ही जमा हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों के अनुसार जलनिकासी के लिए बनाई गई नालियों को भी पाटकर उन पर कब्जा कर लिया गया है। नतीजतन हल्की बारिश में ही बाजार की मुख्य सड़क घुटने भर पानी से भर जाती है और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में हुई बारिश के बाद सड़क पर तेज बहाव के साथ पानी जमा हो गया, जिससे दोपहिया वाहन, ई-रिक्शा, टेंपो चालक और पैदल यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">सड़क पर जलभराव के कारण गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटना और गंभीर चोट की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने और नई नालियों के निर्माण की मांग कई बार अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिधुआ बाजार में नाली व्यवस्था नहीं होने के कारण घरों का गंदा पानी भी सीधे सड़क पर बहाया जाता है। बाथरूम और घरेलू उपयोग का पानी सड़क पर फैलने से पूरे क्षेत्र में गंदगी बनी रहती है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है तथा पूरी सड़क नाले जैसी दिखाई देने लगती है। <span style="text-align:left;">स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से अतिक्रमण हटाकर समुचित नाली निर्माण कराने की मांग की है, ताकि बाजार क्षेत्र और राहगीरों को इस समस्या से राहत मिल सके।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180819/sidhua-market-submerged-in-the-first-shower-of-rain-sidhua</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180819/sidhua-market-submerged-in-the-first-shower-of-rain-sidhua</guid>
                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 19:03:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/img-20260607-wa0021.jpg"                         length="246242"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कॉकरोच जनता पार्टी का उभार और युवा आकांक्षाओं की राजनीति में भाजपा की विकासवादी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यहां हर वर्ग को अपनी बात रखने का अधिकार प्राप्त है। समय समय पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों ने देश की नीतियों और जनचर्चाओं को प्रभावित किया है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया के माध्यम से उभरी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) भी इसी लोकतांत्रिक परंपरा का एक नया उदाहरण बनकर सामने आई है। दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित इसके प्रदर्शन ने यह स्पष्ट किया है कि देश का एक वर्ग विशेष रूप से युवा पीढ़ी शिक्षा व्यवस्था रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180817/the-rise-of-the-cockroach-janata-party-and-bjps-evolutionary"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/86b5a220-571b-11f1-89a3-d1f559421220.jpg.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यहां हर वर्ग को अपनी बात रखने का अधिकार प्राप्त है। समय समय पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों ने देश की नीतियों और जनचर्चाओं को प्रभावित किया है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया के माध्यम से उभरी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) भी इसी लोकतांत्रिक परंपरा का एक नया उदाहरण बनकर सामने आई है। दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित इसके प्रदर्शन ने यह स्पष्ट किया है कि देश का एक वर्ग विशेष रूप से युवा पीढ़ी शिक्षा व्यवस्था रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करना चाहती है। हालांकि इस आंदोलन को राजनीतिक परिवर्तन की बड़ी लहर मानना जल्दबाजी होगी क्योंकि भारत की राजनीति में जनविश्वास का सबसे मजबूत आधार आज भी विकास सुशासन और स्थिर नेतृत्व है जिसका प्रतिनिधित्व भारतीय जनता पार्टी कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म मूल रूप से सोशल मीडिया पर व्यंग्य और असंतोष की अभिव्यक्ति के रूप में हुआ था। कुछ ही समय में इसने बड़ी संख्या में युवाओं का ध्यान आकर्षित किया। जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्रों और युवा पेशेवरों की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता रोजगार के अवसरों और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे विषय युवाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह मांगें नई नहीं हैं। हर पीढ़ी अपने समय की चुनौतियों को लेकर आवाज उठाती रही है और लोकतंत्र में यह स्वाभाविक भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन किसी भी आंदोलन का मूल्यांकन केवल नारों और भीड़ के आधार पर नहीं किया जा सकता। यह देखना भी आवश्यक है कि देश की वास्तविक परिस्थितियां क्या हैं और सरकार ने उन चुनौतियों के समाधान के लिए क्या प्रयास किए हैं। इस संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का कार्यकाल उल्लेखनीय रहा है। पिछले एक दशक में भारत ने बुनियादी ढांचे आर्थिक सुधारों डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। देश के राजमार्गों रेलवे नेटवर्क हवाई अड्डों बंदरगाहों और डिजिटल सेवाओं में जिस गति से विस्तार हुआ है वह स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">युवाओं की सबसे बड़ी चिंता रोजगार और अवसरों को लेकर होती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने मेक इन इंडिया स्टार्टअप इंडिया स्किल इंडिया डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे व्यापक कार्यक्रम शुरू किए। इन पहलों का उद्देश्य केवल नौकरियां पैदा करना नहीं बल्कि युवाओं को रोजगार देने वाला उद्यमी बनाना भी है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। लाखों युवा तकनीक नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से नए अवसर प्राप्त कर रहे हैं। यह परिवर्तन किसी एक दिन में नहीं आया बल्कि इसके पीछे दीर्घकालिक नीतिगत प्रयास और राजनीतिक इच्छाशक्ति रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीजेपी का आंदोलन युवाओं की कुछ वास्तविक चिंताओं को सामने लाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है। यदि कहीं अनियमितता या प्रशासनिक कमजोरी दिखाई देती है तो उसके समाधान की अपेक्षा स्वाभाविक है। लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि किसी समस्या का अस्तित्व यह सिद्ध नहीं करता कि पूरा तंत्र विफल हो गया है। भारत जैसे विशाल देश में करोड़ों छात्र विभिन्न परीक्षाओं में भाग लेते हैं। ऐसे में चुनौतियां सामने आ सकती हैं लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार उन्हें सुधारने के लिए कितनी प्रतिबद्ध है। हाल के वर्षों में परीक्षा प्रक्रियाओं को अधिक सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो कॉकरोच जनता पार्टी फिलहाल एक संगठित वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति के बजाय असंतोष की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति अधिक दिखाई देती है। इसके समर्थकों में बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है जो व्यवस्था में सुधार चाहते हैं। यह भावना लोकतंत्र के लिए सकारात्मक मानी जा सकती है क्योंकि जागरूक नागरिक ही लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाते हैं। हालांकि किसी आंदोलन को स्थायी जनसमर्थन प्राप्त करने के लिए केवल विरोध पर्याप्त नहीं होता। उसे स्पष्ट नीतियां व्यवहारिक समाधान और व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण भी प्रस्तुत करना पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय राजनीति में इसके पहले भी कई आंदोलन उभरे हैं जिन्होंने व्यवस्था परिवर्तन के बड़े दावे किए। कुछ समय के लिए उन्हें व्यापक लोकप्रियता भी मिली लेकिन दीर्घकालिक सफलता केवल उन्हीं को मिली जो शासन और विकास का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत कर सके। भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी शक्ति यही रही है कि उसने चुनावी नारों से आगे बढ़कर विकास को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में स्थापित किया। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ने आर्थिक विकास राष्ट्रीय सुरक्षा तकनीकी प्रगति और वैश्विक कूटनीति के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है। विनिर्माण क्षेत्र को नई गति मिली है। रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ी है। डिजिटल भुगतान प्रणाली ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर सेमीकंडक्टर निर्माण तक भारत नए क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है। इन उपलब्धियों का सीधा लाभ युवाओं को मिलने वाले अवसरों के रूप में दिखाई देता है। यही कारण है कि भाजपा का जनाधार केवल राजनीतिक समर्थन तक सीमित नहीं बल्कि विकास के प्रति विश्वास पर आधारित है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जंतर मंतर का प्रदर्शन यह संदेश देता है कि देश का युवा अपनी अपेक्षाओं को लेकर मुखर है। यह लोकतंत्र के स्वास्थ्य का संकेत है। लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट है कि भारत जैसे विशाल और तेजी से आगे बढ़ते राष्ट्र में परिवर्तन केवल विरोध से नहीं बल्कि रचनात्मक सहभागिता से संभव होगा। सरकार और युवाओं के बीच संवाद जितना मजबूत होगा उतना ही देश का भविष्य सशक्त बनेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कॉकरोच जनता पार्टी को युवाओं की कुछ मांगों और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है। वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी का विकास मॉडल यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक परिवर्तन के लिए दूरदर्शी नीतियां मजबूत नेतृत्व और सतत विकास आवश्यक हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीजेपी अपने आंदोलन को किस दिशा में ले जाती है लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में भाजपा की विकास यात्रा और जनविश्वास की मजबूत नींव उसके लिए सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बनी हुई है। भारत की जनता विशेष रूप से युवा वर्ग अवसर पारदर्शिता और प्रगति चाहता है और इन्हीं अपेक्षाओं की कसौटी पर भविष्य की राजनीति का मूल्यांकन होता रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180817/the-rise-of-the-cockroach-janata-party-and-bjps-evolutionary</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180817/the-rise-of-the-cockroach-janata-party-and-bjps-evolutionary</guid>
                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:33:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/86b5a220-571b-11f1-89a3-d1f559421220.jpg.webp"                         length="57844"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की महती भूमिका</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत आज दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहा है। जब देशवासी अपने देश की तरक्की की बातें सुनते हैं तो बेशक उन्हें बड़ी खुशी और गर्व होता है। भारत की इस विकास यात्रा में केंद्र व राज्यों की सरकारों के साथ-साथ देश के नागरिकों का भी अपना अथाह योगदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी तो आज हम दुनिया की तीसरी बड़ी महाशक्ति बनकर उभर रहे हैं। भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी महती रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे नकारा नहीं जा सकता है। बेशक कुछ संघ-विरोधी विचारधारा वाले लोगों को देश की विकास यात्रा में</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180815/important-role-of-rashtriya-swayamsevak-sangh-in-indias-development-journey"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/rss-shatabdi-varsh-jan-sampark-abhiyaan-history.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत आज दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहा है। जब देशवासी अपने देश की तरक्की की बातें सुनते हैं तो बेशक उन्हें बड़ी खुशी और गर्व होता है। भारत की इस विकास यात्रा में केंद्र व राज्यों की सरकारों के साथ-साथ देश के नागरिकों का भी अपना अथाह योगदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी तो आज हम दुनिया की तीसरी बड़ी महाशक्ति बनकर उभर रहे हैं। भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी महती रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे नकारा नहीं जा सकता है। बेशक कुछ संघ-विरोधी विचारधारा वाले लोगों को देश की विकास यात्रा में संघ का योगदान अचरज भरा भी लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के योगदान को यह देश कभी भुला नहीं पाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के उस वक्त को याद कर कल्पना करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ तथाकथित सत्ता-स्वार्थी राजनेताओं की हुक्मरान बनने की चाहत के चलते जिस देश की आजादी धर्म के नाम पर की गई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ कितना खून-खराबा अपनों का अपनों के ही हाथों हुआ होगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान के उदय के साथ ही लाहौर से लेकर कराची तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्वी-पश्चिमी सीमाओं तक बसने वाले हिंदुओं के कत्लेआम की जो दास्तां देश ने देखी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी कल्पना मात्र से आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं और शरीर में सिहरन पैदा हो जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी से पहले भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखंड भारत की कल्पना को साकार करने की अलख जगाने के लिए लोगों को जागरूक कर रहा था। कई मौकों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जन्मदाता और तत्कालीन प्रथम सरसंघचालक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरुजी’ ने भी देश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सभी बड़े तत्कालीन नेताओं से अखंड भारत बनाए रखने की लड़ाई लड़ने की बात कही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन संघ विरोधी मानसिकता वाले कुछ लोगों ने हर बार संघ की बातों को नजरअंदाज करते हुए मुस्लिम लीग के जिन्ना की जिद के आगे नतमस्तक होकर आखिरकार अखंड भारत को धर्म के नाम पर टुकड़ों में बांट दिया था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्ना की मुस्लिम लीग के समर्थक गुंडों और पाकिस्तानी फौजी सिपाहियों ने पाकिस्तान के हर हिस्से में रह रहे हिंदुओं को वहाँ से भागने के लिए उन पर रक्तरंजित अत्याचार ही नहीं किए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हिंदू बेटियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहुओं और माताओं की अस्मिता को भी सरेआम लूटकर तार-तार किया था। पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान में हिंदुओं की लाशों के ढेर इस बात के सबूत थे कि हिंदुओं के प्रति जिन्ना और उसके गुंडों ने सत्ता की लालच में लोगों के बीच कितना जहर भरा था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के उस रक्तरंजित दौर में पाकिस्तान में सबसे पहले हिंदू माँ-बहनों और बेटियों की अस्मिता को बचाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता ही आगे आए और जिन्ना के गुंडों तथा उसके सिपाहियों से अपनी जान की बाजी लगाकर जितना हो सकता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतने हिंदुओं को बचाने का भरसक प्रयास भी किया था। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विभाजन की त्रासदी से अपनी ही जमीन से बेदखल किए गए हिंदुओं की मदद हेतु जगह-जगह राहत शिविर खोलकर पाकिस्तान से बेदखल और प्रताड़ित किए गए हिंदुओं तथा उनके परिजनों को न केवल सुरक्षा दी</span>,</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वयंसेवकों ने बिना सरकारी मदद के अपने दम पर महीनों तक उन हिंदुओं के भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी और स्वास्थ्य की भी व्यवस्था की थी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह तो देश जानता है कि विभाजन के उस कठिन दौर में कैसे आरएसएस के स्वयंसेवकों ने पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं को बचाया था। आजादी के दौर के बहुत से लोगों का मानना है कि यदि आजादी के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हिंदुओं को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी नहीं लगाते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जिन्ना के गुंडे और गुंडागर्दी पर उतारू उसकी सेना नफरत की आग में पाकिस्तान से समूची हिंदू कौम का ही सर्वनाश कर देते।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश की आजादी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारतीयों में एकजुटता बनी रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस महान उद्देश्य को लेकर बिना प्रचार-प्रसार के अपने कार्यकर्ताओं के बूते अलख जगाए रखी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी परिणति यह है कि भारत आज दुनिया की महाशक्तियों को अपने आगे झुकाने वाला देश बन गया है। देश में जब-जब भी विपदाएँ आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब-तब सरकार से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता निस्वार्थ भाव से अपनी जान की परवाह किए बिना विपदाओं में उम्मीदों का सहारा बनकर खड़े हुए हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा किए गए कार्यों की विपक्ष के नेता तक खुले मन से प्रशंसा करते रहे हैं। देश में जब भी कहीं भीषण बाढ़ आई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूखा पड़ा हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूकंप की त्रासदी हुई हो या फिर कोई गंभीर बीमारी ही क्यों न फैली हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यकर्ता देश में आई हर विपदा में सबसे पहले सहारा बनकर खड़ा हो जाता है और बिना जाति-धर्म पूछे अपनी जान की बाजी लगाकर सेवा कार्यों में जुट जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस देश को जोड़ने और मजबूती प्रदान करने वाला संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो बिना जाति-धर्म का भेद किए देश के हर वर्ग और समाज के विकास में सहयोग प्रदान करता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस का दायरा समूचा देश और देश में रहने वाले सभी जाति-धर्मों के लोगों के बीच मानवीय प्रेम और राष्ट्रीय एकता बनी रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी महान उद्देश्य को लेकर दिन-रात उसके स्वयंसेवक कार्य करते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एकमात्र ऐसा संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अपने किए गए कार्यों का कभी दिखावा नहीं करता और न कभी अपना बखान करता है। देश की सेहत देखकर ही संघ की सक्रियता समझी जा सकती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश यदि आज दुनिया में सिरमौर बन रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसमें आरएसएस की भूमिका को भी खुले मन से स्वीकारना होगा। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्रहित को समर्पित संगठन आरएसएस के करोड़ों कार्यकर्ता बेहद अनुशासित तरीके से अपने सरसंघचालक के हर शब्द को अपना सर्वस्व त्याग कर निस्वार्थ भाव से पूर्ण करते हैं। यह संघ के सरसंघचालक के तपोबल का ही परिणाम है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के श्री मोहन भागवत छठे सरसंघचालक हैं। इससे पूर्व डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुकर दत्तात्रेय देवरस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. राजेंद्र सिंह ‘रज्जू भैया’ और के. एस. सुदर्शन जी के त्याग और अनुशासन से संघ दुनिया भर के देशों में अपनी जड़ें मजबूती से जमाए हुए मानवीय सेवा के कार्यों हेतु समर्पित है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय राजनीति के कुछ अवसरवादी सत्ता-स्वार्थी नेताओं ने अपने वोट बैंक की राजनीति के चक्कर में आरएसएस को देश-विरोधी संगठन बताने से भी गुरेज नहीं किया है। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ राजनीतिक दलों ने सत्ता में आने के बाद जाति-धर्म के वोट बैंक के सहारे सत्ता में बने रहने की चाहत में अपने-अपने राज्यों में आरएसएस पर प्रतिबंध भी लगा दिया था और आरएसएस से संबंध रखने वाले भारतीयों को प्रताड़ित भी किया जाता था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कुछ राज्यों में आज भी आरएसएस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर बंदिशें लगाई गई हैं। वर्तमान में राजनीति से जुड़े कुछ लोगों ने एक विशेष वर्ग के वोट बैंक पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए आरएसएस को केवल हिंदुओं का संगठन बता कर उसके खिलाफ आए दिन जहर उगला है। बेशक आरएसएस एक हिंदुत्ववादी विचारधारा वाला संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका महान उद्देश्य सभी धर्मों और जातियों के लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत कर राष्ट्र को एकजुट और मजबूत बनाना है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस की विचारधारा के विरोधी जो भी लोग आज राजनीति में मौजूद होकर जात-पात की राजनीति करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री जी से सीखना चाहिए कि उन्होंने देशहित के कार्यों में आरएसएस की दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समय-समय पर प्रशंसा भी की है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वर्तमान सरसंघचालक श्री मोहन भागवत देश के सभी वर्गों और धर्मों के प्रमुखों के साथ मिलकर संघ के प्रति राजनीतिक दलों द्वारा जो दूषित धारणाएँ फैलाई गई थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें बहुत हद तक दूर कर संघ के सच्चे राष्ट्र हित के उद्देश्य से परिचित करवाकर अन्य धर्मों को भी संघ की विचारधारा से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश इस वर्ष विजयादशमी के अवसर पर आरएसएस की स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के मार्गदर्शन में देशभर में संघ के कार्यों से देश की नई पीढ़ी को अवगत कराने के कार्यक्रम जारी हैं। आरएसएस एक ऐसा सामाजिक संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जाति-धर्म के नाम पर टुकड़ों में बंटे और बिखरे लोगों को एकजुट करता है तथा उनमें अपने राष्ट्र की निस्वार्थ सेवा के लिए व्यक्ति निर्माण से लेकर राष्ट्र निर्माण तक का पाठ सिखाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस की स्थापना भी सन </span>1925 <span lang="hi" xml:lang="hi">में विजयादशमी के दिन डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार जी द्वारा इसी महान उद्देश्य को लेकर की गई थी। अपने सौ वर्षों के सफर में आरएसएस अपने कार्यकर्ताओं के समर्पण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्याग और अनुशासन के बल पर आज एक वटवृक्ष बनकर दुनिया के अस्सी से ज्यादा देशों में फैल चुका है।</span>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सरसंघचालक श्री मोहन भागवत की अगुवाई में संघ अपना सौवां जन्मोत्सव पिछली विजयादशमी को मनाया गया उस ऐतिहासिक पल का समूचा दे साक्षी बना!  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष को पूरे वर्ष देशभर में हर्षोल्लास से मनाएगा और कार्यक्रमों के माध्यम से देश के विकास में संघ की भूमिका से उसके त्याग बलिदान और कर्तव्य निष्ठा से नवपीढ़ी को परिचित भी करवाएगा।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180815/important-role-of-rashtriya-swayamsevak-sangh-in-indias-development-journey</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180815/important-role-of-rashtriya-swayamsevak-sangh-in-indias-development-journey</guid>
                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:29:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/rss-shatabdi-varsh-jan-sampark-abhiyaan-history.webp"                         length="154784"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डैमोग्राफी बदलाव भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जनसांख्यिकीय बदलाव के कारणों के अध्ययन, अवैध प्रवासन की जांच और समाधान हेतु भारत सरकार ने हाल ही में जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है। यह समिति राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन कर रही है।इसके अतिरिक्त, डेमोग्राफिक डिविडेंड (जनसांख्यिकीय लाभांश) का लाभ उठाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए मुख्य कदम निम्नलिखित हैं. डीसीयुवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए स्किल इंडिया मिशन और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना  चलाई जा रही है।रोजगार और उद्यमिता  और मुद्रा योजना के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा दिया</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180812/demographic-change-is-a-serious-threat-to-indias-security"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जनसांख्यिकीय बदलाव के कारणों के अध्ययन, अवैध प्रवासन की जांच और समाधान हेतु भारत सरकार ने हाल ही में जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है। यह समिति राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन कर रही है।इसके अतिरिक्त, डेमोग्राफिक डिविडेंड (जनसांख्यिकीय लाभांश) का लाभ उठाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए मुख्य कदम निम्नलिखित हैं. डीसीयुवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए स्किल इंडिया मिशन और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना  चलाई जा रही है।रोजगार और उद्यमिता  और मुद्रा योजना के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।शिक्षा : नई शिक्षा नीति  2020 के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें डेमोग्राफिक चेंज पर केंद्र सरकार ने हाई लेवल कमेटी का गठन किया है।   बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में डेमोग्राफिक चेंज और घुसपैठ बड़ा मुद्दा था। इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार का घेराव किया था। इसी आधार पर भाजपा ने विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मात दी और पूर्व बहुमत से सत्ता हासिल की। ऐसे में अब केंद्र सरकार द्वारा डेमोग्राफिक चेंज पर हाई लेवल कमेटी गठित करना अहम माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डेमोग्राफिक चेंज पर केंद्र सरकार ने हाई लेवल कमेटी का गठन किया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार (26 मई 2026) को इसकी घोषणा की. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि घुसपैठ और अन्य कारणों से किसी भी राष्ट्र के वर्तमान व भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है. इसी चुनौती से निपटने के लिए 15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेमोग्राफिक चेंज पर 'हाई लेवल कमेटी' बनाने की घोषणा की थी. गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि सरकार ने इस कमेटी का गठन कर लिया है. जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी में जनगणना आयुक्त के साथ दुर्गा शंकर मिश्रा (रिटायर्ड आईएएस), बालाजी श्रीवास्तव (रिटायर्ड आईपीएस) और डॉ. शमिका रवि समिति के सदस्य होंगे. संयुक्त सचिव (फॉरेनर्स-I), गृह मंत्रालय, इस समिति के सदस्य सचिव होंगे.'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में डेमोग्राफिक चेंज और घुसपैठ बड़ा मुद्दा था. इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार का घेराव किया था. इसी आधार पर बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मात दी और पूर्ण बहुमत से सत्ता हासिल की. ऐसे में अब केंद्र सरकार द्वारा डेमोग्राफिक चेंज पर हाई लेवल कमेटी गठित करना अहम माना जा रहा है. </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको याद हो कि पीएम मोदी ने 15 अगस्त 2025 कहा था कि भारत अवैध घुसपैठ से निपटने के लिए जनसांख्यिकीय मिशन शुरू करेगा. उन्होंने लोगों को अवैध घुसपैठ के माध्यम से देश की जनसांख्यिकी को बदलने की सोची-समझी साजिश के बारे में चेतावनी दी और कहा कि कोई भी राष्ट्र घुसपैठियों को बर्दाश्त नहीं कर सकता, क्योंकि उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय जनसांख्यिकीय मिशन की घोषणा की.उनहोने कहा था आज देश के सामने एक चिंता, एक चुनौती के संबंध में आगाह करना चाहता हूं.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">षड्यंत्र के तहत, सोची समझी साजिश के तहत देश की डेमोग्राफी को बदला जा रहा है. एक नए संकट के बीच बोए जा रहे हैं और यह घुसपैठिए, मेरे देश के नौजवानों के रोजी-रोटी छीन रहे हैं. यह घुसपैठिए मेरे देश की बहन बेटियों को निशाना बना रहे हैं, यह बर्दाश्त नहीं होगा. यह घुसपैठिए भोले भाले आदिवासियों को भ्रमित करके उनकी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं. यह देश सहन नहीं करेगा और इसलिए मेरे प्यारे देशवासियों जब डेमोग्राफी परिवर्तन होता है, सीमावर्ती क्षेत्रों में डेमोग्राफी में परिवर्तन होता है, तब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संकट पैदा होता है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए यह संकट पैदा करता है. सामाजिक तनाव के बीज बो देता है और कोई देश अपना देश घुसपैठियों के हवाले नहीं कर सकता है. दुनिया का कोई देश नहीं कर सकता है, तो हम भारत को कैसे कर सकते हैं हमारे पूर्वजों ने त्याग और बलिदान से आजादी पाई है. हमें स्वतंत्र भारत दिया है, उन महापुरुषों के प्रति हमारा कर्तव्य हैं कि हम हमारे देश में ऐसी हरकतों को स्वीकार न करें, उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी और इसलिए मैं आज लाल किले को प्राचीर से कहना चाहता हूं.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हमने एक हाई पावर डेमोग्राफी मिशन शुरू करने का निर्णय किया है. यह मिशन, इस मिशन के द्वारा यह जो भीषण संकट नजर आ रहा है, भारत पर मंडरा रहा है यह जो संकट है, उसको निपटाने के लिए तय समय में सुविचारित निश्चित रूप से अपने कार्य को करेगा, उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं.  भारत में धर्म के अनुसार जनसंख्या का प्रतिशत लगातार हिन्दू आबादी के गिरावट होने का संकेत देता है 1951 2011 2001 1991 1981 1971 1961 ह1951 हिंदू -4.30% 79.80% 80.50% 81.50% 82.30% 82.70% 83.50% 84.10% मुस्लिम 4.40% 14.20% 13.40% 12.60% 11.80% 11.20% 10.70% 9.80%।  1951 से 2011 तक की जनगणना में जो सभी धर्मों की जनसंख्या वृद्धि में असमानता दिखती है, उसका प्रमुख कारण घुसपैठ है. इस देश में 1951, 1971, 1991 और 2011 में जनगणना हुई, जिनमें शुरू से ही धर्म पूछने की परंपरा रही है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">1951 की जनगणना में हिंदू आबादी 84 प्रतिशत थी, जबकि मुस्लिम आबादी 9.8 प्रतिशत थी. 1971 में हिंदू आबादी 82 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी 11 प्रतिशत हो गई. 1991 में हिंदू आबादी 81 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी 12.2 प्रतिशत हो गई.वहीं, 2011 में हिंदू आबादी 79 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी 14.2 प्रतिशत हो गई. मुस्लिम आबादी में 24.6 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है, जबकि हिंदू आबादी में 4.5 प्रतिशत की कमी आई है. मोदी सरकार की घुसपैठ विरोधी 3डी नीति- पहचान करना मतदाता सूची से हटवाना , उन्हें वापस भेजना है. सबसे गौरतलब बात है कि भारत में मुस्लिम समुदाय की आबादी हिंदू आबादी की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रही है. साल 2010 में 14.4% से बढ़कर 2050 में 18.4% होने का अनुमान है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा था कि झारखंड की आदिवासी आबादी में गिरावट के पीछे बांग्लादेशी घुसपैठ का हाथ है. उन्होंने मांग की थी कि राज्य के कुछ हिस्सों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों और बिहार के किशनगंज और कटिहार को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाए ताकि क्षेत्र में "बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों" की बढ़ती संख्या से उत्पन्न चुनौती से निपटा जा सके, जिसके कारण, उनके अनुसार, आदिवासी आबादी में काफी कमी आई है.</div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया और कहा कि झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में आदिवासियों की आबादी बांग्लादेशी घुसपैठियों की बढ़ती संख्या के कारण घट रही है. उन्होंने कहा कि संथाल परगना क्षेत्र में आदिवासी आबादी 2000 में 36% थी, जो अब घटकर 26% रह गई है. उन्होंने पूछा, 'ये आदिवासी कहां चले गए?'2014 से, भारत की सीमाओं पर घुसपैठ के 8,500 से अधिक प्रयासों का पता चला है, जबकि 20,000 से अधिक घुसपैठियों को गिरफ्तार किया गया है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर सुरक्षा, अर्थशास्त्र और नीति निर्माण के स्तर पर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। केंद्र सरकार और सुरक्षा विश्लेषकों का एक वर्ग इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन के लिए गंभीर चुनौती मानता है, जबकि अर्थशास्त्री और जनसांख्यिकी विशेषज्ञ इसे गिरती प्रजनन दर और बुजुर्ग होती आबादी से जुड़ी आर्थिक चुनौती के रूप में देखते हैं।इस विषय को मुख्य रूप से अलग-अलग दृष्टिकोणों के माध्यम से समझा जा सकता है: सुरक्षा और सामाजिक संतुलन का दृष्टिकोण इस दृष्टिकोण के तहत, देश के कुछ विशिष्ट क्षेत्रों, विशेषकर सीमावर्ती इलाकों में हो रहे "अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलाव" को एक बड़ा खतरा माना जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, अवैध घुसपैठ और अनियमित प्रवासन के कारण सीमावर्ती राज्यों (जैसे असम, पश्चिम बंगाल, और बिहार) की जनसंख्या बनावट में असामान्य बदलाव आए हैं, जो कानून-व्यवस्था और संप्रभुता के लिए चिंता का विषय हैं।सरकार को गंभीरता से सख्त कदम उठाने चाहिए ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180812/demographic-change-is-a-serious-threat-to-indias-security</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180812/demographic-change-is-a-serious-threat-to-indias-security</guid>
                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:25:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/hindi-divas.jpg"                         length="137237"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या पुतिन ने एक वाक्य में बदलती दुनिया का सच कह दिया?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास के कठिन दौर ही रिश्तों की असली परीक्षा लेते हैं। ऐसे समय में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत को </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया के सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक” बताना महज़ कूटनीतिक वाक्य नहीं है। </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को सेंट पीटर्सबर्ग में दिया गया उनका बयान ऐसे समय आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया नए राजनीतिक खाँचों में बँटती दिख रही है। प्रतिबंधों से घिरा रूस अपने विश्वसनीय मित्रों को पहचान रहा है और भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति से अलग सम्मान पा रहा है। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180810/did-putin-tell-the-truth-of-the-changing-world-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/_113223674_gettyimages-1223723529.jpg.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास के कठिन दौर ही रिश्तों की असली परीक्षा लेते हैं। ऐसे समय में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत को </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया के सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक” बताना महज़ कूटनीतिक वाक्य नहीं है। </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को सेंट पीटर्सबर्ग में दिया गया उनका बयान ऐसे समय आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया नए राजनीतिक खाँचों में बँटती दिख रही है। प्रतिबंधों से घिरा रूस अपने विश्वसनीय मित्रों को पहचान रहा है और भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति से अलग सम्मान पा रहा है। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए भारत पर पश्चिमी दबाव को “निष्फल और प्रतिकूल” बताया। यह केवल मित्रता की प्रशंसा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था में भारत के बढ़ते महत्व की स्वीकारोक्ति है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय संबंधों में शब्द अक्सर परिस्थितियों का आईना होते हैं। पुतिन की भारत-प्रशंसा को भी इसी संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए। यूक्रेन संघर्ष के बाद रूस पश्चिमी प्रतिबंधों और राजनीतिक दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे समय में भारत उन विरले देशों में रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार रूस से संबंध बनाए रखे। न उसने किसी दबाव के आगे झुकना स्वीकार किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न अपनी विदेश नीति का मार्ग बदला। पुतिन भलीभांति समझते हैं कि भारत जैसा मित्र केवल आर्थिक सहयोगी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि कूटनीतिक संबल भी है। इसलिए उनका यह बयान प्रशंसा से अधिक उस विश्वास की अभिव्यक्ति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर रूस भविष्य की अपनी रणनीति का एक महत्वपूर्ण आधार देखता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पुतिन के बयान का एक संभावित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संकेत चीन की ओर भी है। रूस और चीन भले ही अटूट साझेदारी का दावा करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनके संबंधों में रणनीतिक सतर्कता बनी रहती है। चीन की बढ़ती आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी और सैन्य शक्ति ने एशिया का शक्ति-संतुलन बदल दिया है। मॉस्को समझता है कि बीजिंग पर अत्यधिक निर्भरता उसकी स्वतंत्र भूमिका को सीमित कर सकती है। ऐसे में भारत के साथ मजबूत संबंध उसे संतुलन देते हैं। यही कारण है कि पुतिन ने ब्रह्मोस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा सहयोग और उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी साझेदारी का विशेष उल्लेख किया। इसे मुख्य रूप से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चीन के विरुद्ध संदेश न मानकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एशिया में शक्ति-संतुलन साधने की रूस की दीर्घकालिक कूटनीतिक रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की विदेश नीति की सबसे बड़ी पहचान उसकी स्वतंत्रता है। यही कारण है कि रूस के राष्ट्रपति</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">व्लादिमीर पुतिन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने भारत पर पड़ रहे अमेरिकी दबाव के बीच उसकी नीति की सराहना की। अमेरिका लंबे समय से रूस से जुड़े ऊर्जा और रक्षा संबंधों को लेकर भारत को अपने अधिक निकट लाने का प्रयास करता रहा है। इसके बावजूद नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि उसके निर्णय राष्ट्रीय हितों से संचालित होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी बाहरी दबाव से नहीं। पुतिन ने इसी आत्मविश्वास की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत जैसे उभरते राष्ट्र पर दबाव डालना उलटा पड़ सकता है। उनका संदेश केवल वाशिंगटन के लिए नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी दुनिया के लिए था कि भारत अब अपनी राह स्वयं तय करने वाली शक्ति है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक शक्ति उसका संतुलित और स्वतंत्र दृष्टिकोण है। भारत एक ओर रूस से ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा उपकरण और सामरिक सहयोग प्राप्त कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर अमेरिका के साथ तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेश और सुरक्षा साझेदारी भी मजबूत कर रहा है। चीन से प्रतिस्पर्धा के बावजूद व्यापारिक संबंध भी बने हुए हैं। यही संतुलन भारत को वैश्विक राजनीति में अलग पहचान देता है। पुतिन ने मोदी सरकार की आर्थिक उपलब्धियों और तेज विकास दर की सराहना करते हुए संकेत दिया कि भारत अब किसी शक्ति-गुट का अनुसरण करने वाला देश नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विश्व राजनीति का एक स्वतंत्र और प्रभावशाली शक्ति केंद्र बन चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत-रूस संबंध अब केवल कूटनीति तक सीमित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी नई मजबूती हासिल कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष </span>2024-25 <span lang="hi" xml:lang="hi">में दोनों देशों का व्यापार लगभग </span>68.7 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर तक पहुंच गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें रूसी तेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गैस और कोयले की प्रमुख भूमिका रही। पुतिन द्वारा </span>100 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य का उल्लेख इस बात का संकेत है कि रूस भारत को केवल मित्र नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक साझेदार मानता है। ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परमाणु सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा उत्पादन और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार विस्तार पा रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच दोनों देश एक-दूसरे की क्षमताओं को अपने विकास का महत्वपूर्ण आधार मान रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मित्रता जितनी गहरी होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी चुनौतियां भी उतनी ही वास्तविक होती हैं। भारत-रूस संबंधों के सामने भी व्यापार असंतुलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भुगतान व्यवस्था की बाधाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा खरीद में भारत की नई प्राथमिकताएं और रूस-चीन की बढ़ती निकटता जैसे प्रश्न मौजूद हैं। इसलिए पुतिन ने भारत-चीन सीमा पर तनाव कम करने के प्रयासों का स्वागत किया। यह केवल एक टिप्पणी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि रूस का यह संदेश था कि वह एशिया में स्थिरता और संतुलन का पक्षधर है। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह यह भरोसा भी दिलाना चाहता है कि चीन से उसके संबंध भारत के हितों की कीमत पर नहीं हैं। भारत के लिए यह आश्वासन महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि उसकी विदेश नीति का आधार केवल राष्ट्रीय हित हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व राजनीति में कुछ वक्तव्य तत्कालीन घटनाओं से आगे जाकर भविष्य की दिशा भी बताते हैं। पुतिन का भारत को “भरोसेमंद साझेदार” कहना ऐसा ही संकेत है। यह केवल भारत-रूस संबंधों की निकटता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आकार ले रही नई वैश्विक व्यवस्था की झलक है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एकध्रुवीय प्रभुत्व का दौर पीछे छूट रहा है और नई शक्तियां उभर रही हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रिक्स का विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक दक्षिण का बढ़ता प्रभाव और भारत की भूमिका इसी परिवर्तन के संकेत हैं। रूस का यह सार्वजनिक विश्वास एक स्पष्ट संदेश देता है—भारत अब किसी समीकरण का हिस्सा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वयं एक निर्णायक समीकरण है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए पुतिन का यह बयान केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था की स्पष्ट स्वीकारोक्ति है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180810/did-putin-tell-the-truth-of-the-changing-world-in</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180810/did-putin-tell-the-truth-of-the-changing-world-in</guid>
                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:20:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/_113223674_gettyimages-1223723529.jpg.webp"                         length="32882"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नरेंद्र मोदी के नाम दर्ज होने जा रहा एक नया रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। यहाँ जनता समय</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर अपने नेताओं का चयन करती है और सत्ता परिवर्तन के माध्यम से लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाती है। स्वतंत्रता के बाद से देश ने अनेक प्रधानमंत्रियों को देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ नेता ऐसे रहे जिन्होंने केवल शासन नहीं किया बल्कि भारतीय राजनीति की दिशा और स्वरूप को भी गहराई से प्रभावित किया। जवाहर लाल नेहरू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं के बाद यदि किसी प्रधानमंत्री ने सबसे अधिक प्रभाव छोड़ा है तो वह नरेंद्र मोदी हैं। </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>2026</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180808/a-new-record-is-going-to-be-registered-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/178054939444.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। यहाँ जनता समय</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर अपने नेताओं का चयन करती है और सत्ता परिवर्तन के माध्यम से लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाती है। स्वतंत्रता के बाद से देश ने अनेक प्रधानमंत्रियों को देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ नेता ऐसे रहे जिन्होंने केवल शासन नहीं किया बल्कि भारतीय राजनीति की दिशा और स्वरूप को भी गहराई से प्रभावित किया। जवाहर लाल नेहरू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं के बाद यदि किसी प्रधानमंत्री ने सबसे अधिक प्रभाव छोड़ा है तो वह नरेंद्र मोदी हैं। </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> का दिन इसी कारण राजनीतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसे रिकॉर्ड के साथ चर्चा के केंद्र में होंगे जो भारतीय राजनीति में उनके लंबे और प्रभावशाली सफर का प्रतीक माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नरेंद्र मोदी ने पहली बार </span>26<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उस समय भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत प्राप्त किया था। यह जीत इसलिए ऐतिहासिक थी क्योंकि लगभग </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों बाद किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत मिला था। उस दौर में देश भ्रष्टाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक सुस्ती और राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दों से जूझ रहा था। जनता एक ऐसे नेतृत्व की तलाश में थी जो निर्णायक दिखाई दे और देश को नई दिशा दे सके। नरेंद्र मोदी ने विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन और मजबूत नेतृत्व के नारों के साथ चुनाव अभियान चलाया और जनता ने उन्हें भारी समर्थन दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> की जीत केवल एक चुनावी विजय नहीं थी बल्कि भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत थी। लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहने वाली कांग्रेस पार्टी पहली बार इतनी कमजोर स्थिति में पहुँच गई। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय राजनीति की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी। नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व इस परिवर्तन का मुख्य केंद्र बन गया। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पहचान पहले से ही एक विकासवादी नेता की बन चुकी थी और उसी छवि को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार मिला।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके बाद </span>2019<span lang="hi" xml:lang="hi"> का लोकसभा चुनाव आया। सामान्यतः किसी सरकार के </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों के बाद सत्ता विरोधी लहर देखी जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने पहले से भी अधिक सीटें जीत लीं। इस विजय ने यह स्पष्ट कर दिया कि मोदी केवल एक लोकप्रिय नेता नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्व बन चुके हैं। </span>2019<span lang="hi" xml:lang="hi"> की जीत के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद </span>370<span lang="hi" xml:lang="hi"> हटाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तीन तलाक कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनकी सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए जिनका व्यापक राजनीतिक प्रभाव पड़ा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। लगातार तीन बार सत्ता में लौटना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आसान नहीं होता। इसके लिए केवल चुनावी रणनीति ही नहीं बल्कि व्यापक जनसमर्थन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत संगठन और प्रभावी नेतृत्व की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि मोदी की तीसरी पारी को भारतीय राजनीति के बड़े घटनाक्रमों में गिना जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">10<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन को लेकर चर्चा इसलिए तेज है क्योंकि वे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री बने रहने वाले नेताओं की सूची में और अधिक मजबूत स्थिति प्राप्त करेंगे। भारतीय राजनीति में लंबे कार्यकाल का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि लोकतंत्र में जनता हर चुनाव में सरकार को बदलने का अधिकार रखती है। ऐसे में यदि कोई नेता लगातार वर्षों तक जनता का समर्थन बनाए रखता है तो यह उसकी राजनीतिक क्षमता और जनस्वीकार्यता को दर्शाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू लगभग </span>16<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष </span>286<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन तक लगातार प्रधानमंत्री रहे। यह रिकॉर्ड आज भी सबसे लंबा लगातार प्रधानमंत्रित्व माना जाता है। नेहरू ने </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> अगस्त </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> से लेकर </span>27<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई </span>1964<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक देश का नेतृत्व किया। उनके सामने विभाजन की त्रासदी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक कमजोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्थाओं के निर्माण और अंतरराष्ट्रीय पहचान जैसी अनेक चुनौतियाँ थीं। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव मजबूत करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सार्वजनिक क्षेत्र के विकास और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का प्रयास किया। आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी ओर नरेंद्र मोदी ऐसे समय में प्रधानमंत्री बने जब भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका था। उनके सामने चुनौती थी कि भारत को आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामरिक और तकनीकी दृष्टि से और अधिक शक्तिशाली बनाया जाए। मोदी ने राष्ट्रवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक पहचान और मजबूत नेतृत्व को अपनी राजनीति का मुख्य आधार बनाया। उन्होंने विदेश नीति में भी सक्रियता दिखाई। अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फ्रांस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जापान और खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंधों को नई गति मिली। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली दिखाई देने लगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी सरकार के दौरान अनेक कल्याणकारी योजनाएँ भी शुरू की गईं। जन धन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों के बैंक खाते खोले गए। उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। आयुष्मान योजना के जरिए गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने का प्रयास हुआ। स्वच्छ भारत अभियान ने स्वच्छता को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया। कोरोना महामारी के दौरान मुफ्त राशन योजना ने करोड़ों लोगों को राहत दी। इन योजनाओं ने गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के बीच मोदी सरकार की लोकप्रियता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि विपक्ष लगातार सरकार की आलोचना भी करता रहा है। बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि संकट और सामाजिक तनाव जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की गई। कई विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक असमानता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराना आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे कठिन कार्यों में से एक होगा। किसान आंदोलन ने भी यह दिखाया कि बड़े जनसमूह सरकार की नीतियों का विरोध कर सकते हैं। लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद नरेंद्र मोदी की राजनीतिक लोकप्रियता लंबे समय तक बनी रही।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक शक्ति भी मोदी की सफलता का एक बड़ा कारण रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा का विशाल कार्यकर्ता तंत्र बूथ स्तर तक सक्रिय रहता है। चुनाव प्रबंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रचार अभियान और मतदाताओं तक सीधा संपर्क भाजपा की विशेषता बन चुके हैं। इसके अलावा विपक्ष की एकजुटता की कमी ने भी भाजपा को लाभ पहुँचाया। कई राज्यों में विपक्षी दल आपसी मतभेदों के कारण मजबूत चुनौती प्रस्तुत नहीं कर सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक राजनीति में संचार माध्यमों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है। नरेंद्र मोदी ने डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया। सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता ने उन्हें युवाओं और नए मतदाताओं से सीधे जोड़ने में सहायता की। रेडियो कार्यक्रमों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीडियो संदेशों और विशाल जनसभाओं के माध्यम से उन्होंने लगातार जनता के साथ संवाद बनाए रखा। यह शैली पहले के प्रधानमंत्रियों से अलग मानी जाती है। नेहरू के समय में संचार के साधन सीमित थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि आज राजनीति का बड़ा हिस्सा डिजिटल मंचों पर भी संचालित होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास केवल आँकड़ों से नहीं बनता बल्कि जनमानस की स्मृतियों से भी बनता है। जवाहर लाल नेहरू को आधुनिक भारत की संस्थाओं के निर्माण के लिए याद किया जाता है। इंदिरा गांधी को निर्णायक नेतृत्व और राजनीतिक साहस के लिए जाना जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी को संवाद और सहमति की राजनीति का प्रतीक माना जाता है। नरेंद्र मोदी की छवि एक ऐसे नेता की बनी है जिसने भारतीय राजनीति को अत्यधिक केंद्रीकृत नेतृत्व की दिशा दी और राष्ट्रवाद को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में स्थापित किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">10<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह दिन भारतीय राजनीति में नेतृत्व की निरंतरता और बदलते जनादेश दोनों का प्रतीक बन रहा है। लोकतंत्र में लंबे समय तक सत्ता में बने रहना असाधारण उपलब्धि माना जाता है। यह केवल चुनावी जीत नहीं बल्कि जनता के विश्वास का संकेत भी होता है। नरेंद्र मोदी के समर्थक इसे मजबूत नेतृत्व की विजय मानते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि आलोचक इसे भारतीय राजनीति में व्यक्तित्व आधारित राजनीति के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखते हैं। लेकिन दोनों पक्ष इस बात से सहमत दिखाई देते हैं कि पिछले एक दशक से अधिक समय में भारतीय राजनीति का केंद्र नरेंद्र मोदी ही रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य में इतिहास नरेंद्र मोदी के कार्यकाल का मूल्यांकन कई आधारों पर करेगा। आर्थिक विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक समरसता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेश नीति की उपलब्धियाँ और आम नागरिक के जीवन में आए बदलाव इन सबके आधार पर उनके शासन को परखा जाएगा। यदि आने वाले वर्षों में भारत आर्थिक और तकनीकी शक्ति के रूप में और मजबूत होता है तो मोदी के कार्यकाल को विशेष महत्व दिया जाएगा। वहीं यदि बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई और सामाजिक असंतोष जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं तो आलोचनाएँ भी तेज होंगी। यही लोकतंत्र की विशेषता है कि किसी भी नेता का अंतिम मूल्यांकन इतिहास और जनता दोनों मिलकर करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रकार </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल एक तारीख नहीं बल्कि भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण दौर का प्रतीक बनने जा रही है। यह दिन उस राजनीतिक यात्रा की याद दिलाता है जिसमें एक साधारण परिवार से निकला व्यक्ति देश का सबसे प्रभावशाली नेता बनता है और लगातार वर्षों तक सत्ता में बना रहता है। नेहरू से मोदी तक की यह यात्रा भारतीय लोकतंत्र की शक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनता के बदलते विश्वास और नेतृत्व की निरंतर बदलती परिभाषा को भी दर्शाती है। भारतीय राजनीति में रिकॉर्ड बनते और टूटते रहेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ क्षण ऐसे होते हैं जो इतिहास में स्थायी रूप से दर्ज हो जाते हैं। </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को लेकर चल रही चर्चा भी भारतीय लोकतंत्र के ऐसे ही एक ऐतिहासिक क्षण की ओर संकेत करती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180808/a-new-record-is-going-to-be-registered-in-the</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180808/a-new-record-is-going-to-be-registered-in-the</guid>
                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:18:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/178054939444.webp"                         length="46708"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और कृषि पर संकट बढ़  रहा है, कृषि वैज्ञानिक - प्रोफेसर प्यारेलाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</p><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हिमाचल प्रदेश में राजकीय कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे डॉक्टर अशोक कुमार प्यारेलाल ने कहा है कि मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और किसी  पर संकट बढ़ रहा है। लगातार जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के मध्य नजर कृषि पर इसका क्या असर पड़ेगा इस संबंध में उन्होंने इलाहाबाद ब्यूरो के प्रमुख दयाशंकर त्रिपाठी से विस्तार से बातचीत की जिस पर उन्होंने कृषि पर पड़ने वाले दुष्परिणाम के कई कारण बताएं।उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण वनों की कटाई और जैव विविधता का ह्रास जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां अब दूर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180800/climate-change-water-shortage-soil-erosion-the-crisis-on-our"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260605-wa0071.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</p><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हिमाचल प्रदेश में राजकीय कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे डॉक्टर अशोक कुमार प्यारेलाल ने कहा है कि मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और किसी  पर संकट बढ़ रहा है। लगातार जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के मध्य नजर कृषि पर इसका क्या असर पड़ेगा इस संबंध में उन्होंने इलाहाबाद ब्यूरो के प्रमुख दयाशंकर त्रिपाठी से विस्तार से बातचीत की जिस पर उन्होंने कृषि पर पड़ने वाले दुष्परिणाम के कई कारण बताएं।उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण वनों की कटाई और जैव विविधता का ह्रास जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां अब दूर की समस्या नहीं रही यह सब सीधे हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैंजैसे अत्यधिक मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव और घटती वायु गुणवत्ता।ऐसे परिवेश में हमारे किसान और कृषि पर संकट बढता जा रहा है।</p><p style="text-align:justify;">मौसम के बदलते तेवर से  किसानों बागवानो को  जहां बहुत अधिक लाभ  नहीं होने वाला है। वहीं दूसरी तरफ इस साल का मानसून आम जनता को  भी  परेशान करेगा। एक अनुमान के अनुसार इस साल सामान्य से कम वर्षा होगी और साथ में अल नीनो का प्रभाव  बहुत  ख़तरनाक होगा सूखा और गर्मी   बढ़ेगी जिसके कारण खरीफ की फसलों का उत्पादन काम होगा विशेष तौर पर उन क्षेत्रों में जहां फसलों की सिंचाई की सुविधा नही है वहां पर बिजाई देर से होगी।और उत्पादन भी कम होगा।और देश में महंगाई बढ़ेगी । आमदनी पिछले साल की अपेक्षा इस साल कम हहोगी।<br /></p><p style="text-align:justify;">आज विश्व का हर देश ईरान इजरायल अमेरिका युद्ध से भयंकर महंगाई के मोहाने पर खड़ा हो गया है। परन्तु युद्ध लड़ने वालों को मौसम मानसून  महंगाई और जनता से सरोकार नहीं है।  बस अपने को शक्तिशाली दिखाने की होड़ विश्व पटल पर लगी है कि मैं महान विजेता हूं ।इस युद्ध से भारत भी बहुत बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है।देश में महंगाई बढ़ रही है ऊर्जा का दाम बढ़ रहा है।तो वहीं यह मानसून भारत पर अलग तरह से कहर बरपाने का संकेत देकर भारत की गरीब जनता को और गरीबी में जीने के लिए मजबूर कर रहा है</p><p style="text-align:justify;">भारत को तीन  तरफ से मार पड़ेगा ।खराब मानूसन  खाद  की कमी और ऊर्जा ।भले टी वी डिवेट  पर सरकार के समर्थक  लोग आंकड़ों के जाल में जनता को फंसाते रहे परन्तु सच्चाई इन  आंकड़ों से इतर है। युद्ध कब तक चलेगा यह अगस्त या आगे तक भी चल सकता है फिर देश में नोट बन्दी की तरह हर चीज पर प्रतिबंध जैसे बैंकों से कम रुपया निकालना तेल गैस पर प्रतिबंध हर चीज का सीमित उपयोग।आदि  क ई तरह के उपाय करने पड़ सकते हैं। खाद के संकट को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने एक जुन से तीस जुन तक खेत बचाओ अभियान शुरू करने जा रहा है जिसमे कृषि वैज्ञानिक किसानों को रासायनिक खाद का उपयोग कम करने हरी खाद को बढ़ावा देने याद गोबर की खाद का अधिक उपयोग करने के फायदे बतायेंगे ।</p><p style="text-align:justify;">किसानों को अपने खेत की कम होती उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए कौन-सा सही तरीका लाभ कारी होगा साथ में खेती में लागत कम लगे और उत्पादन बढे यह एक सही कदम है।अब किसानों को आधुनिक खेती के साथ पुरानी खेती को अपनाने की जरुरत है जिसमें हरी खाद कमृपोष्ट खाद का बहुत महत्व है परन्तु बहुत से छोटे मझोले किसानों के पास पशुधन यानि बैल गाय भैंस नहीं के बराबर है जिससे गोबर की खाद बनेऔर खेत बचे साथ में उत्पादन भी बढ़े।सत्तर के दशक में कम्पोस्ट खाद बनाने की सरकार द्वारा योजना चला ई ग ई किसानों ने  गोबर गैस  प्लांट लगवाया खाद का उपयोग किया खेती से मजदुरो का पलायन होना शुरू हुआ पशुधन कम हुए तो गोबर गैस प्लांट बंद होते गये।अब खेती ट्रैक्टर रासायनिक खाद पर निर्भर है।</p><p style="text-align:justify;">हिमाचल के साथ देश भर में पिछले दो महीने से रुक रुक कर बे मौसमी बारिश ओला तेज हवा के कारण किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है । जनहानि भी हुई है।मौसम की यह बेरूखी  ऊपरी हिमाचल में सेव  के किसानों और अन्य फल के किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है  । यह भी  एक अनुमान है कि हिमाचल प्रदेश वर्ष में 5000 से 6000 करोड़ का सेव  का कारोबार  हर साल होता है। जो इस साल  बे मौसम बरसात ओलावृष्टि से सेव का उत्पादन कम होने का अनुमान है। जिसके कारण  किसानों को 1500 से 2000 करोड़ का नुकसान होगा।  कम पैदावार का नुकसान आम जनता को भी उठाना पड़ता है कि फल सब्जियां अनाज दूध तेल सब महगे दामो  पर बिकेंगे गरीब और गरीब होता जाएगा व्यापारी अमीर होता जाएगा।<br /></p><p style="text-align:justify;">आईएमडी के अनुसार बरसात  कम हो सकती है प्रशांत महासागर  में अल नीनो का प्रभाव बढ़ रहा   है। मानसून इस साल जल्दी आयेगा ।उत्तर और मध्य भारत में कम बारिश हो सकती है खेती में फसलों के साथ फल  जैसे सेव  नाशपाती  का उत्पादन के साथ  बिजली उत्पादन कम हो सकता है।  मानसून कमजोर होने पर सीधा असर  फसलो  किसानों की आय और खाद्यान्न की कीमतों पर पड़ता है।   कमजोर मानसून से कम पैदावार होगी खरीफ की फसलों के साथ सब्जी फल  महंगें होगे। सिंचाई की लागत भी बढेगी सरकार का प्रयास रहा है कि जल संचयन को बढ़ावा  जाए।  यह प्रयास बहुत अच्छा नहीं हो पाया गांव-गांव अमृत सरोवर बन रहा है।  परंतु लाभ उतना नहीं मिलता है जितनी उम्मीद सरकार कर रही है अमृतसरोवर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है यदि किसानों को यह जानकारी पहले से हो कि मानसून कमजोर है और कम वर्षा होगी तो  अधिक पानी की फसलों की जगह कम पानी की फसलो जैसे बाजार ज्वार मक्का उड़द मूंग  तिल अन्य मिलट की फसलों की बिजाई करने से बहुत लाभ हो सकता है ।  </p><p style="text-align:justify;">सरकार को इन फसलों की खरीद  को भी सुनिश्चित करना होगा।  अरहर  मूग उड़द बाजरा के साथ मिश्रित खेती अधिक लाभकारी होगी ।जब मानसून कमजोर होता है तब इस तरह की खेती किसानों के लिए लाभदायक होती  है। इस वर्ष   ओलावृष्टि वारिस जो  हिमाचल और भारत के अन्य प्रदेशों में हो रही है।  जिसके परिणामस्वरूप  सबसे ज्यादा सेवव फल   उत्पादक किसान प्रभावित हो रहे हैं ।इस बदले मानसून से हिमाचल  मे सेव  का उत्पादन 50 से 70% कम होगा। बे मौसमी  बारिश से सेव  के पौधों में फूल काम हो गए हैं । मधुमक्खियां  से परगण भी काम हुआ है ।  हिमाचल में ढाई लाख परिवार बागवानी विशेष तौर पर सेव के ऊपर  निर्भर है।<br /></p><p style="text-align:justify;">भारत कृषि प्रधान देश है खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर  है तो दूध उत्पादन में पहले पायदान पर दुनिया में टिका हुआ है । सब्जी फल उत्पादन में भी दुनिया में अपना स्थान बनाया हुआ है।  परंतु अभी तक हमारे वैज्ञानिकों ने मौसम के अनुकूल या कम बारिश होने पर उस तरह के बीजों का ईजाद नहीं कर पाए हैं जो कम पानी में अधिक पैदावार दे सके। कुछ किस्में हैं  परन्तु उतना लाभदायक नहीं है। कमजोर मानसुन होने पर खाघानो के साथ फल सब्जियों का उत्पादन कम न हो । और देश में कम उत्पादन के कारण महंगाई न बढ़े परन्तु ऐसा नहीं हो पा रहा है।</p><p style="text-align:justify;"> किसानों को भी खेती से घाटा न हो वह भी  राहत महसुस करें कि कमजोर मानसून होने पर आय कम नहीं होंगी बस फसल बदल दे तो निश्चित ही आय होगी। यह देखा गया है कि धान लगाने वाला किसान जल्दी फसल नहीं बदलते है । वह धान पर ही टिका रहता है धान में अधिक सिंचाई के कारण लागत बढ़ जाता है।बाजार में सही मूल्य नहीं मिलता  है।तब किसानो  को नुकसान उठाना ही होता है ।अगर मानुसन के अनुरूप किसान सही फसल का चयन कर लेता है तो कभी भी किसान नुकसान में नहीं होगा बस उसके उत्पाद का सही बाजार मूल्य सरकार दे।<br /></p><p style="text-align:justify;">खरीफ के मौसम में  अधिकांश तौर पर पंजाब हरियाणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजस्थान के किसान धान की खेती करते हैं कम बारिश के कारण धान की खेती में अधिक सिंचाई की जरूरत होगी जो महंगे डीजल के कारण पैदावार में लागत  मूल्य को बढ़ाता है।बाजार में मूल्य कम मिलता है। कमजोर मानसून से होने वाले नुकसान से बचने के लिए बस मोटे अनाजों की खेती है  एक मात्र सही उपाय है।जिसमें पानी की बहुत कम जरुरत होती है। मिश्रित खेती जैसे बाजरा उड़द अरहर बाजरा अहरह उड़द की खेती लाभ कारी होगी।। </p><p style="text-align:justify;">इस तरह की खेती से डीजल और  बिजली की बचत भी हो सकती है।  साथ में रसायनिक खाद की जरुरत भी कम पड़ती है।इस वर्ष किसानों पर तीन तरह से   मार पड़ेगी पहली मार कि मानसुन कमजोर है। बारिश कम होंगी। दुसरी मार खाद भी कम मात्रा में मिलेगा।  तीसरा ऊर्जा की कमी ।कारण ईरान अमेरिका इजरायल युद्ध से देश में यूरिया के साथ साथ पोटाश फास्फोरस जैसे खादों का जो आयात होता वह भी कम होगा जिससे किसानों को खरीफ के फसलों के लिए भरपूर रसायनिक खाद नहीं मिलेगा।</p><p style="text-align:justify;">पिछले साल देश ने बड़े शोर के साथ मोटे अनाजों के उत्पादन और उपयोग पर बहुत गोष्ठी और सेमीनार करके किसानों को जागरूक किया और इन मोटे अनाजों के उपयोग से लाभ के बारे में भी खुब चर्चा हुई परन्तु उत्पादन बढ़ा कितना इस पर बात उसके बाद नही हुआ। नहीं यह बताया गया कि देश में क्या यह भोजन की थाली में आया या बस पशुचारा में गया मुफ्त अनाज योजना में मोटे अनाज को वितरित किया गया परन्तु अधिकांश परिवारो  को जो मुफ्त में दिया गया उसे बाजार में बेच दिये।अब देश को मुफ्त अनाज वितरण को बन्द करें।<br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>विचारधारा</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180800/climate-change-water-shortage-soil-erosion-the-crisis-on-our</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180800/climate-change-water-shortage-soil-erosion-the-crisis-on-our</guid>
                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 23:16:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/img-20260605-wa0071.jpg"                         length="63555"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोचिंग सेंटर फायरिंग मामले में खान सर की बढ़ीं मुश्किलें</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>पटना।</strong> बिहार के चर्चित शिक्षक और यूट्यूबर <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">(खान सर)</span></span></strong> एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पटना के कदमकुआं क्षेत्र स्थित कोचिंग संस्थान से जुड़े फायरिंग मामले में दर्ज एफआईआर के बाद कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। ताजा घटनाक्रम में खान सर ने फिलहाल अदालत में आत्मसमर्पण नहीं करने का फैसला लिया है और 8 जून को अग्रिम जमानत (एंटिसिपेटरी बेल) के लिए याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">खान सर के अधिवक्ता अरविंद कुमार महुआर ने बताया कि उनके मुवक्किल फिलहाल पटना सिविल कोर्ट में सरेंडर नहीं करेंगे। मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत अग्रिम जमानत की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180775/khan-sirs-problems-increased-in-coaching-center-firing-case"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/ljv6icj8_khan-sir_625x300_02_june_26.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पटना।</strong> बिहार के चर्चित शिक्षक और यूट्यूबर <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">(खान सर)</span></span></strong> एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पटना के कदमकुआं क्षेत्र स्थित कोचिंग संस्थान से जुड़े फायरिंग मामले में दर्ज एफआईआर के बाद कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। ताजा घटनाक्रम में खान सर ने फिलहाल अदालत में आत्मसमर्पण नहीं करने का फैसला लिया है और 8 जून को अग्रिम जमानत (एंटिसिपेटरी बेल) के लिए याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">खान सर के अधिवक्ता अरविंद कुमार महुआर ने बताया कि उनके मुवक्किल फिलहाल पटना सिविल कोर्ट में सरेंडर नहीं करेंगे। मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत अग्रिम जमानत की अर्जी दायर की जाएगी। अदालत के निर्णय के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व पटना के मुसल्लहपुर हाट स्थित कोचिंग संस्थान के बाहर फायरिंग की घटना हुई थी, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए थे। घटना के बाद बड़ी संख्या में छात्र संस्थान के बाहर एकत्र हो गए थे और पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकरण में पुलिस ने खान सर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं और संबंधित पक्षों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, खान सर के समर्थकों का कहना है कि उन्हें साजिश के तहत विवाद में घसीटा जा रहा है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। मामले ने शिक्षा जगत और छात्र समुदाय में व्यापक चर्चा पैदा कर दी है। अब सबकी निगाहें 8 जून को दाखिल होने वाली अग्रिम जमानत याचिका और अदालत के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत के आदेश के बाद मामले की दिशा काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180775/khan-sirs-problems-increased-in-coaching-center-firing-case</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180775/khan-sirs-problems-increased-in-coaching-center-firing-case</guid>
                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 19:45:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/ljv6icj8_khan-sir_625x300_02_june_26.webp"                         length="46134"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रणवीर सिंह और FWICE विवाद पहुंचा कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">बॉलीवुड अभिनेता <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Ranveer Singh</span></span> एक नए विवाद को लेकर सुर्खियों में हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार रणवीर सिंह ने फिल्म इंडस्ट्री की संस्था FWICE (Federation of Western India Cine Employees) के खिलाफ कानूनी नोटिस भेजा है। मामला उनकी आगामी फिल्म <em>Don 3</em> से जुड़े विवाद और गैर-सहयोग निर्देश से संबंधित बताया जा रहा है। अब यह मामला अदालत तक पहुंच गया है, जिससे फिल्म इंडस्ट्री में नई बहस छिड़ गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार विवाद के बाद कई निर्माता और फिल्म संगठनों की नजर इस मामले पर टिकी हुई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का फैसला भविष्य में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180773/ranveer-singh-and-fwice-dispute-reaches-court"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(3).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बॉलीवुड अभिनेता <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Ranveer Singh</span></span> एक नए विवाद को लेकर सुर्खियों में हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार रणवीर सिंह ने फिल्म इंडस्ट्री की संस्था FWICE (Federation of Western India Cine Employees) के खिलाफ कानूनी नोटिस भेजा है। मामला उनकी आगामी फिल्म <em>Don 3</em> से जुड़े विवाद और गैर-सहयोग निर्देश से संबंधित बताया जा रहा है। अब यह मामला अदालत तक पहुंच गया है, जिससे फिल्म इंडस्ट्री में नई बहस छिड़ गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार विवाद के बाद कई निर्माता और फिल्म संगठनों की नजर इस मामले पर टिकी हुई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का फैसला भविष्य में कलाकारों और फिल्म संगठनों के संबंधों पर प्रभाव डाल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Featured</category>
                                            <category>खेल मनोरंजन</category>
                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180773/ranveer-singh-and-fwice-dispute-reaches-court</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180773/ranveer-singh-and-fwice-dispute-reaches-court</guid>
                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 19:39:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/images-%283%29.jpg"                         length="76869"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जर्मनी की राजनीति में बड़ा झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और विश्व राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले जर्मनी को इस सप्ताह एक बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) की अस्थायी सदस्यता के चुनाव में जर्मनी को हार का सामना करना पड़ा, जिससे देश की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए मतदान में जर्मनी आवश्यक समर्थन जुटाने में असफल रहा। पश्चिमी यूरोपीय समूह की सीटों के लिए हुए चुनाव में ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल को सफलता मिली, जबकि जर्मनी पहली बार इस तरह की महत्वपूर्ण हार का सामना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180771/big-shock-in-german-politics"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/76959563_1006.webp" alt=""></a><br /><p>यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और विश्व राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले जर्मनी को इस सप्ताह एक बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) की अस्थायी सदस्यता के चुनाव में जर्मनी को हार का सामना करना पड़ा, जिससे देश की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए मतदान में जर्मनी आवश्यक समर्थन जुटाने में असफल रहा। पश्चिमी यूरोपीय समूह की सीटों के लिए हुए चुनाव में ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल को सफलता मिली, जबकि जर्मनी पहली बार इस तरह की महत्वपूर्ण हार का सामना कर रहा है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में जर्मनी की विदेश नीति, विशेषकर यूक्रेन युद्ध, इज़राइल समर्थन और विदेशी सहायता बजट में कटौती जैसे मुद्दों ने कई देशों को उससे दूर कर दिया। यही कारण रहा कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के अनेक देशों का अपेक्षित समर्थन जर्मनी को नहीं मिल सका।</p>
<p>जर्मनी के विदेश मंत्री और सरकारी अधिकारियों ने इस परिणाम पर निराशा व्यक्त की है। सरकार का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखेगी और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में योगदान देती रहेगी। हालांकि विपक्षी दलों ने इसे सरकार की कूटनीतिक विफलता करार दिया है और विदेश नीति की समीक्षा की मांग की है।</p>
<p>इस हार के बाद जर्मनी में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप और वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के बीच संतुलन बनाने में जर्मनी अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाया। इसके चलते उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को झटका लगा है।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना केवल एक चुनावी हार नहीं बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन का संकेत भी है। आने वाले समय में जर्मनी को अपनी विदेश नीति, विकास सहयोग कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को और मजबूत करना होगा ताकि वह विश्व मंच पर अपनी प्रभावशाली भूमिका बनाए रख सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180771/big-shock-in-german-politics</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180771/big-shock-in-german-politics</guid>
                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 19:32:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/76959563_1006.webp"                         length="64846"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        