विभाग की कृपा बरकरार, रजिस्ट्रेशन पैथोलोजिस्ट की नहीं दरकार /

फर्जी पैथोलॉजी संचालक डाल रहे मरीजों की जेब मे डाका / उमेश सिंह (ब्यूरो चीफ ) भदोही । मानकों को धता बताकर पैथोलॉजी सेन्टर खोलकर गरीबों के जेब पर डाका किसके रहमों करम से डाला जा रहा है यह क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। पैथोलॉजी सेंटर खोलने के लिए सरकारी नियम कायदों

फर्जी पैथोलॉजी संचालक डाल रहे मरीजों की जेब मे डाका /

उमेश सिंह (ब्यूरो चीफ )

भदोही ।

मानकों को धता बताकर पैथोलॉजी सेन्टर खोलकर गरीबों के जेब पर डाका किसके रहमों करम से डाला जा रहा है यह क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। पैथोलॉजी सेंटर खोलने के लिए सरकारी नियम कायदों के अनुसार जरूरी है कि पैथोलॉजी का रजिस्ट्रेशन हो तथा उसमें एक पैथोलॉजिस्ट होना अति आवश्यक है

जिसकी हस्ताक्षर युक्त रिपोर्ट ही मान्य होती है इसी के साथ – साथ पैथोलॉजी में जितने भी कर्मचारी कार्यरत हों उनके पास लैब का डिप्लोमा होना जरूरी है अर्थात सभी को टेक्नीशियन होना चाहिए। इन सारे नियम कायदों को धता बताकर नगर में कई पैथोलॉजी सेंटरों का संचालन किया जा रहा है

जहां पर सीबीसी, एक्स-रे, टाइफाइड, मलेरिया,डेंगू सहित विभिन्न जांचें निर्धारित दरों से दोगुना पर की जाती हैं। परिणाम स्वरूप पैथोलॉजी संचालकों तथा अपनी पसंदीदा पैथोलॉजी में जांच हेतु भेजने वाले डॉक्टरों की तो बल्ले – बल्ले हैं लेकिन गरीब, मजदूरों एवं कृषकों की जेबों पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है।

गौरतलब यह है कि अपनी पैथोलॉजी को चमकाने हेतु संचालकों में भी चढ़ा उतरी का बाजार दिन प्रतिदिन फल फूल रहा है यदि एक पैथोलॉजी संचालक किसी डॉक्टर को 35 प्रतिशत कमीशन दे रहा है तो दूसरा 45 की लालच देकर अपनी तरफ खींचना चाहता है परिणाम स्वरूप यह बोझ मरीज को ही उठाना पड़ता है

क्योंकि डॉक्टर जिस पैथोलॉजी में मरीज को जांच कराने हेतु भेजेगा मरीज की मजबूरी होगी कि वहीं जांच कराएं अन्यथा डॉक्टर रिपोर्ट सही ना होने की बात कहकर पुनः जांच करवाएगा। इसलिए मरीज को जाना उसी पैथोलॉजी में पड़ता है जहां डॉक्टर भेजते हैं मानक के विपरीत इन पैथोलॉजी संचालकों के ऊपर किसका हाथ है यह क्षेत्र में चर्चा का विषय है।

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