कीचड़युक्त जर्जर मार्ग पर चलने को मजबूर ग्रामीण

स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो उन्नाव। पौराणिक परियर घाट पर पहुंचने के लिए कीचड़युक्त रास्ते से गुजरना पड़ता है फिर चाहे गांव के बाशिंदे हो या फिर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु, सभी को इसी रास्ते से होकर जाना पड़ता है।सदर तहसील क्षेत्र के परियर-बिठूर मार्ग से गंगा नदी तक जाने वाले मार्ग पर माना बंगला गांव

स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो उन्नाव। पौराणिक परियर घाट पर पहुंचने के लिए कीचड़युक्त रास्ते से गुजरना पड़ता है फिर चाहे गांव के बाशिंदे हो या फिर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु, सभी को इसी रास्ते से होकर जाना पड़ता है।सदर तहसील क्षेत्र के परियर-बिठूर मार्ग से गंगा नदी तक जाने वाले मार्ग पर माना बंगला गांव के अंदर से गंगातट पर पहुंचने के लिए एक ही मार्ग है। इसी मार्ग से गंगा स्नान व अपनो का अतिंम संस्कार करने के लिए आने वाले लोगों को बदतर स्थिति से जूझना पडता है। गांव के बीच से निकले इस दुर्दशाग्रस्त मार्ग से ही गुजरना ग्रामीणों की नीयति बन गयी है। ग्रामीणों के अनुसार पहले स्थिति इतनी खराब नहीं थी जबसे शासन द्वारा गंगा नदी में बालू खनन का पट्टा आवंटित किया गया

कीचड़युक्त जर्जर मार्ग पर चलने को मजबूर ग्रामीण
कीचड़युक्त जर्जर मार्ग पर चलने को मजबूर ग्रामीण

तबसे प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ट्रक डम्पर बालू लादकर इसी रास्ते से निकलने लगे जिसका नतीजा है कि कच्चा पक्का मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया और बारिश के चलते हर समय कीचड भरा रहता है। गांव के अंदर से गुजरकर गंगातट पर जाने वाले मार्ग पर हजारों की संख्या में ग्रामीणों का आना जाना लगा रहता है। मार्ग की दुर्दशा इतनी ज्यादा है कि वाहन तो दूर पैदल निकलना भी जोखिम से कम नहीं है जरा सी चूक हुई कि कीचड में गिरना तय है फिर भी जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। पूर्व जिला अधिकारी द्वारा पिछले साल अक्टूबर माह में चैपाल लगाई गयी थी और उन्हें बताया गया था कि बालू खनन का पट्टा आवंटित किया गया है जिससे राजस्व आयेगा और उसी पैसे से गांव का विकास कराया जायेगा।

फिर लोगों को कोई समस्या नहीं होगी। अब ग्रामीण पूंछ रहे हैं कि क्या यही विकास का पैमाना है कि हर समय जोखिम उठाना पड़ता है गांव में कोई बीमार पड जाए तो पैदल निकलने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। एक सप्ताह बाद भदई अमावस्या है और उसके एक दिन पहले ही लोगों का आना शुरू हो जाता है। मार्ग की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है इस स्थिति में किस तरह से लोग पहुंचेगे, शायद इसका जबाब देने वाला कोई नहीं है। माना बंगला गांव गंगा की तलहटी में बसा हुआ है और यहां के लोगों की आजीविका गंगातट पर आने वाले श्रद्धालुओं पर निर्भर रहती है लेकिन मार्ग की दुर्दशा देखकर श्रद्धालु भी आने से कतराने लगे हैं और बडी संख्या में श्रद्धालु बिठूर घाट की ओर निकल जाते हैं।

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