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उत्तराखण्ड एंटरेप्रेन्योरियल लर्निंग के ज़रिए 4000 से अधिक सरकारी स्कूलों को बनाएगा फ्यूचर-रैडी

छात्रों में जीवनकौशल एवं उद्यमिता की सोच को बढ़ावा देने वाला पहला राज्य देहरा दून बन गया है

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दया शंकर त्रिपाठी 
 
उद्यम लर्निंग फाउन्डेशन के साथ साझेदारी में सरकारी स्कूलों के कक्षा 6 से 12 के छात्रों में जीवनकौशल एवं उद्यमिता की सोच को बढ़ावा देने वाला पहला राज्य देहरा दून बन गया है।उत्तराखण्ड मिडल स्कूल की शिक्षा में एक नया दृष्टिकोण शामिल करने जा रहा है, जहाँ कम उम्र से ही छात्रों को वास्तविक दुनिया का कौशल प्रदान कर उनमें उद्यमिता की सोच विकसित की जाएगी।
 
उत्तराखण्ड के स्टेट काउन्सिल ऑफ एजुकेशनल रीसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) ने 4000 से अधिक स्कूलों में कौशल बोध प्रोग्राम की शुरूआत के लिए उद्यम लर्निंग फाउन्डेशन के साथ साझेदारी की हैं। इस साझेदारी का फायदा नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) 2020 के अनुरूप कक्षा 6 से 8 के छात्रों को मिलेगा। 
 
इस पहल के साथ, उत्तराखण्ड भारत का पहला राज्य बन गया है, जो सरकारी स्कूलों के कक्षा 6 से 12 के छात्रों को फ्यूचर-रैडी स्किल्स प्रदान कर उनमें उद्यमिता की सोच विकसित करता है। कौशल बोध के साथ इस यात्रा की शुरूआत मिडल स्कूल से ही हो जाती है और इसके बाद यह कौशलम प्रोग्राम के रूप में आगे बढ़ती है,।
 
जिसका संचालन 2200 से अधिक स्कूलों में कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए पहले से किया जा रहा है। इस प्रोग्राम के तहत छात्रों को वास्तविक उद्यम बनाने, इन्हें संचालित करने और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से निपटने के गुर सिखाए जाते हैं।
 
ये सभी विशेषताएँ आगे चलकर उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित होती हैं, फिर चाहे वे करियर का कोई भी रास्ता चुनें। इसमें लाइफ फॉर्म, मशीन एंड मटेरियल्स और ह्युमन सर्विसेस में नौ मोड्यूल्स शामिल हैं। क्लासरूम में छात्र टीम में काम करते हुए सरल उद्यम बनाते हैं, सीखते हैं कि किस तरह उनके आइडियाज़ को वास्तविक प्रोडक्ट्स एवं सर्विसेस में बदला जा सकता है, साथ ही इस बात को समझते हैं कि फैसले का असर किस तरह परिणाम पर पड़ता है। इस तरह छात्रों की सोच पैसिव लर्निंग के बजाए एक्टिव क्रिएशन में बदल जाती है।
 
बड़ी कक्षाओं में कौशल प्रोग्राम के परिणाम पहले से दिखने लगे हैं। कक्षा 11 के पाठ्यक्रम में छात्रों ने 1500 से अधिक बिज़नेस आइडियाज़ पर काम किया,  टॉप 47 आइडियाज़ को राज्य-स्तरीय प्रदर्शनियों में पेश किया गया। इसके बाद 10 से अधिक छात्रों ने अपने उद्यमों को जारी रखा है और अब इनसे कमा भी रहे हैं।
 
ऐसे ही एक छात्र हैं जीआईसी नथुवाला के ध्रुव, जिन्होंने फैबइंडिया के साथ साझेदारी की है और अपने डिज़ाइन किए हुए परिधान सप्लाई करते हैं। इसी तरह जीआईसी बादवाला के समीर डेयरी प्रोडक्ट्स तैयार कर इन्हें आस-पास के मार्केट में सप्लाई करते हैं। इस तरह मिडल स्कूल से शुरू हुई यात्रा ने उन्हें कम उम्र से ही अपना काम करने के लिए तैयार किया।
 
मेकिन माहेश्वरी, सीईओ एवं सह-संस्थापक, उद्यम लर्निंग फाउंडेशन, ने कहा,  इस तरह की छह साल की लर्निंग उन्हें वास्तविकता के लिए तैयार करती है। वे खुद संभावनाओं की तलाश करने लगते हैं, विकल्पों को चुन कर इन पर काम करने लगते हैं।
 
शुरूआत में उन्हें बताया जाता है कि उन्हें क्या करना है, धीरे-धीरे उनमें आत्मविश्वास आने लगता है कि ‘मैं इसे कर सकता हूँ’, और यही सोच स्कूल के बाद भी उनके साथ बनी रहती है और वे इस अनिश्चित दुनिया में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार हो जाते हैं।’’ सुनील भट्ट, प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर- कौशल बोध, एससीईआरटी उत्तराखण्ड, ने कहा, “एनईपी 2020 के अनुरूप कौशल बोध मिडल स्कूल में ही व्यावसायिक शिक्षा को शामिल करता है,।
 
बंदना गरब्याल, डायरेक्टर, एकेडमिक, रीसर्च एंड ट्रेनिंग, ने कहा “कौशल बोध, व्यावसायिक एवं कौशल आधारित लर्निंग को मिडल स्कूल में शामिल कर एनईपी 2020 के विज़न को सशक्त बनाता है। यह प्रोग्राम क्लासरूम लर्निंग में वास्तविक दुनिया के ऐप्लीकेशन्स शामिल करता है, साथ ही अध्यापकों को ऐसे टूल्स उपलब्ध कराता है, जिससे वे छात्रों में समस्या को हल करने और ज़िम्मेदारी की भावना विकसित कर पाते हैं। उत्तराखण्ड के लिए यह सरकारी स्कूलों में शिक्षा को अधिक प्रासंगिक, व्यवहारिक एवं फ्यूचर-रैडी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।“

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