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शिबिर से भागे कर्मी, फॉर्म नहीं लेने पर हुआ हंगामा
अधिकारी बने उदासीन, रस्मअदायगी बना राजस्व महाअभियान शिबिर
सुपौल ,ब्यूरो
सरकार के महत्वाकांक्षी योजनाओं में सुमार राजस्व महाअभियान शिबिर को विभागीय अधिकारी ही पलीता लगाने में किस तरह संलिप्त है इसकी बानगी शनिवार को देखने को मिली जब बिहार सरकार द्वारा भूमि विवादों के समाधान और राजस्व अभिलेख में दर्ज त्रुटि निपटारे के लिए चलाए जा रहे राजस्व महाअभियान शिबिर त्रिबेनीगंज में रस्मअदायगी बनकर रह गया हैं। शनिवार को अंचल के परसागढ़ी पंचायत सरकार भवन में आयोजित शिबिर ने इसकी हकीकत उजागर कर दी। परसागढ़ी उत्तर और परसागढ़ी दक्षिण पंचायत के लिए लगाए गए इस शिबिर में लोगो की भारी भीड़ तो उमड़ी, लेकिन कर्मियों की लापरवाही और उदासीन रवैये ने पूरे अभियान की साख पर सवाल खड़ा कर दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिबिर में तैनात कर्मी समय की पाबंदी नहीं रखते। वे दोपहर 11–12 बजे आते हैं। शाम 5 बजे काम समेटकर लौट जाना उनकी दिनचर्या बन चुकी है। शनिवार को भी जब लोगों ने कागजात जमा करना चाहा तो कर्मियों ने लेने से साफ मना कर दिया। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया और कर्मियों को पंचायत भवन के भीतर ही रोक लिया। हालाँकि मौके की नजाकत भाँपकर कर्मी ऑपरेटर पीछे के रास्ते से भागने में सफल रहा।
अधिकारी बने उदासीन
ग्रामीणों का कहना है कि मामले की सूचना देने के बावजूद कोई जिम्मेदार अधिकारी शिबिर स्थल पर पहुँचना तो दूर, फोन रिसीव करना या जवाब देना तक मुनासिब नहीं समझे ।त्रिबेनीगंज अंचल की सीओ और आरओ फोन उठा नही रहे थे, जबकि एसडीएम अभिषेक कुमार ने कहा कि वे बाहर है, डीसीएलआर से बात कीजिये, वही डीसीएलआर ने सीओ से बात करने को कहा।हो हंगामा की जानकारी मिलने पर पंचायत के मुखिया दीपक कुमार ने पहुंच कर आक्रोशित भीड़ को शांत कराया और विभागीय अधिकारियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराने की कोशिश की, लेकिन अंचल और अनुमंडल के पदाधिकारियों ने फोन तक उठाना जरूरी नहीं समझा। मुखिया ने कहा कि लोग अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर आते हैं, मगर खानापूर्ति के चलते अभियान का मूल उद्देश्य ही विफल हो रहा है।
ग्रामीणों में बढ़ रहा है आक्रोश
शिबिर में आवेदन जमा नहीं कर पाने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीण रामप्रवेश यादव ने कहा, “हम लोग जमीन विवाद और दाखिल-खारिज परिमार्जन के चक्कर में महीनों से ब्लॉक का दौड़ लगा रहे हैं। शिबिर में भी समाधान नहीं मिला तो आखिर जाएँ कहाँ?” वहीं कई ग्रामीणों का कहना था कि जब कागजात ही स्वीकार नहीं होंगे तो इस महाअभियान का लाभ आम जनता तक कैसे पहुँचेगा।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने शिबिरों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और दोबारा सही ढंग से शिबिर नहीं लगाया तो वे सामूहिक आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि यह अभियान जनता के विश्वास के साथ छलावा बन चुका है। अगर यही रवैया रहा तो सड़क पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
प्रसासनिक उदासीनता पर सवाल
राजस्व महाअभियान को लेकर सरकार भले ही बड़ी-बड़ी घोषणाएँ कर रही हो, लेकिन परसागढ़ी का अनुभव बताता है कि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। बिना जिम्मेदारी और जवाबदेही तय किए ऐसे शिबिर सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाते हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन लोगों की शिकायतों को गंभीरता से लेकर सुधारात्मक कदम उठाता है या फिर यह महाअभियान भी महज खानापूर्ति बनकर रह जाएगा।
अधिकारियों का पक्ष
डीसीएलआर संस्कार रंजन ने कहा कि शिबिर में भीड़ अधिक होने और तकनीकी कारणों से कुछ लोग के कागजात जमा नही होने की सूचना मिली है।सीओ को बेकल्पिक व्यबस्था करने के लिए कहा गया है।


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