असली एंबुलेंस असली मरीज पर फर्जी वाड़ा का नया तरीका 

असली एंबुलेंस असली मरीज पर फर्जी वाड़ा का नया तरीका 

अम्बेडकरनगर।सरकार लाख कोशिश करें देश और प्रदेश भ्रष्टाचार मुक्त बनेगा कुछ जगहों पर तो काम हुआ परन्तु कुछ विभाग ऐसे हैं जहां पर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना लगता है सरकार के वश में नहीं है। बताना चाहते हैं कि इस समय जिले में एम्बुलेंस की खबर बराबर चल रही कि एम्बुलेंस कर्मचारी सरकार के साथ फर्जी मरीज दिखाकर फर्जीवाड़ा करते हैं और यह बात मुख्य चिकित्सा अधिकारी की टीम ने जांच के दौरान सही पाया और अभी भी कुछ  बिंदु पर जांच चल रही है।
 
परन्तु इस बीच एम्बुलेंस कम्पनी जीवीके ने फर्जी वाड़ा का नया तरीका अपनाया जो बेहद चौंकाने वाला है अभी कुछ दिन पहले कुछ अखबार ने फर्जी मरीज का एक कारण ज्यादा गाड़ी चलाना बताया था क्योंकि उसी के हिसाब से मेंटीनेंस खर्चा मिलता है परन्तु इस समय फर्जी मरीज तो एम्बुलेंस कम्पनी द्वारा कम उठाया जा रहा है परन्तु फर्जी वाड़ा का नया तरीका सामने आ गया। शुक्रवार की सुबह  11 बजे के आसपास बसखारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से 108 एम्बुलेंस UP 32 EG 9994 बरियावन के पास असरफपुर गांव पहुंचती है वहां से मरीज उठाकर पुंथर टांडा की तरफ रवाना होती है जब वहां के ग्रामीणों से पूछा गया तो ग्रामीणो ने बताया सीने में दर्द था एम्बुलेंस जिला अस्पताल लेकर जा रही है।
 
अब यही से गेम शुरू होता है जिस स्थान से मरीज उठाया जाता है वहां से जिला अस्पताल की दूरी 12 से 13 किलोमीटर है और पास के बसखारी सामुदायिक केंद्र की दूरी 12 किलोमीटर परन्तु सबसे बड़ा सवाल यह उठता है गाड़ी जिस रास्ते से गयी दूरी में बहुत ही अंतर आयेगा बताना चाहते हैं एम्बुलेंस मरीज को लेकर जिस तरफ मुड़ती है और पी एम अमित वर्मा के अनुसार वह मरीज हाइवे के रास्ते जिला अस्पताल के लिए निकली है उस हिसाब से मरीज से पुंथर हाइवे की दूरी लगभग 10 किलोमीटर और वहां से ओवरब्रिज की दूरी लगभग 4 किलोमीटर और ओवर ब्रिज से जिला अस्पताल की दूरी लगभग 14 से 15 किलोमीटर के आसपास है कुछ मिलाकर लगभग 13 किलोमीटर के स्थान पर 30 किलोमीटर से ज्यादा गाड़ी क्यों चलाई जा रही है।
 
पीएम अमित वर्मा द्वारा इसका मुख्य कारण जाम की समस्या बताया गया परन्तु बताना चाहते हैं जाम की समस्या ज्यादा तर बरियावन चौराहे के पूरब लगता है जबकि वह स्थान जिला अस्पताल ले जाने में पड़ती ही नहीं पीएम द्वारा यह भी बताया गया है मरीज को जल्दी पहुंचाने के लिए 4-6 किलोमीटर गाड़ी ज्यादा चलना कोई मायने नहीं रखता परन्तु यह दूरी 4-6 नहीं 20 किलोमीटर के आसपास है और उस रोड पर जाम की सम्भावना बनी रहती है। इसी के साथ बताना चाहते हैं कि विगत दिनों कुछ मीडिया संस्थानों ने दावा किया फर्जी केस मामले में ज्यादा गाड़ी चलाना जिससे सरकार द्वारा ज्यादा मेंटीनेंस खर्चा लिया जा सके उसके दावे में सच्चाई नजर आ रही है। कुल मिलाकर कहा जाए मरीज कम होने से एम्बुलेंस कंपनी ने नया फंडा निकाला है।
 
 

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