वैज्ञानिकों ने की सूक्ष्म जीवों के द्वारा किसानों की आय बढ़ाने पर चर्चा।

वैज्ञानिकों ने की सूक्ष्म जीवों के द्वारा किसानों की आय बढ़ाने पर चर्चा।

उधमिता के साथ रोगाणुओं पर अंतरराष्ट्रीय  इ- कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।


स्वतंत्र प्रभात 
 

सीतापुर लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ के वनस्पति विज्ञान विभाग तथा राजा बलवंत सिंह इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी कॉलेज कैंपस आगरा के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय उधमिता के साथ रोगाणुओं पर अंतरराष्ट्रीय  इ- कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।

  कॉन्फ्रेंस में डॉ संकेत जोशी, डिप्टी डायरेक्टर आयल एंड गैस रिसर्च सेंटर सुल्तान क्यूबास यूनिवर्सिटी मस्कट, ओमान ने बताया कि माइक्रोब्स के द्वारा आयल इंडस्ट्री  को मजबूत किया जा सकता है जिस तरह से तेल रिसाव होता है उसे रोकने के लिए माइक्रोब्स बहुत लाभदायक होते हैं। श्रीलंका स्थित ईस्टर्न यूनिवर्सिटी ऑफ बाटीकोला  के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो चंद्रकांता महेंद्रनाथम ने सूक्ष्मजीवों का बायोफर्टिलाइजर में 

कैसे प्रयोग किया जाए और ऑर्गेनिक खेती को कैसे बढ़ावा दिया जाए जिससे रसायनों का लोड कम हो उस पर चर्चा की। ब्राजील के माइक्रोबायोलॉजिस्ट प्रो लुइस  फर नैनडो रमनहोलो ने एक्सोटॉक्सिकोलॉजिकल  पर चर्चा की। हांगकांग स्थित ग्लोबल बायोटेक लिमिटेड के फाउंडर  डॉ संजय नागर ने  मशरूम की उपयोगिता पर चर्चा करते हुए बताया कि मशरूम पूरे विश्व में  प्रसिद्ध है इसकी उपयोगिता के बारे में 

चर्चा करते हुए बताया कि इसके बाजार को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है भारतीय परिवेश में मशरूम न्यूट्रीशन का अच्छा साधन हो सकता है इसे और अधिक उपयोगी बनाने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने मशरूम को ग्रीन दीवार बनाकर "हैंगिंग मशरूम की खेती" करने पर चर्चा की। 

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के डिप्टी डायरेक्टर डॉ एस सी दुबे ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की उन्होंने बताया कि सरकार जैविक खेती एवं मशरूम उत्पादन तथा सूक्ष्मजीवों की उपयोगिता पर जोर दे रही है। लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ के  वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो विवेक प्रसाद ने सूक्ष्मजीवों के शोध पर चर्चा की। माइक्रो बायोलॉजिस्ट सोसाइटी इंडिया के स्टेट प्रेसिडेंट प्रो अमृतेश चंद्र शुक्ला ने बताया कि सूक्ष्म जीवों के 


द्वारा किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि भारत में यह संस्था 30 वर्षों से कार्य कर रही है इस संस्था में भारत तथा विदेशों के 13 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं, वैज्ञानिक एवं उद्यमियों ने सदस्यता ग्रहण की हैं इसकी अगली कॉन्फ्रेंस इंडोनेशिया के बाली शहर में आयोजित की जाएगी। 

कॉन्फ्रेंस में सूक्ष्मजीवों पर काफी समय से शोध कर रहे वैज्ञानिकों को लाइफटाइम माइक्रोबायोलॉजी डिवोशन अवार्ड 2021 से नवाजा गया इसमें भारतीय परिवेश में काम कर रहे माइक्रोबायोलॉजी के वरिष्ठ प्रो विवेक प्रसाद, प्रो एसपी दुबे, प्रो एसके गर्ग,प्रो एनके दुबे तथा प्रो अनुपम दीक्षित को दिया गया। लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलपति प्रो आलोक राय ने बताया कि आज के परिवेश में सूक्ष्मजीवों की बहुत अधिक उपयोगिता है


 यह पोषण का अच्छा साधन है तथा इसमें मशरूम की खेती को और अधिक अच्छे तरीके से बढ़ावा देकर किसानों की आय को भी बढ़ाया जा सकता है। सीबी गुप्ता एग्रीकल्चर पीजी कॉलेज के सह- आचार्य डॉ सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि इस प्रकार की कान्फ्रेंस से विदेशी तकनीकी से भारत को  सूक्ष्मजीवों पर कार्य करने के लिए नया प्लेटफार्म मिलेगा जिससे भारत की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। 


माइक्रोबायोलॉजिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ नितिन अग्रवाल एवं जोनल कोऑर्डिनेटर करीना अफजल  ने बताया कि इस इस कॉन्फ्रेंस में ब्राजील, जर्मनी, हांगकांग, ओमान, श्रीलंका, साउथ अफ्रीका, यूएसए तथा भारत के कई प्रदेशों के शोध छात्रों,  वैज्ञानिकों, उद्यमियों तथा शिक्षा्विदों ने हिस्सा लिया।
 

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