जांच के नाम पर कमीशन का खेल, मरीज बने मोहरा

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जिले के अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीज को जांच के नाम पर कमीशन के खेल में मोहरा बना लिया जाता है

कोरोना के नाम पर खुली लूट,मूकदर्शक बना प्रशासन

सत्यवीर सिंह यादव


अलीगढ़। जिले के अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीज जांच केंद्रों व चिकित्सकों की भरपूर कमाई का जरिया बन चुके हैं। फिर्री का माल है,लूट सके तो लूट की तर्ज पर जिले के अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीज को जांच के नाम पर कमीशन के खेल में मोहरा बना लिया जाता है।

जिले के अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीज जांच केंद्रों व चिकित्सकों की भरपूर कमाई का जरिया बन चुके हैं। लूट सके तो लूट की तर्ज पर जिले के अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीज जांच के नाम पर ठगी का शिकार हो रहे हैं।

जांच के नाम पर चल रहा खेल यह है, कि डॉक्टरों की ओर से जितनी ज्यादा जांच लिखी जाती हैं उनका कमीशन भी निजी केंद्रों से उतना ही ज्यादा बनता है। कमीशन के चक्कर में मरीजों का इलाज भले ही बाद में शुरू होता है, पहले मरीज के परिजन को बाहर से महंगी जांच कराने की स्लिप पहले थमा दी जाती है। यदि चिकित्सकों का कमीशन बंद हो जाए, तो मरीजों की जांच आधी फीस पर हो सकती है।

दो हजार रुपये से ज्यादा का सिटी स्कैन

जांच के खेल में मरीज मोहरा बन गए हैं। निजी केंद्रों से मरीज का एक सिटी स्कैन कराने पर बकायदा परिजन से 22 सौ रुपए तक वसूल किए जाते हैं। लोगों का कहना है कि इसी तरह डिजिटल एक्सरे साढ़े तीन सौ रुपए व अल्ट्रा सांउड की फीस कम से कम छह सौ रुपए भरनी पड़ती है। एक सिटी स्कैन की पर्ची में कम से कम 40 फीसद तक कमीशन होता है। इसी तरह अल्ट्रासांउड कराने व डिजीटल एक्सरे में 30 से 40 फीसद जांच का कमीशन होता है। इसमें पैसे वाले मरीज तो आसानी से महंगी जांच करा लेते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी गरीब वर्ग के मरीजों को होती है। कई बार तो उन्हें इसके लिए दूसरों से कर्ज तक लेना पड़ता है।

भरोसेमंद नहीं रिपोर्ट

मरीज सुधा शर्मा, शांति देवी, मनोज कुमार शर्मा आदि का कहना है कि जिले के जांच केंद्रों के रिपोर्ट की बात करें तो जब मरीज यहां से रेफर होकर पटना या वाराणसी जाता है, तो वहां के चिकित्सक इसे कूड़ेदान में डाल देता है। फिर मरीज को वहां नए सिरे से जांच कराने को कहा जाता है। यही नहीं यहां के जांच केंद्रों की रिपोर्ट में भी अंतर रहता है। जांच के नाम पर कमीशन का खेल कब तक चलेगा, यह तो भगवान ही जानता है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अगर इस पर अंकुश लगाने की पहल करें, तो मरीज लूटने से बच सकते हैं।
कोरोना महामारी के हालात किसी से छिपे नही हैं, पर ताले के लिये मशहूर कहे जाने वाले अलीगढ़ शहर में अस्पतालों में कोरोना इलाज के नाम पर ठगी खेल फल फूल रहा है। हालात ये है कि स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है|