हिमाचल प्रदेश के जिला कागड़ा के विधानसभा क्षेत्र बैजनाथ के विश्व प्रसिद्ध शिव मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर ग्राऊंड

   हिमाचल प्रदेश की जिला कागड़ा की विधानसभा क्षेत्र बैजनाथ शिवभूमि के नाम से विश्व प्रसिद्ध है।किवदंतियों के अनुसार राम रावण युद्ध के दौरान रावण ने भगवान शिवशंकर को प्रसन्न करने के लिए कैलाश पर्वत पर घोर तपस्या की थी और भगवान शंकर ने रावण के साथ लंका चलने का वरदान मांगा, जिस से युद्ध में विजय प्राप्त की जा सके।रावण की तपस्या से प्रसन्न हो कर भगवान शंकर ने रावण के साथ लंका में एक पिंडी के रूप में चलने का बचन दिया और साथ ही शर्त रखी कि इस पिंडी को कहीं जमीन पर न रखें,बल्कि सीधा लंका पहुचाएं।पर रावण ऐसा नहीं कर सका और शिवलिंग बैजनाथ में स्थापित हो गया…. कागड़ा के विधानसभा क्षेत्र बैजनाथ में कल कल बहती बिनवा खडड के किनारे स्थित बैजनाथ शिव मंदिर नवमी शताब्दी का बना हुआ है।शिखराकार शैली से बने इस मंदिर की शिल्पकला अपने आप में अनूठी मिसाल है।मंदिर का संबंध रावण की तपस्या से जोड़ा गया है।

जिसके कारण यहां दशहरा नहीं मनाया जाता है।मंदिर की शिल्पकला को देखने के लिए यहां पर दुनिया के हर कोने से पर्यटकों का आना जाना हर साल लगा रहता है।मंदिर को एक चट्टान को तराश कर बनाया गया है।मंदिर के बाहर शिव बाहन नंदी बैल भी आकर्षण का केंद्र है।मंदिर के गर्भ गृह में स्थित शिवलिंग का इतिहास रावण की तपस्या से जोड़ा जाता है।ऐसा माना जाता है कि यह वही शिवलिंग है, जिसे रावण तप कर लंका ले जा रहा था, लेकिन इस जगह पर लघुशंका के दौरान रावण ने इस शिवलिंग को एक जंगल में पशुओं को चराने वाले चरवाहे के हाथों में पकड़वा दिया था।
रावण का काफी समय तक न लोटने पर चरवाहे ने इस शिवलिंग को यहीं जमीन पर रख दिया और यह शिवलिंग यहीं पर स्थापित हो गया।ऐसा भी कहा जाता है कि जब रावण तप करने के पश्चात कैलाश पर्वत से इस शिवलिंग को लंका ले जाने लगा,तो भगवान शिव ने रावण से वचन लिया था

कि वह रास्ते में इस शिवलिंग को जमीन पर न रखें अन्यथा जहां भी वह शिवलिंग को रखेगा वह वहीं स्थापित हो जाएगा।लंकापति रावण की तपोभूमि के रूप में बैजनाथ नगरी में दो बातें सबको चौंका देने वाली है।पहला यह है कि बैजनाथ में लगभग 700 व्यापारिक प्रतिष्ठान है, परंतु कस्बे में कोई भी सुनार की दुकान नहीं है।ऐसा कहा जाता कि यहां पर सोने की दुकान करनेवाले का सोना काला हो जाता है।जिसके कारण सुनारों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ी।दूसरी बात यह है कि बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना जाने वाला दशहरा पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है,और जगह जगह रामलीला का आयोजन किया जाता है। लेकिन वहीं बैजनाथ में न तो रामलीला का आयोजन किया जाता है और न ही रावण का पुतला जलाया जाता है।जो बैजनाथ में रावण का पुतला जलाता है तो उस ब्यक्ति पर घोर विपत्ति आन पड़ती है।या फिर उसकी मौत हो जाती है।

इस मंदिर का निर्माण नवमी शताब्दी में मयूक और अहूक नाम के दो भाईयों ने करवाया था।मंदिर की कलाशैली को देखकर हर कोई हैरान हो जाता है।कागड़ा के अतिंम शासक राजा संसार चंद ने भी मंदिर का जीणोद्धार करवाया था।1905 के भूकंप में केवल यहीं मंदिर ऐसा था, जिसे आंशिक रूप से नुकसान हुआ था।महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर को अनेक रंग बिरंगे फूलों से सजाया जाता हैं शिवभक्तों के लिए भंडारों का भी आयोजन किया जाता है।

हिमाचल प्रदेश के जिला कागड़ा के विधानसभा क्षेत्र बैजनाथ शिव मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर ग्राऊंड रिपोर्ट )