तेज आंधी ने गरीबों का छीना आशियाना गरीब भुखमरी की कगार पर

लॉक डाउन से कमाई का सहारा टूटने से दुखी है चिन्ताहरण का परिवारजहां एक तरफ सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं आवास के लिए दर-दर लोग भटक रहे हैं भगवान को छप्पर ही मंजूर ना रहा गरीबों की झोपड़ी आंधी ने उड़ा दिया उसके नीचे बकरी और गृहस्ती का सामान नष्ट हो गया

बस्ती।

सोमवार की देर शाम आई तेज आंधी और बारिश में विकास खण्ड बनकटी के मोहना खोर गांव निवासी चिन्ताहरण का रिहायशी झोपडी गिर जाने से काफी नुकसान हो गया। परिवार के सदस्यों ने किसी तरह भाग कर अपनी जान बचाई। किन्तु छप्पर के नीचे दब जाने से चिन्ताहरण की बकरी मौके पर ही मर गई। झोपड़ी के नीचे दब जाने से रोजी रोटी कमाने के लिए बनवाया गया ठेला, चारा मशीन सहित गृहस्थी का अन्य समान नष्ट हो गया।

परिवार का मुखिया चिन्ताहरण ठेले पर सामान रखकर फेरी का काम करके अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करता था। पत्नी राधिका और परिवार के लोगों का रो रो कर बुरा हाल है चिंता हरण से बात करने पर बताया की आवास के लिए बार-बार प्रधान और सिगरेट ट्री के दफ्तर के चक्कर काटते रहे लेकिन आज तक उन्हें आवास नहीं मिला घास फूस के झोपड़े में निवास कर रहा हूं

लेकिन भगवान को झोपड़ा भी मंजूर ना हुआ कल शाम को आई तेज आंधी नेम आशियाना छीन लिया उसके नीचे रोजी रोटी चलाने के लिए ठेले पर दुकान लगाता था खेला टूट गया बकरी में दब कर के मर गई एक तरफ तो सरकार के बंदी के कारण हम लोगों से भुखमरी के कगार पर चल रहे थे दूसरी तरफ भगवान भी गरीबों पर सितम ढा रहे हैं ऐसे में गरीब जाएं कहां अगर मेरे पास 15000 होते तो आवास मुझे भी मिल जाता लेकिन ठेले पर अपनी जीत का चला रहा था बच्चों को पाल पोस रहा था कहां से 15000 दे पाऊं प्रधान और सेक्रेटरी को जिससे मुझे भी छत के नीचे रहने को मिल जाता क्या करें अब तो रोजी-रोटी पर भी संकट मंडराने लगा क्योंकि खेले की बनवाई मेरे पास रह नहीं गई है

महीने भर की कमाई पाई पाई जोड़ कर रखा था वह बंदी में खर्च हो चुका ना तो मेरा नरेगा का कार्ड है और ना ही सरकार से सरकार से कोई प्रोत्साहन राशि मिलती है क्योंकि ना हमारे  खेत भी नहीं है भगवान भरोसे  जीने को मजबूर हैं