जयपुरिया स्कूल में टीवी के पत्रकार को बंधक बना स्कूल मैनेजमेंट ने की बदसलूकी

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कैमरा माइक के साथ मोबाइल और मेमोरी कार्ड तक डिस्ट्रॉय करने की की गई कोशिश।

नीरज बोरा का जयपुरिया स्कूल कनेक्शन


लखनऊ।

राजधानी में इन दिनों कानून व्यवथा किस कदर से चरमरा गयी है इसका अंदाज आप इस घटना से लगा सकते है कि यह घटना स्वयं में ही कानून व्यवस्था की हकीक़त बयाँ करने के लिए पर्याप्त है।राजधानी में लगातार पत्रकारों से हो रही बदसलूकी की घटनाये कम होने का नाम नही ले रही लगातार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले  पत्रकारों से बदसलूकी बदस्तूर जारी है। जिसकी वजह से यह सवाल उठना लाज़मी है कि जब लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ ही नही सुरक्षित है तो यहाँ के आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या भरोसा। 


ऐसा ही ताजा मामला प्रकरण राजधानी के जयपुरिया सेवा कैम्पस विद्यालय सीतापुर रोड का है जहाँ पर 06 घंटे तक लाइब्रेरी में बच्चे को बंद करने की सूचना पर लाइव कवरेज करने गये विजय मिश्रा व कैमरामैन से बदसलूकी करते हुए उनको 02 घण्टे तक बंधक बनाए जाने का मामला प्रकाश में आया है। जहाँ पर ऊंची पहुच के चलते कवरेज कर रहे मीडिया कर्मियों से उनके माइक मोबाइल मेमोरी कार्ड व अन्य समान छीन कर एविडेंस हटाने के साथ मीडिया इक्विपमेंट्स डिस्ट्रॉय करने के साथ एक कमरे में विद्यालय प्रशासन के द्वारा बधक बनाकर रखा गया जहाँ पर घटना के 02 घण्टे के बाद मड़ियांव पुलिस के द्वारा टीवी पत्रकार को छुडाया जा सका जिसके बाद आनन फ़ानन में मड़ियांव पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी रही। 


पीड़ित पत्रकार की जुबानी पत्रकार के साथ हुई बदसलूकी का पूरा मामला


पीड़ित पत्रकार ने बताया कि टीवी के संवाद सूत्र की सूचना पर लाइव कवरेज पर पहुंचा था विद्यालय। पत्रकार के साथ हुई बर्बरतापूर्ण व्यवहार का जानकारी स्वतंत्र प्रभात ने जब लिया तो पीड़ित पत्रकार ने स्कूल प्रबंधन के द्वारा  की गई बदसलूकी को हमारे संवाददाता से बताइ जिसमें पत्रकार ने बताया कि छठी क्लास के बच्चे को 2 दिन पहले बंधक बनाकर रखा गया था जिसकी लाइव कवरेज के लिए विद्यालय में पहुंचा जहां हमें और हमारे कैमरे में  देखकर जयपुरिया मैनेजमेंट में कार्यरत आरपी सिंह गाली गलौज करते हुए हमारे माइक और कैमरे को तोड़ने लगे जिस पर पत्रकार ने कहा कि खबर ऑन एयर चल रही है।

आप भी अपना पक्ष रखें आपकी बात भी बिना काटे प्रसारित होगी जिस पर 20 अन्य स्टाफ मिलकर धक्का-मुक्की के साथ मारने पीटने लगे और हमें जबरदस्ती स्कूल कैंपस के अंदर एक कमरे में ले जाकर बंधक बना दिया। जहां हमारे से मोबाइल छीनते हुए सभी इंपॉर्टेंट जानकारियों के साथ मेमोरी कार्ड  डिस्ट्रॉय करने की पूरी कोशिश की गई जिस पर हमारे मना करने पर महत्वपूर्ण मामलों की जानकारी भी डिलीट कर दी गई ।

जब राजधानी के पत्रकारों को हमारे बंधक बनाए जाने का मामला मालूम हुआ तो मौके पर सैकड़ों पत्रकार विद्यालय पहुंचे जहां पुलिस की मदद से मुझे रिहा किया गया। पत्रकारों के आने से पहले तक स्कूल प्रबंधन ने अलग-अलग तरीके से मुझे प्रताड़ित करने की कोशिश की विद्यालय के प्रबंधक गिरजा शंकर अग्रवाल की मौजूदगी में यह सब हो रहा था जिसके बाद भाजपा के विधायक नीरज वोरा वहां पहुंचे जो अपने को विद्यालय प्रबंधक गिरजा शंकर अग्रवाल का मौसा बताने लगे। मामले को बढ़ता देख पत्रकार और पुलिस की मौजूदगी में पूरे 2 घंटे के बाद मुझे छोड़ा गया

लेकिन जिस बच्चे को 2 दिन पहले इन लोगों ने बंधक बनाया था ऊंची रसूखदारी की वजह से उसकी भी एफ आई आर अभी तक दर्ज नहीं होने दी गई। नीरज बोरा की शासन सत्ता तक बड़ी पहुंच का नाजायज फायदा जयपुरिया विद्यालय प्रबंधन बड़े स्तर पर उठा रहा है। इससे पीछे भी कई बार बोरा के कैंपस में बच्चों के फीस और अन्य तरह के मामले कई बार उजागर हुए  लेकिन कभी भी किसी भी मामले पर कोई भी कार्यवाही नहीं हुई जिस वजह से आरपी सिंह जैसे लोग अपनी दादागिरी दिखाने से पीछे नहीं हटते।

वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पत्रकार के पास मौजूद बहुत ही इंपॉर्टेंट जानकारी और स्टिंग को मोबाइल छीनने के बाद दबंग स्कूल प्रबंधक ने अपने स्टाफ के द्वारा जबरन डिलीट और डिस्ट्रॉय कर दिया।ऐसे मामलों पर लखनऊ पुलिस कमिश्नर साहब को खुद ही मामले की गंभीरता को देखते हुए विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ उचित विधिक कार्रवाई करनी चाहिए। ताकि आने वाले समय में पत्रकारों के साथ हो रही बदसलूकी को रोका जा सके।