परीक्षाओ के मौसम मे विद्यार्थीयो के सफलता के कुछ मुल मंत्रो के साथ मोदी मंत्र

विद्यार्थी भाई बहनो व अभिभावक गण नमस्कार साथ मे नववर्ष की   आप सभी को शुभकामनाएं कहते है अगर ज़िन्दगी मे कुछ पाना है सफल होना है तो  तरीका बदलो इरादे नही ,  चाहे आपकी पढाई का तरीका हों, या कला कौशल का,  उत्साह मे कभी  भी  कमी नही होने दे,  हमे सूर्य की तरह चमकने के लिए पहले सुर्य की तरह तपना जलना होगा यानी सफल इरादो के साथ लगन से उत्साह के साथ लच्छ की ओर बढना होगा तभी सफलता हमारी कदम चुमेगी, मन के सूरज को बुझने ना दे, 

प्रतिस्पर्धा का दौर है इस दौर में वही सफल है जो कडा मेहनत करे ,परीक्षाओ मे अच्छे अंक लाने का दबाव छात्रो पर है, प्रतिस्पर्धा के दौर में अच्छे से अच्छे अंक आने लगे है, मैट्रीक व इन्टर की परीक्षा में आने वाले अंको की बात करे तो 99 प्रतिशत के साथ साथ गणित और अंग्रेजी विषयो मे 100 मे 100 अंक आने लगे हैं, हमारे जमाने मे 60,व 65 प्रतिशत अंक मिलने पर पास पढोस मे खुशियो का मिठाई बाटते थे, पर आज 99 अंक पाने पर भी छात्र के साथ साथ अभिभावक मे 1 अंक कम होने का मलाल होता है , 

 छात्र भाईयो आप जो भी पढे लगन व उत्साह के साथ पढे, आप कितने घंन्टे पढते है ये महत्व नही रखता बल्कि आप दिलचस्पी के साथ उत्साह के साथ जो पढते है  वो    बहुत  बडा महत्व रखता है   क्लास मे दोस्तो से, शिक्षक से जो समझ ना आये बार बार निंहसंकोच  पुछें, और उस विषय पर चर्चा जरूर करे,  रटने  (Parrot learning)  से बचे, रटने (Parrot learning) से विषय वस्तु को समझना ज्यादा बेहतर होता है , समय को सदा महत्व दे,  समय   के साथ साथ  विद्यार्थी जीवन मे खेल कुद का बहुूत  बडा  महत्व है, खेल कुद एकाग्रता के साथ साथ मशतिष्क को विकशीत करता है, अभिभावक छात्रों के स्वास्थ के साथ साथ खान पान का भी विशेष ध्यान दें

जो शारीरिक व मानसिक विकास के लिए जरुरी है 21वीं सदी मे मोबाइल इंन्टरनेट  लोगो की संसाधन की मुख्य साधन बन चुका है, समय के साथ इसका उपयोग सार्थक के साथ कई माइने मे निरर्थक भी सिद्ध हो रहा है तो मोबाइल के अनावश्यक उपयोग से बचे, और बचायें, समय की महत्ता को समझते हुये पढाई के साथ साथ मनोरंजन भी जरूरी है जीससे मांसिक तनाव कम होता है और  आपको  नई ऊर्जा मिलेगी, ऐकांन्त व शान्त माहौल मे याद किये गये पाठ्यक्रम हमारी मस्तिष्क मे समा जाता है इसलिए प्रायः प्रातः काल का समय स्मरण के लिए सही माना गया है ,

समय विद्यार्थी जीवन का मुल कुंजी हैं, समय के साथ, समय के अन्दर प्रश्नों का उत्तर देने का भी अभ्यास करना जरूरी है ,जो भी लिखे साफ साफ शुद्व व,  स्पष्ट होना चाहिए ,आप अपनी तुलना अपने पुराने रिकॉर्ड से कीजिए, आप कंपटीशन अपने रिकॉर्ड से कीजिए, आप अपने रिकॉर्ड ब्रेक कीजिए, आप अगर खुद के रिकॉर्ड ब्रेक करेंगे तो आपको कभी भी निराशा के गर्त में डूबने का मौका नहीं आयेगा। -अगर हम अपने आपको कसौटी के तराजू पर झौकेंगे

नहीं तो जिंदगी में ठहराव आ जाएगा। 
-ज़िन्दगी का मतलब ही होता है गति।


-लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो पहुंच में तो हो, पर पकड़ में न हो। जब हमारा लक्ष्य पकड़ में आएगा तो उसी से हमें नए लक्ष्य की प्रेरणा मिलेगी। 
-जो सफल लोग होते हैं, उन पर समय का दबाव नहीं होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उन्होंने अपने समय की कीमत समझी होती है ।
-कसौटी बुरी नहीं होती, हम उसके साथ किस प्रकार के साथ डील करते है उसपर डिपेंड करता है। मेरा तो सिद्धांत है कि कसौटी कसती है, कसौटी कोसने के लिए नहीं होती है ।


-जब मन में अपनेपन का भाव पैदा हो जाता है तो फिर शरीर में ऊर्जा अपने आप आती है और थकान कभी घर का दरवाजा नहीं देखती है। 
-मां-बाप और शिक्षकों को बच्चों की तुलना नहीं करना चाहिए, इससे बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। हमें हमेशा बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए। 
-डिप्रेशन या स्ट्रेस से बचने के लिए काऊंसिलिंग से भी संकोच नहीं करना चाहिए, बच्चों के साथ सही तरह से बात करने वाले एक्सपर्ट से संपर्क करना चाहिए।


-एक कविता में लिखा है कि, “कुछ खिलौनों के टूटने से बचपन नहीं मरा करता है।” इसमें सबके लिए बहुत बड़ा संदेश छुपा है ।अभिभावक से विशेष अनुरोध है  की छात्रों  का अलग अलग रुची व शमता होती है इसलिए कभी भी किसी के साथ तुलना ना करे ,अपने लक्ष्य की ओर आगे वढे असफलता आती भी है तो उससे न घबरायें ,कमी को दूर करने का प्रयास करे ,हमेसा सकारात्मक विश्वास रखे, कोई भी परीक्षा अंन्तिम नही होता, सफलता तो मिलना ही है,

इसी शुभकामना के साथ आपका शुभचिन्तक 
दीपक कुमार श्रीवास्तव