प्रेम दिवस

चक्षुओं में मदिरा सी मदहोशी

मुख पर कुसुम सी कोमलता

तरूणाई जैसे उफनती तरंगिणी

उर में मिलन की व्याकुलता
जवां जिस्म की भीनी खुशबू

कमरे का एकांत वातावरण

प्रेम-पुलक होने लगा अंगों में

जब हुआ परस्पर प्रेमालिंगन
डूब गया तन प्रेम-पयोधि में

तीव्र हो उठा हृदय स्पंदनअंकित है

स्मृति पटल परप्रेम दिवस पर प्रथम मिलन
          ………………..         

:-आलोक कौशिक