परंपरागत खेलों को बढावा दिए जाने की जरूरत है – हिमांशु

– पहाडग़ांव में युवा समाजसेवी हिमांशु निरंजन ने दंगल का फीता काटकर किया उद्घाटन
कोंच। 
तहसील क्षेत्र के ग्राम पहाडग़ांव में आयोजित दंगल का उद्घाटन फीता काट कर जिला पंचायत अध्यक्ष सुमन निरंजन के प्रतिनिधि के तौर पर युवा समाजसेवी हिमांशु निरंजन ने किया। कुश्ती की शुरुआत पहलवानों के हाथ मिलवा कर करते हुए हिमांशु ने कहा, अखाड़ों में कुश्तियां या कबड्डी जैसे परंपरागत खेल हमारी भारतीय संस्कृति के परिचायक हैं लेकिन आज आधुनिकता की चकाचौंध युवाओं में परंपरागत खेलों के प्रति अरुचि पैदा कर रही है जिससे ये कुश्ती और कबड्डी जैसे खेल बीते दिनों की यादें बन कर रह गए हैं।

इस तरह के खेलों को बढावा दिए जाने की आज सख्त जरूरत है जिसके लिए जरूरी है कि इस तरह के कार्यक्रम समय समय पर होते रहें और इन खेलों के माहिर युवाओं में इनके प्रति आकर्षण पैदा करें तथा इनका प्रशिक्षण दें। इस मौके पर हिमांशु निरंजन ने दंगल में डिकौली व औरैया के पहलवानों के हाथ मिलवाकर कुश्ती की शुरुवात कराई। पहलवानों ने बेहतरीन दांवपेंच दिखाए। इस कुश्ती में डिकौली के पहलवान खेमराज ने बाजी मारते हुए अनुज पहलवान को चित कर दिया। डिकौली के ही ऋतिक ने मउवाखेरा के पहलवान आनंद पाल को हराया।

दीपक पहलवान भिंड ने प्रद्युम्न ग्वालियर, महलुआ के श्रीपाल ने साकिन के अमरपाल, गोपाल भिंड ने मंटू ग्वालियर, छत्रपाल महलुआ ने सुरेश पहाडग़ांव, टिंकू डिकौली ने रवीन्द्र झलोखर को अपनी अपनी कुश्तियों में हराया जबकि रवि कुठौंदा और अंकित भांडेर की कुश्ती बराबरी पर छूटी। सबसे रोचक कुश्ती निक्की कुठौंदा और टिंकू डिकौली के बीच रही जिसमें निक्की ने टिंकू को हरा कर खूब तालियां बटोरीं। इस मौके पर दाऊ परैथा, चिराग उदैनिया, वकील रनवा, ग्राम प्रधान हरगोविंद राजपूत सहित तमाम ग्रामीण भी मौजूद रहे।

अव्वल रहीं कालका की भैंस व वीरेन्द्र की गाय
कोंच। 
पहाडग़ांव में जारी बसंतोत्सव मेला में पशु प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया जिसका उद्घाटन विनय पचौरी ने किया। प्रदर्शनी में एक से एक अच्छी नस्ल के पशुओं ने प्रतिभाग किया जिसमें कालका की भैंस प्रथम रही जबकि वीरेन्द्र यादव काशीपुरा की गाय भी पहले स्थान पर रही। गोविंददास पहाडग़ांव की भैंस तथा गाय द्वितीय स्थान पर रहीं। लाखनसिंह की बकरी, रामखिलावन का भैंसा पहले स्थान के लिए चयनित किए गए। अन्य जमाम पशुओं को सांत्वना पुरस्कार मिले। ग्राम प्रधान हरगोविंद राजपूत, पूर्व प्रधान घनश्याम भगत, मिथलेश राजपूत, शीतल, शंकर राजपूत, मनोज नायक, मानसिंह बंटे, महेन्द्रसिंह, रतीराम, नीतू शर्मा, देवेन्द्र शर्मा, गाकुल, धर्मेन्द्रकुमार, गिरिजा वर्मा आदि मौजूद रहे।

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